
भारत की हर भाषा, संपूर्ण संस्कृति, इतिहास और मानवीय संवेदना की झलक
महाबोधी महाविद्यालय में भारतीय भाषा उत्सव 2025 मनाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रो. विजय कुमार कर्ण ने भाषाई समृद्धि और सांस्कृतिक विविधता पर जोर दिया। छात्रों को भारतीय भाषाओं के अध्ययन और संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया। इस उत्सव में भाषाओं की विविधता और एकता का महत्व बताया गया।
भारत की हर भाषा, संपूर्ण संस्कृति, इतिहास और मानवीय संवेदना की झलक भाषाएं अनेक भाव एक विषय पर हुई चर्चा विविधता में एकता ही हमारी संस्कृति और भाषा की खुबी महाबोधी महाविद्यालय में मनाया जा रहा भारतीय भाषा उत्सव 2025 फोटो : महाबोधी भाषा : नालंदा स्थित महाबोधी महाविद्यालय में गुरुवार को भारतीय भाषा उत्सव 2025 में शामिल नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के प्रो़ विजय कुमार कर्ण व अन्य। बिहारशरीफ, निज संवाददाता। भारत की हर भाषा, संपूर्ण संस्कृति, इतिहास और मानवीय संवेदना को समेटे हुए है। भाषाओं में इसकी स्पष्ट झलक मिलती है। विविधता में एकता ही हमारी संस्कृति और भाषा की खुबी रही है।

नालंदा स्थित महाबोधी महाविद्यालय में गुरुवार को भारतीय भाषा उत्सव 2025 में नालंदा महाविहार विश्वविद्यालय के प्रो़ विजय कुमार कर्ण ने कहा कि हमारा देश विश्व में अपनी सांस्कृतिक बहुलता के साथ ही भाषाई समृद्धि के लिए भी जाना जाता है। हमारी भाषाएं अलग हो सकती हैं, परंतु उनमें निहित भाव एक ही है मानवता, करुणा और एकता का भाव। उन्होंने छात्रों से भारतीय भाषाओं के अध्ययन, संरक्षण और संवर्धन के लिए आगे आने का आह्वान किया। इसमें भाषाएं एक भाव एक विषय पर लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए। महाबोधि महाविद्यालय बीएड के सचिव डॉ. अरविंद कुमार. ने कहा कि छात्र-छात्राएं न केवल विषयगत ज्ञान प्राप्त करें, बल्कि देश की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को समझते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द के वाहक बनें। प्राचार्य डॉ. दीपक शर्मा ने कहा कि भारतीय भाषाओं की सुंदरता उनकी विविधता में ही निहित है। इसमें डीएलएड विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार सिंह, डॉ. अंजनी कुमार सुमन, डॉ. रवि आनंद, डॉ. अमित कुमार, डॉ. सीमा कुमारी, प्रो. मुकेश कुमार, प्रो. धीरेंद्र कुमार, डॉ. कुमार सुरेन्द्र प्रताप, प्रो. अनिल कुमार कश्यप व अन्य ने अपनी बातों को रखा।

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