
खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद कर रहे बुजुर्ग
हिलसा में एक 72 वर्षीय बुजुर्ग किशोरी चौहान को तीन महीने से पेंशन नहीं मिली। सत्यापन कर्मी ने उन्हें मृत बताकर पेंशन बंद करने की अनुशंसा की। उन्होंने प्रखंड कार्यालय में सबूत के साथ आवेदन दिया है। यह मामला अकेला नहीं है, कई अन्य लाभार्थियों को भी इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
हिन्दुस्तान पड़ताल : खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद कर रहे बुजुर्ग जिंदा को मृत बता कर दी पेंशन बंद करने की अनुशंसा प्रखंड कार्यालय में दिया आवेदन, 3 महीने से नहीं मिली पेंशन फोटे : हिलसा पेंशन : हिलसा में लाभार्थी किशोरी चौहान। हिलसा, निज संवाददाता। प्रखंड में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। दरअसल, एक बुजुर्ग को तीन महीने से पेंशन की राशि नहीं मिली है। ऑफिस के काफी चक्कर लगाने के बाद पता चला कि उन्हें मृत बताकर वृद्धावस्था पेंशन बंद करने की अनुशंसा कर दी गयी है। अब खुद को जिंदा साबित करने के लिए उन्होंने सबूत के साथ प्रखंड कार्यालय में आवेदन दिया है।

देखना है कि सरकारी कागजों में वे कब तक जिंदा होते हैं। पीड़ित बारा पंचायत के नदवर गांव निवासी 72 वर्षीय किशोरी चौहान हैं। उन्होंने बताया कि वे करीब 10 सालों से वृद्धा पेंशन ले रहे थे। सरकार ने पेंशन की राशि बढ़ायी तो अगस्त तक रुपये उनके खाते में आये। उसके बाद से रुपये नहीं मिले। बैंक और ब्लॉक के कई चक्कर लगाये। चुनाव के कारण कुछ पता नहीं चल पाया। काफी मशक्कत के बाद प्रखंड कार्यालय से पता चला कि सत्यापन करने वाले कर्मी ने उन्हें मृत बताकर पेंशन बंद करने की अनुशंसा कर दी है। जानकारी मिलने पर आधार कार्ड और पासबुक के साथ प्रखंड कार्यालय में आवेदन दिया है। चर्चा है कि यह इकलौता मामला नहीं है। कई लाभार्थियों को मृत या ट्रेसलेस बताकर रिपोर्ट कर दी गयी है। बीडीओ अमर कुमार का कहना है कि इधर कोई जांच नहीं करवायी गयी है। दो-तीन साल पहले करायी जांच के आधार पर पेंशन रुकने की शिकायत मिली है। ऐसे शिकायतों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। दो साल में भी नहीं हुई पर्यवेक्षिकाओं की बहाली 22 पदों पर होना था चयन, अंतिम मेधा सूची का प्रकाशन नहीं हिलसा, निज संवाददाता। जिले में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों के सफल संचालन के लिए करीब दो साल पहले पर्यवेक्षिका के 22 पदों के लिए सीधी भर्ती निकाली गयी थी। साधारण कोर्स करने वाली महिलाओं समेत तकनीकी डिग्रीधारी 389 महिलाओं ने आवेदन किया था। कागजों की जांच के बाद अक्टूबर 2024 में 75 अभ्यर्थियों की औपबंधिक मेघा सूची का प्रकाशन किया गया था। साल भर गुजर गये, अंतिम मेघा सूची का प्रकाशन नहीं हुआ। अंतिम मेघा सूची का प्रकाशन नहीं होने के कारण बहाली की प्रक्रिया रुकी हुई है। दावेदार असमजंस की स्थिति में है। औपबंधिक सूची में नाम होने के कारण 75 दावेदारों की सांस अटकी पड़ी है। डीपीओ अर्चना कुमारी का कहना है कि उच्चाधिकारी के आदेश के अनुसार बहाली की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित है। आदेश मिलने पर रिक्त पदों के लिए बहाली की जाएगी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


