सरसों में लाही तो आलू-सब्जी पर पाला का अटैक, कोल्ड डायरिया की चपेट में बेजुबान
बिहार में ठंड और शीतलहर का कहर फसलों और मवेशियों पर टूट रहा है। सरसों में लाही कीट का प्रकोप बढ़ गया है, जबकि आलू और अन्य सब्जियों पर पाले का असर हो रहा है। पिछले एक सप्ताह में 200 से अधिक मवेशी कोल्ड डायरिया की चपेट में आए हैं। फसलों में 15 से 20 प्रतिशत उपज घटने का अनुमान है।
सरसों में लाही तो आलू-सब्जी पर पाला का अटैक, कोल्ड डायरिया की चपेट में बेजुबान घने कोहरे व लुढ़कते पारे ने बढ़ाई अन्नदाताओं की धड़कन, 15 से 20 फीसद उपज घटने के आसार तेलहन को चूस रहा लाही कीट तो दलहन, आलू, मटर, टमाटर और बैगन को झुलसा रहा पाला बढ़ती कनकनी के कारण एक सप्ताह में 200 से अधिक मवेशी आये डायरिया की चपेट में पशु अस्पताल में बढ़ी बीमार पशुओं की कतार, अब तक ठंड से किसी की मौत की सूचना नहीं फोटो सरसों: नूरसराय के पास खेत में लगी सरसों की फसल। पशु : बिहारशरीफ के बड़ी पहाड़ी के पास गौशाला में मवेशी।
बिहारशरीफ, कार्यालय प्रतिनिधि। ठंड और शीतलहर का कहर इंसानों के साथ-साथ फसलों और मवेशियों पर भी टूट रहा है। घने कोहरे और लगातार गिरते तापमान ने किसानों की नींद उड़ा दी है। खेतों में लहलहा रही सरसों की फसल पर लाही कीट का प्रकोप बढ़ गया है। आलू, दलहन और सब्जियों को पाला (झुलसा रोग) अपनी गिरफ्त में ले रहा है। पशुपालकों के खूंटे पर बंधे मवेशी भी सुरक्षित नहीं हैं। शीतलहर के कारण वे कोल्ड डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। सरदार बिगहा के किसान धनंजय कुमार, नूरसराय के संजीव कुमार, चंडी के वीरेन्द्र कुमार व अन्य बताते हैं कि मौसम की बेरुखी ने मेहनत पर पानी फेर दिया है। मसूर, चना, मटर, टमाटर, कद्दू और बैगन में पाला मारने की शिकायतें बढ़ गई हैं। आशंका है कि अगर मौसम ऐसा ही रहा तो पैदावार में 15 से 20 फीसदी की कमी आ सकती है। सरसों के फूलों पर लाही कीट चिपक गए हैं, जो रस चूसकर फसल को बर्बाद कर रहे हैं। इससे पौधे अस्वस्थ हो रहे हैं और दाने का विकास रूक गया है। पाला के कारण हरे-भरे चना, मसूर, मटर, आलू, टमाटर, कद्दू व बैगन के पौधे झुलस रहे हैं। जिले में आलू और हरी सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर होती है। अकेले आलू का रकवा करीब 24 हजार हेक्टेयर है। खासकर जिला मुख्यालय के सोहडीह, सहोखर, आशानगर, दीपनगर, बबुरबन्ना, ककड़िया, बियावानी आदि इलाका आलू व सब्जी उत्पादन का हब है। पशुओं का पाचन तंत्र बिगड़ा: जिला पशुपालन पदाधिकारी डा रमेश कुमार कहते हैं कि बढ़ती ठंड का असर पशुओं की सेहत पर पड़ा है। पिछले एक सप्ताह में ही जिले में 200 से अधिक मवेशी कोल्ड डायरिया के शिकार हुए हैं। जिले के पशु अस्पतालों में बीमार मवेशियों का उपचार किया गया है। राहत यह कि ठंड से अब तक किसी मवेशी की मौत की खबर नहीं है। इस सीजन में खुरहा-मुंहपका रोग का प्रसार होने की संभावना रहती है। हालांकि, जिले में अबतक इस तरह के मामले सामने नहीं आये हैं। पाला के लक्षण : पाला (झुलसा) रोग में पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं। पत्तियों की निचली सतह पर रुई की तरह फफूंद दिखाई देती है। यह समस्या 80 फीसद आद्र्रता एवं तापमान 10 से 15 डिग्री के बीच होने पर होती है। समय पर उपचार न करने से बीमारी का प्रकोप तेजी से फैलता है। फसल झुलसकर नष्ट हो जाती है। लाही कीट से नुकसान: पौधा संरक्षण के सहायक निदेशक संतोष कुमार कहते हैं कि लाही कीट सरसों फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाता है। पौधों का रस चूसकर उनकी बढ़वार रोक देता है। पत्तियां पीली पड़कर मुड़ने लगती हैं, फूल झड़ने लगते हैं, फलियां ठीक से नहीं बनतीं और दाने छोटे रह जाते हैं। इससे उपज में गिरावट आती है। फसलों को ऐसे बचाएं: 1. पाला (झुलसा) से बचाव: खेतों में शाम के समय हल्की सिंचाई करें। मेढ़ों पर धुआं करने से तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी होती है, जो पाला से बचाता है। मैंकोजेब और कार्वेडाजीम का मिक्चर दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर आठ दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करना चाहिए। 2. लाही से बचाव: सरसों में लाही कीट दिखने पर इमिडाक्लोप्रिड एक एमएल तीन लीटर पानी या नीम तेल का पांच एमल प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। पीला चिपचिपा ट्रैप लगाने से भी कीटों का प्रबंधन होता है। पशुओं की देखभाल ऐसे करें : 1. पशुशाला को चारों तरफ से बोरे या तिरपाल से ढक दें। ताकि, सीधी हवा न लगे। 2. फर्श पर पुआल बिछाएं, ताकि गौशाला में नमी से बचाव हो। 3. मवेशियों को बासी या ठंडा खाना न दें। पीने के लिए गुनगुना पानी ही दें। 4. गौशाला में धुंआ न करें, मवेशियों को सांस लेने में दिक्कत होती है। 5. गुड़ और सरसों तेल मिलाकर देने से शरीर में गर्मी बनी रहती है। 6. जूट के बोरे को पशुओं की पीठ पर बांधें, छाती व पेट ठंड से बचे रहते हैं।

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