
चिंता : फिर बिगड़ने लगी हवा की सेहत, रहें सावधान
बिहारशरीफ में हवा की सेहत फिर बिगड़ने लगी है, जहां एक्यूआई 200 के करीब पहुंच गया है। यह पटना और मुजफ्फरपुर से अधिक प्रदूषित है। छोटे धूलकण, पराली जलाने और निर्माण कार्य से प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रशासन के प्रयासों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।
चिंता : फिर बिगड़ने लगी हवा की सेहत, रहें सावधान पटना और मुजफ्फरपुर से अधिक प्रदूषित है बिहारशरीफ बिहारशरीफ का एक्यूआई पहुंचा 200 के करीब फोटो : प्रदूषण-खेत में जल रही पराली। बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। ठंड के दस्तक देते ही शहर में हवा की सेहत फिर से बिगड़ने लगी है। बिहारशरीफ फिलहाल पटना और मुजफ्फरपुर जैसे शहरों से अधिक प्रदूषित है। यहां औसत एक्यूआई अभी 200 के करीब है। वहीं, पटना का एक्यूआई अभी 180 के करीब है। मुजफ्फरपुर की हवा भी यहां से अधिक साफ है। रविवार की सुबह छह से 10 बजे तक बिहारशरीफ का एक्यूआई 300 से अधिक था।
रविवार को बिहारशरीफ राज्य का सबसे अधिक प्रदूषित शहर बन गया था। ठंड बढ़ने के साथ ही प्रदूषण और अधिक बढ़ने की आशंका है। इस वजह से लोगों को सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, शहर में प्रदूषण के सबसे बड़े कारण हैं छोटे धूलकण। इन्हें पीएम 10 और पीएम 2.5 कहा जाता है। ठंड के मौसम में कुहासा लगता है। कुहासा में मिलकर ऐसे महीन धूलकरण वातावरण में लंबे समय तक मौजूद रहते हैं। इससे प्रदूषण बढ़ता है और लंबे समय तक बना रहता है। धूल-गर्दा बना जान का दुश्मन : शहर व आसपास के इलाकों में चल रहे निर्माण कार्य के कारण बड़ी संख्या में धूल उड़ती है। नगर निगम के सफाईकर्मी भी सफाई के बहाने काफी धूल उड़ा रहे हैं। नाला रोड का काम अभी चल रहा है। जहां काम पूरा हो गया है, वहां से भी धूल को हटाने का प्रयास नहीं किया गया है। गाड़ियों के चलते ही सड़कों पर जमा धूल वातावरण में फैल जाती है। अभी हवा भी नहीं चल रही है। बारिश की भी संभावना नहीं है। ऐसे में यह धूल वातावरण से होकर लोगों के शरीर में प्रवेश कर रहा है और कई बीमारियों का कारण बन रहा है। धड़ल्ले से जल रही है पराली : धान की फसल पककर तैयार है। खेतों से इसे काटने का काम चल रहा है। फसल कटने के बाद धड़ल्ले से पराली जा रही है। शहर के चारों तरफ या कहें तो पूरे जिले में सैकड़ों स्थानों पर पराली जलायी जा रही है। इससे निकला धुआं वातावरण को विषैला बना रहा है। प्रशासन ने कई उपाय कर लिये हैं, पर सफलता नहीं मिली। ऐसे में किसानों को जागरूक करने की जरूरत है। इसके अलावा हर सुबह, हर दुकान और घर के आगे कचरा जलाने का रिवाज अभी भी चल रहा है। बाजार में कोयले के चूल्हों का प्रयोग भी काफी मात्रा में हो रहा है। इसके धुआं उगलने वाली हजारों गाड़ियां भी प्रदूषण बढ़ा रही है। 5 दिनों का एक्यूआई लेवल : 14 नवंबर को मतगणना के कारण गाड़ियों की आवाजाही कम थी। इस वजह से औसत एक्यूआई 130 के करीब रही। 15 को बाजार खुलते ही एक्यूआई लेवल 300 के करीब पहुंच गया। 16 को भी दिन के कई समय में एक्यूआई 300 के करीब रहा। 17 को 165 तो 18 नवंबर यानि मंगलवार को 161 रहा। यह आंकड़ा दिन के 10 से 12 बजे के बीच का है। दिन के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण की मात्रा घटती-बढ़ती रहती है। यह आंकड़ा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से लिया गया है।

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