अपरा (अचला) एकादशी पर श्रद्धालुओं ने रखा व्रत
अपरा (अचला) एकादशी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने व्रत रखा और भगवान विष्णु की आराधना की। मंदिरों में पूजा, भजन-कीर्तन और विशेष आरती का आयोजन हुआ। पंडित सूर्यमणि पांडेय ने बताया कि इस दिन व्रत करने से पाप नष्ट होते हैं और विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। भक्तों ने समाज में सुख और समृद्धि की प्रार्थना की।

अपरा (अचला) एकादशी पर श्रद्धालुओं ने रखा व्रत मंदिरों व घरों में लोगों ने किया भजन-कीर्तन पावापुरी, निज संवाददाता। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की पावन अपरा (अचला) एकादशी के अवसर पर बुधवार को मंदिरों एवं घरों में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और भक्ति भाव से व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना की। सुबह से ही मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा। श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली तथा पापों से मुक्ति की कामना करते हुए विधि-विधान से व्रत किया।
धार्मिक मान्यताएँ
पंडित सूर्यमणि पांडेय ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भगवान त्रिविक्रम स्वरूप में भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखकर भगवान विष्णु का पूजन किया तथा एकादशी व्रत कथा का श्रवण किया। कथा में बताया गया कि इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे विष्णुलोक की प्राप्ति होती है। शाम होते ही मंदिरों में दीप जलाकर विशेष आरती आयोजित की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने रातभर जागरण कर भजन-कीर्तन किया। भक्तिमय माहौल में हरे राम-हरे कृष्ण एवं विष्णु भजनों से पूरा वातावरण गूंजता रहा। महिलाओं एवं युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। धार्मिक विद्वानों ने बताया कि अपरा एकादशी को अचला एकादशी भी कहा जाता है। पुराणों में इसकी महिमा का विशेष वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने एवं कथा सुनने मात्र से मनुष्य को अनेक तीर्थों के स्नान एवं दान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। व्रत एवं जागरण में शामिल श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु से समाज में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने की प्रार्थना की। (पावापुरी से अनिल उपाध्याय)
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