पहल : ग्रामीण क्षेत्र की नल-जल बोरिंग और चापाकलों के पानी की होगी जांच

Jan 22, 2026 10:40 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव : बिहार में ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल और चापाकलों का पानी जांचा जाएगा। पीएचईडी ने मार्च तक सभी जल स्रोतों की जांच का लक्ष्य रखा है। इस अभियान का उद्देश्य प्रदूषित तत्वों की पहचान कर लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। जियो टैगिंग और फोटो अपलोडिंग प्रक्रिया से जांच की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।

पहल : ग्रामीण क्षेत्र की नल-जल बोरिंग और चापाकलों के पानी की होगी जांच

हिन्दुस्तान एक्सक्लूसिव : पहल : ग्रामीण क्षेत्र की नल-जल बोरिंग और चापाकलों के पानी की होगी जांच पानी के प्रदूषित तत्वों की पहचान कर लोगों को बीमारियों से बचाना लक्ष्य मार्च तक हर चापाकल और नल-जल के पाची की कुंडली खंगालेगा विभाग जल जांच प्रयोगशाला और ट्रेंड ऑपरेटरों को पानी की जांच की जिम्मेवारी फोटो जल : जिला जल जांच प्रयोगशाला में पानी के नमूनों की जांच करते कमेष्टि देवेशचन्द्र व अन्य। बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। क्या आप जो पानी पी रहे हैं, वह शुद्ध है? इसकी हकीकत जानने के लिए पीएचईडी ने कमर कस ली है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजना की बोरिंग और सरकारी चापाकलों के पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है।

विभाग ने मार्च तक सभी जल स्रोतों की जांच पूरी करने का लक्ष्य रखा है। खास बात यह है कि इस बार जांच में कोताही या फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा। पानी के नमूना संग्रह के वक्त जियो टैगिंग अनिवार्य कर दी गई है। नालंदा के करीब 32 सौ वार्डों में नल-जल के माध्यम से लोगों के घरों तक पानी पहुंचाया जा रहा है। साथ ही 596 नयी बसावटों में नल-जल से पानी पहुंचाने की कवायद चल रही है। इसके अलावा करीब 30 हजार के आसपास हैंडपम्प हैं। हालांकि, इनमें से कई हैंडपम्प काफी पुराने हो गये हैं और पानी नहीं निकलता है। अभियान उद्देश्य यह कि फ्लोराइड, क्लोराइड, आर्सेनिक, कैल्सियम, मैगनिशियम, आयरन जैसे रासायनिक तत्वों और बैक्टीरियल (जीवाणु) प्रदूषण की पहचान कर लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। बिना फोटो के नहीं होगी जांच: पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जल जीवन मोबाइल ऐप का सहारा लिया जा रहा है। कनीय अभियंताओं को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें बोरिंग या चापाकल से पानी का नमूना लेते वक्त जियो टैगिंग के साथ तस्वीर ऐप पर अपलोड करनी होगी। जिला और अनुमंडल प्रयोगशाला में उन्हीं नमूनों की जांच स्वीकार की जाएगी, जिनकी फोटो और लोकेशन ऐप पर सही पाया जाएगा। दो स्तर पर पानी शुद्धता की जांच : बोरिंग और चापाकलों से पानी के नमूनों की जांच एक नहीं, दो स्तर पर की जाएगी। जांच रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल पर भेजी जाएगी। पहले स्तर पर पम्प ऑपरेटरों को प्रशिक्षण देकर ट्रेंड किया गया है। सभी 230 पंचायतों के ऑपरेटरों को फिल्ड टेस्ट किट (एफटीके) उपलब्ध करायी गयी है। ऑपरेटर किट की मदद से पांनी में उपलब्ध छह तत्वों और जीवाणु की जांच करेंगे। जबकि, जिला जांच प्रयोगशाला में 14 पारामिटर और जीवाणु की जांच होगी। फ्लोराइड पर विशेष फोकस: जिले में करीब 157 नल-जल योजनाओं में पहले से फ्लोराइड की समस्या है, जहां ट्रीटमेंट प्लांट लगे हैं। अधिकारियों ने तय किया है कि फ्लोराइड प्रभावित वार्डों में हर महीने पानी की जांच होगी। जबकि, सामान्य गुणवत्ता वाले इलाकों में हर तीन महीने पर रिपीट टेस्ट किया जाएगा। क्या कहते हैं अधिकारी जिले के सभी वार्डों में नल-जल के माध्यम से घर-घर पानी पहुंचाया जा रहा है। लोगों को शुद्ध जल की आपूर्ति और पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल की जांच करायी जा रही है। नमूना संग्रह के साथ ही जांच की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश कर्मियों और पदाधिकारियों को दे दिया गया है। राघवेन्द्र कुमार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, पीएचईडी जल जांच प्रयोगशाला में इन तत्वों की जांच 1. पीएच 2. टर्बीडीटी (गंदलापन)3. ईसी (इलेक्ट्रिकल कंडक्टविटी) 4. टीडीएस (टोटल घूलित लवण)5. टीएच (टोटल हार्डनेस)6. कैल्सियम 7. मैगनिशियम 8. क्लोराइड 9. अल्कलाइन(क्षारीय) 10.आयरन 11. नाइट्रेट 12. सल्फेट 13. फ्लोराइड 14. आर्सेनिक 15. जीवाणु पम्प ऑपरेटर इन तत्वों की करेंगे जांच: 1. टीडीएस (टोटल घूलित लवण) 2. पीएच 3. टर्बीडीटी (गंदलापन) 4. क्लोराइड 5. फ्लोराइड 6. नाइट्रेट 7. जीवाणु जिले में कहां-कहां जल जांच प्रयोगशाला: 1. जिला जांच प्रयोगशाला, बिहारशरीफ 2. अनुमंडल जांच प्रयोगशाला, राजगीर 3. अनुमंडल जांच प्रयोगशाला, हिलसा 4. जांच प्रयोगशाला, हरनौत

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