5 साल की मरियम ने रखा जिंदगी का पहला रोजा, जज्बा देख हर कोई हैरान
बिहारशरीफ के छज्जू मोहल्ले की पांच साल की मरियम जावेद ने रमजान के दूसरे जुमे पर अपना पहला रोजा पूरा किया। परिवार के लाख मनाने पर भी उसने रोजा नहीं तोड़ा। उसकी इस हौसले से भरी कोशिश ने सभी को प्रभावित किया और उसे एक प्रेरणा के रूप में देखा गया।

5 साल की मरियम ने रखा जिंदगी का पहला रोजा, जज्बा देख हर कोई हैरान रमजान के दूसरे जुमे पर छज्जू मोहल्ले की मासूम ने पेश की इबादत की मिसाल परिजनों के लाख मनाने पर भी नहीं तोड़ा रोजा, भूख-प्यास के आगे नहीं मानी हार फोटो: मरियम जावेद: मरियम जावेद। बिहारशरीफ, एक संवाददाता। माह-ए-रमजान का पहला अशरा पूरा हो चुका है। अब मगफिरत का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। इस मुकद्दस महीने की बरकतें अपने शबाब पर हैं। जहां बड़े-बुजुर्ग अल्लाह की रजा और नेकियां हासिल करने के लिए इबादत में मशगूल हैं। वहीं, छोटे बच्चे भी रोजा रखकर अपनी अक़ीदत का शानदार उदाहरण पेश कर रहे हैं।
इसी कड़ी में शहर के छज्जू मोहल्ला निवासी महज पांच साल की मासूम मरियम जावेद ने शुक्रवार (दूसरे जुमे) को अपनी जिंदगी का पहला रोजा मुकम्मल कर पूरे परिवार और मोहल्ले वालों को हैरत में डाल दिया। मरियम के पिता जावेद कुरैशी ने बताया कि रमजान शुरू होने से पहले ही वह रोजा रखने की जिद कर रही थी। गुरुवार को उसने साफ कह दिया कि वह जुमे के दिन रोजा जरूर रखेगी। घरवालों को लगा कि बच्ची है, शायद थोड़ी देर में भूल जाएगी या भूख लगने पर कुछ खा लेगी। शुक्रवार को दिनभर परिवार के लोग उसे कुछ खाने-पीने के लिए मनाते और बहलाते रहे, लेकिन मरियम अपनी जिद पर अडिग रही और शाम को ही अपना रोजा खोला। उम्र 5 की, हौसला 50 साल का: पांच साल की बच्ची के इस जज्बे को देखकर परिवार वाले भी भावुक हो उठे। इफ्तार के समय घर में बिल्कुल जश्न जैसा नूरानी माहौल था। पूरे परिवार ने मिलकर उसे दुआओं से नवाजा। परिजनों और मोहल्ले वालों ने मरियम की तारीफ करते हुए कहा कि इबादत के लिए उम्र की नहीं, बल्कि पक्के हौसले की जरूरत होती है। पांच साल की उम्र में मरियम ने 50 साल के व्यक्ति जैसा हौसला दिखाया है। नन्ही रोजेदार का यह कदम उन लोगों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है, जो बिना किसी वाजिब कारण के रोजा छोड़ने के बहाने तलाशते हैं।
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