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जागरूकता और सतर्कता से ही बचा जा सकता है एड्स से

हिन्दुस्तान टीम,बिहारशरीफNewswrap
Wed, 01 Dec 2021 09:51 PM
जागरूकता और सतर्कता से ही बचा जा सकता है एड्स से

विश्व एड्स दिवस:

जागरूकता और सतर्कता से ही बचा जा सकता है एड्स से

समझदारी व संयम ही सुरक्षा की गारंटी

नालंदा, शेखपुरा व नवादा जिलों में एड्स के 928 रोगी

608 को मिल रही 1500 रुपये प्रति माह प्रोत्साहन राशि

एड्स पीड़ितों से न करें भेदभाव लेकिन बरतें सावधानी

रैली निकाल स्वास्थ्यकर्मियों ने लोगों को किया जागरूक

फोटो:

एड्स 01: सदर अस्पताल परिसर में जागरूकता रैली को संबोधित करते सीएस डॉ. सुनील कुमार।

जवाहर स्कूल: बिहारशरीफ के झींगनगर स्थित जवाहर कन्या उच्चत्तर विद्यालय में विश्व एड्स दिवस पर लोगों को जागरूक करती नालंदा कॉलेज के बीएड की छात्र-छात्राएं।

बिहारशरीफ। निज संवाददाता

एड्स यानि एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम काफी खतरनाक बीमारी है। समझदारी व संयम ही इससे सुरक्षा की गारंटी है। लोगों में जागरूकता व सतर्कता लाकर ही एड्स से सुरक्षित रहा जा सकता है। बावजूद एड्स पीड़ितों से किसी तरह का भेदभाव न करें। लेकिन, हर तरह की आवश्यक सावधानी अवश्य बरतें। फिलहाल नालंदा, शेखपुर व नवादा में एड्स के 928 रोगी हैं। उन्हें सदर अस्पताल के एआरटी (एंटि रेट्रोवायरल थेरैपी) सेंटर से दवाएं दी जा रही हैं। उनकी नियमित मॉनिटरिंग भी हो रही है। कई जगहों पर कार्यक्रम कर लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया। ‘एंड इनइक्वेलिटी, एंड एड्स थीम पर आयोजि कार्यक्रम में एड्स के रोगियों के प्रति किसी तरह का भेद भाव नहीं करने की अपील की गयी।

सीएस डॉ. सुनील कुमार ने कहा वो हर बातें या व्यवहार जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। उस पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। ताकि, जीवन को सुरक्षित व स्वस्थ बनाया जा सके। एड्स बीमारी भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर से हमें प्रभावित करती है। इससे एक व्यक्ति का जीवन ही नहीं बल्कि उससे संबंधित अन्य लोगों का भी जीवन प्रभावित होता है। समझदारी व संयमित आचरण से खुद को एड्स से बचा सकते हैं। हाल के दिनों में एड्स पर काफी हद तक काबू पाया जा चुका है। लेकिन, अभी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। इसकी चर्चा निरंतर होती रहनी चाहिए। ताकि, जागरूकता फैलती रहे।

सदर अस्पताल परिसर से उन्होंने जागरूकता रैली को रवाना किया। इस मौके पर उन्होंने लोगों को इसकी जानकारी दी। कार्यशाला में भी स्वास्थ्यकर्मियों को उन्होंने संबोधित किया। मौके पर डॉ. राकेश कुमार, रीता कुमारी, विनय कुमार व अन्य स्वास्थ्यकर्मी और एएनएम मौजूद थीं।

हम साथी एप से लें जानकारी:

इस संबंध में कोई भी जानकारी ‘हम साथी एप से ली जा सकती है। साथ ही इसके लिए बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति ने 1097 हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। सभी गर्भवती महिलाओं को एड्स की जांच करानी चाहिए। प्रखंड से लेकर जिला अस्पतालों तक इसकी निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। राज्य सरकार ने 2030 तक राज्य को एड्समुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसमें लोगों को सहयोग करना चाहिए। ताकि हमारा समाज स्वस्थ रहे। 'हम साथी' एप पर सावधानी व इलाज से संबंधित सारी जानकारी उपलब्ध है।

नालंदा कॉलेज की बीएड की छात्राओं ने किया जागरूक:

एड्स के संक्रमण व इसके फैलाव को को जागरूकता के माध्यम से ही रोका जा सकता है। बिहारशरीफ के झींगनगर स्थित जवाहर कन्या उच्चत्तर विद्यालय में नालंदा कॉलेज के बीएड विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि देश में 1992 से और विश्व में 1988 से एड्स को फैलने से रोकने के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी व गैर सरकारी एजेंसियां काम कर रही है। एड्स की पहचान कर उनके इलाज की व्यवस्था सरकार की तरफ से बिल्कुल मुफ्त है। पॉजिटिव लोगों को इसे छुपाना नहीं चाहिए। बल्कि, खुद संयमित रहकर अपने परिवार व समाज को इससे बचाएं। प्रधानाध्यापक कपिलदेव यादव व वरिष्ठ अध्यापक अभिजीत राज ने कहा कि एड्स संक्रमित व्यक्ति भी एक सामान्य जीवन जी सकता है। एचआईवी संक्रमित होना जीवन का अंत नहीं है। सही चिकित्सीय मदद एवं सहयोग से लंबे समय तक रोगी स्वस्थ जीवन जी सकता है। कार्यक्रम में संजू कुमारी, मनोज कुमार, राजकुमार, नितेश कुमार, अंजनी बंसल, रोहित, प्रेरणा, नवीन, अजहर, पूनम, रवि, रविशंकर व अन्य शामिल थे।

एड्स से बचने के बरतें ये सावधानियां:

असुरक्षित यौन संबंध से बचें।

संक्रमित सीरिंज या सुई का प्रयोग न करें।

संक्रमित रक्त को कभी भी प्रयोग न करें। जांच परख के बाद ही रोगी को रक्त चढ़ाएं।

संक्रमित माता से उसकी संतान को भी एचआइवी संक्रमित होने की आशंका रहती है।

ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करती है। इस कारण टीबी, कैंसर व अन्य घातक बीमारियों से परेशानी बढ़ जाती है।

एड्स से बचाव के लिए पत्नी के अलावा किसी से यौन संबंध न बनायें।

दूसरों के प्रयोग में लाये गए ब्लेड, रेजर व अन्य सामानोंं का इस्तेमाल न करें।

गले या बगल में सूजन या गिल्टी

एचआईवी के लक्षण: लगातार बुखार व खांसी रहना, वजन का तेजी से घटना, मुंह में घाव निकल आना, त्वचा पर खुजली वाले चकते उभरना, सिरदर्द व थकान रहना, भूख नहीं लगना व अन्य।

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