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हिलसा में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफNewswrap
Sat, 04 Dec 2021 10:01 PM
हिलसा में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान

हिलसा में पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे किसान

किसानों ने कहा-पराली को नष्ट करने की व्यवस्था नहीं

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04हिलसा01: हिलसा प्रखंड क्षेत्र में खेतों में जलती पराली।

हिलसा। निज प्रतिनिधि

सरकार व स्थानीय प्रशासन के लाख प्रतिबंधों के बावजूद खेतों में धड़ल्ले से पराली जलायी जा रही है। हिलसा प्रखंड के कई गांवों में किसानों ने पराली जलायी है। किसानों ने कहा कि पराली को नष्ट करने के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। इस कारण मजबूरी में वे पराली जला रहे हैं।

कुछ दिन पहले हिलसा प्रखंड परिसर में वरीय पदाधिकारी से लेकर कृषि विभाग के पदाधिकारियों ने किसान के साथ बैठक कर पराली जलाने वाले किसान को चिह्नित कर योजनाओं के लाभ से वंचित करने की चेतावनी दी थी। इसका भी कहीं असर नहीं दिख रहा है।

पराली जलाने वाले किसानों पर एक्शन लेना तो दूर कृषि सलाहकार व कृषि सम्नवयक क्षेत्र में भ्रमण करना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। खेतों में पराली न जलानी पड़े इसके लिए किसानों को उचित संसाधन की व्यवस्था नहीं है। किसान थक हारकर खेतों में पराली जलाने पर मजबूर हैं।

प्रभावित हो रही गेहूं की खेती

फसल अवशेष को खेतों से समय से नष्ट नहीं करने पर गेहूं की खेती प्रभावित होने लगती है। बता दें कि गेहूं की अच्छी ऊपज के लिए 15 दिसम्बर तक इसकी बुआई का उचित समय है। किसानों का कहना है कि सरकार रबी व खरीफ दोनों फसलों के अवशेष को जलाने पर रोक लगाने का फरमान तो जारी कर देती है। लेकिन, किसान फसल अवशेष को भूमि में खाद के रूप में कैसे परिवर्तन करें। सरकार द्वारा कुछ कृषि यंत्रों को खरीदने पर अनुदान देने की बात कही जाती है, लेकिन अनुदान भी मात्र दिखावा जैसा है।

पराली को खाद में तब्‍दील करें किसान

दिनेश प्रसाद, मनोज कुमार, संजय कुमार व अन्य किसानों ने बताया कि सरकार पराली को खाद के रूप में परिवर्तन करने के संसाधन का व्यवस्था करे, तो खेतों में पराली जलाने की नौबत ही न आए।

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