
मुखिया पर लगे सीसीए पर हाईकोर्ट की रोक
बिहारशरीफ के चोरसुआ पंचायत के मुखिया चंदन कुमार पर जिलाधिकारी द्वारा लगाई गई सीसीए रोक दी गई है। पटना उच्च न्यायालय ने कहा कि डीएम का आदेश अनुमान और आशंकाओं पर आधारित है। याचिकाकर्ता ने राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाया है। कोर्ट ने गलती करने वाले अधिकारियों पर हर्जाना लगाने की चेतावनी दी है।
चोरसुआ पंचायत के मुखिया चंदन कुमार पर लगा था सीसीए कोर्ट ने कहा-डीएम का आदेश महज अनुमान और आशंकाओं पर आधारित याचिकाकर्ता ने राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाने का आरोप लगाया कोर्ट ने गलती करने वाले अधिकारी पर हर्जाना लगाने की चेतावनी दी बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान टीम। पटना उच्च न्यायालय ने गिरियक प्रखंड की चोरसुआ पंचायत के मुखिया चंदन कुमार के खिलाफ जिलाधिकारी द्वारा पारित सीसीए आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। न्यायालय ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जिलाधिकारी का आदेश महज अनुमान और संभावनाओं पर आधारित प्रतीत होता है। कोर्ट ने गलती करने वाले अधिकारी पर हर्जाना लगाने की भी चेतावनी दी।
याचिकाकर्ता ने राजनीतिक द्वेष के तहत फंसाने का आरोप लगाकर शिकायत दर्ज करायी थी। क्या है पूरा मामला: डीएम ने 10 अक्टूबर 2025 को मुखिया के खिलाफ आदेश जारी किया था। इस आदेश में उन्हें सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, बुधवार, शुक्रवार) सिलाव पुलिस स्टेशन पर हाजिरी लगाने और बिना थाना प्रभारी की अनुमति के इलाका छोड़ने पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश के खिलाफ मुखिया ने पटना उच्च न्यायालय में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की। 11 नवंबर 2025 को न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सौरेन्द्र पाण्डेय की खंडपीठ ने इस पर सुनवाई की। सभी मामलों में मिल चुकी है जमानता मुखिया के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता 2016 से मुखिया हैं और उसके खिलाफ दर्ज पांचों मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है। उन्हें चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के इशारे पर यह कार्रवाई की गई है। इससे पहले 11 अक्टूबर को मुखिया ने डीएम को आवेदन देकर खुद को निर्दोष बताया था। आवेदन में उन्होंने कहा था कि उनके ऊपर जो भी मुकदमे दर्ज हुए हैं, वे राजनीतिक द्वेष या भ्रष्टाचार को रोकने के क्रम में हुए हैं। कोर्ट ने दी घूमने की अनुमति : हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति जताते हुए डीएम के आदेश पर रोक लगा दी और मुखिया को स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने राज्य सरकार को 26 नवंबर 2025 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि याचिकाकर्ता अपने आरोपों को साबित करने में सफल रहता है तो कोर्ट गलती करने वाले अधिकारी पर हर्जाना लगाने पर विचार कर सकता है। मुखिया को मिल चुका है राष्ट्रीय पुरस्कार: यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मुखिया चंदन कुमार को उनके काम के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। चोरसुआ पंचायत को 2023 में पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जल पर्याप्त पंचायत, आत्मनिर्भर बुनियादी ढांचा युक्त पंचायत और सुशासित पंचायत श्रेणियों में बिहार में तीसरा स्थान प्राप्त करने के लिए सम्मानित किया गया था। इतना ही नहीं, तत्कालीन जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने भी 8 नवंबर 2023 को जनसंवाद कार्यक्रम में मुखिया चंदन कुमार को उनके महत्वपूर्ण सुझावों और सामाजिक कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। इससे पहले भी जदयू नेता के खिलाफ लगाये गये सीसीएम को अदालत ने निरस्त कर दिया था। इस मामले में डीएम पर जुर्माना भी लगाया गया था।

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