पुरुषोत्तमी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने रखा व्रत, मंदिरों में उमड़ी आस्था

हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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पुरुषोत्तमी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और भगवान विष्णु की पूजा की। इस दिन व्रत, जप-तप, दान-पुण्य करने से अनंत पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पंडितों ने बताया कि इस एकादशी का विशेष महत्व है और दान देने से सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

पुरुषोत्तमी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने रखा व्रत, मंदिरों में उमड़ी आस्था

पुरुषोत्तमी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने रखा व्रत, मंदिरों में उमड़ी आस्था अधिकमास की एकादशी का विशेष महत्व, दान-पुण्य से मिलता है अनंत गुना फल पुराणों में 26 एकादशी का वर्णन पावापुरी, निज संवाददाता। अधिकमास में पड़ने वाली पावन पुरुषोत्तमी एकादशी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। बुधवार को सुबह से ही श्रद्धालुओं ने व्रत रख भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की तथा मंदिरों में दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।

इस एकादशी का महत्व

पुरुषोत्तम मास में आने वाली इस एकादशी को अत्यंत फलदायी और दुर्लभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, जप-तप, दान-पुण्य और भगवान विष्णु के स्मरण से अनंत गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और तुलसी माता की विधि-विधान से पूजा की। कई लोगों ने दिनभर निर्जला या फलाहार व्रत रखकर भजन-कीर्तन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया। शाम के समय मंदिरों में दीप जलाकर आरती की गई।

दान का महत्व

पंडित सूर्यमणि पांडेय ने बताया कि सामान्य रूप से एक वर्ष में 24 एकादशी पड़ती हैं, लेकिन जब अधिकमास आता है, तो उसमें दो अतिरिक्त एकादशी पड़ने के कारण पुराणों में कुल 26 एकादशी का वर्णन मिलता है। अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय पुरुषोत्तम मास कहा गया है, इसलिए इस मास में पड़ने वाली एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि पुरुषोत्तमी एकादशी पर किए गए व्रत और दान से व्यक्ति के पापों का नाश होता है तथा सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन अन्न, वस्त्र, जल, फल और दक्षिणा दान करने को विशेष पुण्यदायी माना गया है। कई श्रद्धालुओं ने गरीबों और जरूरतमंदों के बीच भोजन एवं वस्त्र का वितरण भी किया।

कथा और सत्संग

आश्रमों और धर्मशालाओं में हुई कथा सत्संग : राजगीर मलमास मेले में भी पुरुषोत्तमी एकादशी को लेकर विशेष धार्मिक माहौल बना रहा। विभिन्न आश्रमों और धर्मशालाओं में कथा, सत्संग और भजन-कीर्तन हुआ। साधु-संतों ने श्रद्धालुओं को अधिकमास के महत्व और सनातन परंपराओं की जानकारी दी। पंडित कृष्णदेव पांडेय ने बताया पुरुषोत्तम मास आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्रत, पूजा-पाठ और दान-पुण्य किया। (पावापुरी से अनिल उपाध्याय)

सामान्य प्रश्न

पुरुषोत्तमी एकादशी पर भक्तों ने क्या किया?
भक्तों ने व्रत रखा और भगवान विष्णु की पूजा की।
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