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फसल क्षति: 10 प्रखंडों की 64 पंचायतों के किसानों को मिलेगा अनुदान

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 09:40 PM
फसल क्षति: 10 प्रखंडों की 64 पंचायतों के किसानों को मिलेगा अनुदान

फसल क्षति: 10 प्रखंडों की 64 पंचायतों के किसानों को मिलेगा अनुदान

जलभराव के कारण खेती न कर सके 20 पंचायतों के धरतीपुत्रों को भी लाभ देने की योजना

सिंचित भूमि के लिए प्रति हेक्टेयर साढ़े 13 हजार तो असिंचित के लिए 65 सौ रुपये

अनुदान पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू

चार माह में चार बार आयी बाढ़ पर अनुदान सिर्फ दो बार का ही मिलेगा

फोटो

धान : हरनौत प्रखंड के सरथा गांव में बारिश के बाद खेत में अंकुरित धान।

बिहारशरीफ। कार्यालय प्रतिनिधि

खरीफ मौसम में इस बार बाढ़ और आंधी व अधिक बारिश से जिले में खूब तबाही मची थी। 15 हजार 800 हेक्टेयर में लगी धान व अन्य फसलें बर्बाद हो गयी थीं। किसानों को करोड़ों की चपत लगी थी। फसलों की हुई क्षति के एवज में सरकार धरतीपुत्रों को अनुदान देगी। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

खरीफ सीजन में जिले के अलग-अलग प्रखंडों में चार बार बाढ़ आयी। 10 प्रखंडों की 54 पंचायतों के 153 गांवों के 11 हजार 700 हेक्टेयर में लगी फसलों को नुकसान हुआ था। जबकि, अक्टूबर में लगातार कई दिनों तक तेज हवा और बारिश से 33 सौ हेक्टेयर में तैयार धान की फसल चौपट हो गयी। इतना ही नहीं, चार प्रखंडों की 20 पंचायतों के 800 हेक्टेयर खेतों में लबालब पानी भरे रहने के कारण धरतीपुत्र चाहकर भी फसल नहीं लगा सके। खास यह भी कि मई में आया यास तूफान से फसलों को नुकसान नहीं हुआ है। सच्चाई यह कि जितनी बार बाढ़ और बारिश आयी, कुछ न कुछ किसानों को नुकसान दे गयी। नियम है कि 33 फीसद से ज्यादा क्षति होने पर ही फसल क्षतिपूर्ति का अनुदान मिलता है। इससे कम नुकसान होने पर क्षतिपूर्ति नहीं मिलती है। यही कारण है कि दो बार हुई क्षति का ही अनुदान दिया जाना है।

यास से पान फसल की क्षति:

यास तूफान और मई में लगातार बारिश से इस्लामपुर और राजगीर के 590 पान उत्पादों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा था। मौसम की मार सबसे ज्यादा इस्लामपुर प्रखंड के किसानों पर पड़ी थी। यहां की चार पंचायतों में करीब 84.97 एकड़ खेतों में लगी पान फसल को नुकसान हुआ था। जबकि, राजगीर की पचौरा पंचायत में 8.25 एकड़ में लगी फसल बारिश से गल गयी थी। प्रभावित किसानों को भी क्षतिपूर्ति की राशि दी जाएगी।

खेत में ही अंकुरित हुआ धान:

मौसम की मार ऐसी पड़ी कि धनकटनी के बाद भी उपज घर तक नहीं पहुंच पायी। सरथा के किसान शिवमोहन सिंह, प्रभात सिंह, अक्षय कुमार, खरुआरा के विजय सिंह, शैलेन्द्र सिंह, कल्याण बिगहा के रामप्रवेश सिंह, सेवदह के चंद्रउदय कुमार मुन्ना, सिरसी के अनिल सिंह, अखिलेश्वर कुमार, हसनपुर के उपेन्द्र प्रसाद सिंह, बराह के सुधीर सिंह, नरसंडा के लालबाबू सिंह व अन्य कहते हैं कि अक्टूबर में लगातार कई दिनों तक जोरदार बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया। कटनी कर सूखने के लिए रखी गयी फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गयी। एक छंटाक उपज खलिहान तक नहीं पहुंच पायी।

कम से कम दो हजार जरूर मिलेगा:

प्रावधान के अनुसार सिंचित भूमि में लगी धान फसल को नुकसान के लिए साढ़े 13 हजार तो असिंचित के लिए 68 सौ रुपया प्रति हेक्टेयर किसानों को मिलेगा। जबकि, उद्यानिकी फसलों की क्षति के एवज में प्रति हेक्टेयर 18 हजार रुपया दिया जाएगा। खास यह कि बाढ़ और मौसम की मार से जिन किसानों को कुछ न कुछ नुकसान उठाना पड़ा है, उन्हें मुआवजा जरूर मिलेगा। खरीफ के लिए कम से कम एक हजार तो उद्यानिकी फसलों के लिए दो हजार सरकार देगी।

कहते हैं अधिकारी

फसल क्षतिपूर्ति अनुदान के लिए आवेदन लिये जा रहे हैं। गैर रैयत किसान शपथ पत्र के साथ तो रैयत जमीन का अद्यतन रसीद व अन्य जरूरी कागजात के साथ आवेदन कर सकते हैं। 20 नवंबर आवेदन की आखिरी तिथि है।

संजय कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी

इन प्रखंडों में बाढ़ व मौसम से फसलों को नुकसान:

1. बिहारशरीफ 2. रहुई 3. अस्थावां 4. बिंद 5. सरमेरा 6. हरनौत 7. गिरियक 8. कतरीसराय 9. हिलसा 10. करायपरसुराय

अनुदान की दर आंकड़ों में :

सिंचित के लिए 13,500 प्रति हेक्टेयर

असिंचित के लिए 6800 प्रति हेक्टेयर

उद्यानिकी फसल 18000 प्रति हेक्टेयर

कब-कब आयी बाढ़

21 जून : रहुई के पहियारा खंधे का तटबंध टूटा, खेतों में भरा पानी।

27 जुलाई : करायपरसराय और हिलसा इलाके में बाढ़ से तबाही।

01 अगस्त: रहुई के पहियारा खंधे का तटबंध दोबारा टूटा।

01 अक्टूबर: रहुई, बिंद, अस्थावां, कतरीसराय, गिरियक, बिहारशरीफ, सरमेरा व हरनौत के खेत डूबे।

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