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चकबंदी: भू सर्वेक्षण के बाद होगी शुरू

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 09:50 PM
चकबंदी: भू सर्वेक्षण के बाद होगी शुरू

चकबंदी: भू सर्वेक्षण के बाद होगी शुरू

विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से की जाएगी चकबंदी

पहले चरण में नौ अंचल के 415 मौजों में शुरू हुई थी भूसर्वेक्षण

अगस्त माह से सभी अंचलों में शुरू हो चुकी है भूसर्वेक्षण

फोटो:

हरनौत सर्वे: हरनौत अंचल के छिड्डी जगतपुर गांव में कागजात की जांच करते कानूनगो सोनू कुमार व भूसर्वेक्षण टीम की अधिकारी।

बिहारशरीफ। निज संवाददाता

नालंदा में जनवरी से चकबंदी का काम शुरू होगा। पांच प्रखंड के सात मौजों में भू सर्वेक्षण का काम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद इन अंचलों में चकबंदी का काम शुरू हो जाएगा। एक विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से भू-चकबंदी की जाएगी। इसमें मैनुअल तरीके से मात्र 20 फीसदी ही काम किया जाएगा। ऐसे में चकबंदी के दौरान त्रुटी होने या पक्षपात होने की न के बराबर गुंजाइश रहेगी।

जिला में पहले चरण में नौ अंचल के 415 मौजों में भूसर्वेक्षण शुरू हुई थी। इसमें से सात मौजों में दिसंबर तक तो अन्य चयनित 25 मौजों में अगले तीन से चार माह में भूसर्वेक्षण का काम पूरा करने का लक्ष्य है। इन 32 मौजों में याद्दाश्त बनाने के साथ ही लैंड पार्शल मैप (एलपीएम) बनाने की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है। पायलट प्रोजेक्ट वाले चयनित मौजों में दर्जनों एलपीएम बांटी भी गयी है।

सिलाव01 कैंप का मौजा लड्डू (426/2), खोनुपुर (427), हरनौत03 कैंप का मुंडीचक (231), फैजाबाद (247), चंडी02 कैंप का पंचाने (252), चंडी03 कैंप का निजामपुरा (261) व बेन कैंप का बीरबल बीघा (384) मौजा में पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। इन्हीं मौजों में सबसे पहले चकबंदी की जाएगी।

अगस्त माह से सभी नालंदा के बचे बिहारशरीफ, नगरनौसा, हिलसा, एकंगरसराय, राजगीर, इस्लामपुर, कतरीसराय, रहुई, करायपरसुराय, नूरसराय व गिरियक 11 अंचलों में भूसर्वेक्षण शुरू हो चुकी है। हालांकि, पंचायत चुनाव के चलते ग्राम सभाएं नहीं की जा रही है। इन अंचलों के कैडेस्ट्रल सर्वे के अनुसार खाता खेसरा के पूरे डाटा को ऑनलाइन किया जा रहा है।

सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी मुख्यालय रवींद्र कुमार भारती ने रैयतों को संबंधित कैंप में जाकर जमीनों के कागजात जमा करने को कहा है। ताकि, नए सिरे से जमीन की प्लॉटिंग की जा सके। हरनौत कैंप वन के कानूनगो सोनु कुमार ने बताया कि नगरनौसा अंचल में भी खेतों का पूरा ब्योरा कैडेस्ट्रलय सर्वे के अनुसार ऑनलाइन किया जा रहा है। पंचायत चुनाव के बाद इसमें तेजी आएगी। हरनौत कैंप वन के भुपतपुर, जीवनपुर, चकहनिफा, करीमचक बलवा व चकअकमल में भी एलपीएम का काम जल्द ही शुरू होगा।

आबादी के 200 मीटर परिधि में आने वाले खेतों की नहीं होगी चकबंदी:

हर गांव के 200 मीटर परिधि में आने वाले छोटे बड़े यानि किसी भी तरह के भूखंडों की चकबंदी नहीं होगी। इस एरिया में आने वाले खेतों को आबादी के फैलाव के लिए जस का तस छोड़ दिया जाता है। आबादी की सुविधा व गांव के फैलाव को देखते हुए इस एरिया में बसावट बढ़ने की हमेशा गुंजाइश रहती है। यानि खेती योग्य भूमि की ही चकबंदी की जाएगी। इसमें भी टाल, गौढ़ा, खंधा, दूर नजदीक हर पहलु का पूरा ध्यान रखा जाता है।

चकबंदी है क्या:

चकबंदी शब्द ‘चक और ‘बंदी शब्द से मिलकर बना है|। ‘चक का मतलब भूखंड यानि खेतों तथा ‘बंदी का मतलब बंदोबस्त करना अर्थात उन छोटे-छोटे भूखंडो को मिलकर एक बड़ा भूखंड या खेत तैयार करना है। चकबंदी एक प्रक्रिया है। इसके तहत किसानों के इधर-उधर बिखरे हुए छोटे छोटे खेतों को जोड़कर एक जगह पर बड़ा आकार दिया जाता है। इससे किसानों को खेती करनें में आसानी होती है। पटवन से लेकर फसल के काटने व लाने ले जाने में लागत भी कम लगता है। यानि इससे कम लागत में अधिक पैदावार की संभावना बढ़ जाती है।

चकबंदी के दौरान भूमि के किस्म, कीमत व अन्य पहलुओं का भी पूरा ख्याल रखा जाता है।

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