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भू-जल स्तर प्रबंधन के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता जरूरी : डॉ. तमारा

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफPublished By: Newswrap
Thu, 25 Feb 2021 07:01 PM
भू-जल स्तर प्रबंधन के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता जरूरी : डॉ. तमारा

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भू-जल स्तर प्रबंधन के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता जरूरी : डॉ. तमारा

भू-जल प्रबंधन के लिए किसानों को करें जागरूक : डॉ. दीपांकर साहा

नालंदा विश्वविद्यालय में जुटे देश-विदेश के पर्यावरणविद् :

ज्ञान के प्रसार से स्थानीय समाज को भी हो फायदा : कुलपति

फोटो :

25राजगीर04-नालंदा विश्वविद्यालय में कार्यशाला में भाग लेते पर्यावरणविद्

राजगीर। निज संवाददाता

नालंदा विश्वविद्यालय में गुरुवार को विश्व में लगातार गिर रहे भू-जल स्तर पर चर्चा में देश-दुनिया के पर्यावरणविद् शामिल हुए। स्कूल ऑफ ईकोलॉजी एंड एन्वायरनमेंट स्टडीज द्वारा आयोजित कार्यशाला के पहले दिन ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरणविद् सह विशेषज्ञ डॉ. तमारा जैक्शन, डॉ. पीटर डिल्लोन और डॉ. बसंत महेश्वरी ने एक्वीफर स्टोरेज एंड रिकवरी प्रणाली पर अपने विचार रखे। कहा कि विश्व में लगातार भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका काफी दुष्परिणाम होगा। इसके बचाव के लिए काम करना होगा। इसके लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता सबसे जरूरी है। इससे काफी फायदा होगा।

नई दिल्ली के इंडियन एसोसिएशन ऑफ हाइड्रोजियोलोजिस्ट के सचिव डॉ. दीपांकर साहा ने कहा कि भू-जल प्रबंधन के लिए किसानों को जागरूक करें। किसान जागेंगे तो यह बढ़ेगा। भू-जल के अत्याधिक दोहन के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। गिरते स्तर के साथ गुणवत्ता को भी बचाना होगा। डॉ. साहा ने किसानों को आगाह करते हुए कहा कि अगर रिचार्ज पिट की मदद से भू-जल का बेहतर प्रबंधन नहीं हुआ तो आने वाले सालों में खेती के साथ पीने के पानी भी नहीं बच पायेगा।

कृषि विश्वविद्यालय पूसा के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद व विशेषज्ञ डॉ. रविश चन्द्र ने कहा कि सौर ऊर्जा की मदद से सिंचाई की जा सकती है। यह एक बेहतर संसाधन हो सकता है। भू-जल संरक्षित करना है तो किसानों को सिंचाई के लिए जगह-जगह आहर, पइन, तालाब और नदी जैसे पारंपरिक संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। पहले दिन चेन्नई के पर्यावरणविद् प्रोफेसर एल इलान्गो, इंटरनेशनल वाटर मैनेजमेंट इस्टीच्यूट जल प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. अदिति मुखर्जी, आत्मा के प्रोजेक्ट डायरेक्टर संदीप राज और मेघ पइन अभियान के एकलव्य प्रसाद ने भी अपनी बात रखी।

ज्ञान के प्रसार से लोकल समाज को भी हो फायदा : कुलपति

नालंदा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय समाज के विकास के लिए संकल्पित है। आस-पास के गांवों को विकसीत करना है। परिसर के अंदर चल रहे शोध का लाभ यहां के किसानों को मिले। इसी सोच के साथ विश्वविद्यालय ने वाटर बैंक का निर्माण किया है। लोगों की बेहतर जीवन शैली हो। उन्होंने कहा कि एक्विफर स्टोरेज एंड रिकवरी प्रणाली से बनाये गये वाटर बैंक से भू-जल स्तर में बढ़ोत्तरी के साथ किसानों को खेतों की पटवन की सुविधा मिलेगा।

कहा कि एक्वीफर स्टोरेज एंड रिकवरी (एएसआर) प्रणाली से मेयार व नेकपुर गांव के खंधे में ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर इंटरनेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च की मदद से वाटर बैंक तैयार किया गया है। परियोजना का फायदा यहां के आस-पास के किसानों को होगा। पानी की किल्लत से निजात मिलेगा। आस-पास के भूजल स्तर का भी सुधार होगा। किसानों को सिंचाई के लिए शुद्ध पानी मिलेगा और रासायनिक खाद व कीटनाशक का भी कम इस्तेमाल करना होगा।

विवि के शिक्षा का मुख्य उद्देश्य समाज को प्रगति करना है। यहां पर हो रहे शोधों का सीधा लाभ किसानों को मिलना चाहिए। दक्षिण बिहार में सिंचाई के लिए पानी की किल्लत को दूर करना है। क्वीफर रिचार्ज पिट्स की व्यवहारिकता को विवि ने साबित कर दिखाया है। कार्यशाला की अध्यक्षता प्रोफेसर सुखबीर सिंह ने की। उन्होंने कहा कि दूसरे दिन जल प्रबंधन के विशेषज्ञ मेयार और नेकपुर जाकर वहां बनाये गये वाटर बैंक प्रणाली को देखेंगे। किसानों से चर्चा करेंगे। नालंदा विश्वविद्यालय रिचार्ज पिट बनाने की योजना पर काम कर रही है। इससे सूखे व सर्दी के मौसम में किसानों को खेतों की पटवन के लिए पानी मिलेगा।

चार लेयर में होगा पानी का फिल्टरेशन :

इसमें पानी के फिल्टेरेशन के लिए चार लेयर बनाया गया है। पहले में बालू, दूसरे में एक्टीवेटेड चारकोल(कोयला) जो रसायन व घुलनशील पदार्थ को फील्टर करेगा, तीसरा लेयर फिल्टर और चौथा में कंक्रीट, इंट का टुकड़ा दिया गया है जो वैक्टीरिया को मारेगा और शुद्ध जमा होगा। वहीं अंडर ग्राउंड मीटर में बरसात में कितना पानी जमा हुआ इसके लिए एक फ्लो मीटर भी लगाया गया है जिससे आसानी से डेटा मिल सकेगा।

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