एआई कैमरों की निगरानी भी बेअसर, आशा प्रसूता को निजी क्लीनिक ले जाती पकड़ाई

हिन्दुस्तान, बिहारशरीफ
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सदर अस्पताल में एआई कैमरों की निगरानी भी बेअसर साबित हुई, जब एक गर्भवती महिला को निजी क्लीनिक ले जाने का प्रयास किया गया। समाजसेवी और गार्ड की मदद से प्रसूता को सुरक्षित सदर अस्पताल लाया गया, जहाँ उसने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। स्वास्थ्य कर्मियों पर 6 हजार रुपये वसूली का आरोप भी लगा।

एआई कैमरों की निगरानी भी बेअसर, आशा प्रसूता को निजी क्लीनिक ले जाती पकड़ाई

एआई कैमरों की निगरानी भी बेअसर, आशा प्रसूता को निजी क्लीनिक ले जाती पकड़ाई समाजसेवी और गार्ड की सतर्कता से बची प्रसूता, सदर अस्पताल में हुआ सुरक्षित प्रसव सदर अस्पताल में दलाली का आरोप, परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों पर लगाए 6 हजार रुपये वसूली का आरोप नॉर्मल डिलीवरी के बाद भी विवाद, आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मियों पर उठे सवाल फोटो : सदर प्रसूता : सदर अस्पताल में रविवार को निजी क्लिनिक ले जाने के विरोध के बाद प्रसव कक्ष ले जाते परिजन। बिहारशरीफ, एक संवाददाता।

सदर अस्पताल में घटनाएं

सदर अस्पताल में मरीजों को निजी क्लीनिकों में भेजने और दलालों की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लगाए गए अत्याधुनिक एआई कैमरों की निगहबानी के बावजूद ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला सिलाव प्रखंड के करियना गांव की एक गर्भवती महिला से जुड़ा है। परिजनों ने बताया कि आशा कार्यकर्ता निजी क्लिनिक ले जाने का प्रयास कर रही थी। हालांकि, समाजसेवी और अस्पताल के एक गार्ड की तत्परता से प्रसूता को दोबारा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसका सामान्य प्रसव हुआ और उसने एक स्वस्थ्य बच्ची को जन्म दिया। करियन्न गांव निवासी मनोज कुमार अपनी पत्नी सिंकू कुमारी को प्रसव के लिए शनिवार को सदर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। पति का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद काफी देर तक प्रसूता की समुचित देखभाल नहीं की गई। कई बार आग्रह करने के बाद एक स्वास्थ्यकर्मी जांच कर कुछ समय इंतजार करने की बात कह चली गई। इसी दौरान एक आशा कार्यकर्ता बहला फुसलाकर रविवार की सुबह अस्पताल की पर्ची लेकर उन्हें कम खर्च में बेहतर इलाज का भरोसा देते हुए टोटो से निजी क्लिनिक ले जाने का प्रयास किया।

वसूली का आरोप

खुशनुमा के नाम पर लिया 6 हजार : मनोज कुमार ने आरोप लगाया कि बच्ची के जन्म के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने के नाम पर छह हजार रुपये लिया। ये पैसे अलग-अलग लोगों ने मांगे और मजबूरी में उन्हें देने पड़े। जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) श्याम कुमार निर्मल ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर आशा कार्यकर्ता एवं स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई की जाएगी।

सामान्य प्रश्न

एआई कैमरों की निगरानी के बावजूद ऐसा क्या हुआ?
सदर अस्पताल में मरीजों को निजी क्लीनिकों में भेजने का प्रयास किया गया, जो एआई कैमरों की निगरानी के बावजूद हुआ।
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