
33 लाख से बनेगा सलेमपुर मध्य विद्यालय का जर्जर भवन
33 लाख से बनेगा सलेमपुर मध्य विद्यालय का जर्जर भवन33 लाख से बनेगा सलेमपुर मध्य विद्यालय का जर्जर भवन33 लाख से बनेगा सलेमपुर मध्य विद्यालय का जर्जर भवन33 लाख से बनेगा सलेमपुर मध्य विद्यालय का जर्जर भवन
33 लाख से बनेगा सलेमपुर मध्य विद्यालय का जर्जर भवन 12 साल से खंडहर में तब्दील था स्कूल, दूसरे गांव जाते थे बच्चे 2024 के लोकसभा चुनाव में नहीं डाला एक भी वोट निर्माण नहीं होने पर ग्रामीणों ने दी है विधानसभा चुनाव में भी विरोध की चेतावनी फोटो: सलेमपुर विद्यालय: करायपरसुराय के सलेमपुर मध्य विद्यालय का जर्जर भवन। करायपरसुराय, निज संवाददाता। ग्रामीणों की एकता और विरोध के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। लोकसभा चुनाव में वोट बहिष्कार के बाद अब प्रखंड की बेरथू पंचायत स्थित सलेमपुर मध्य विद्यालय के जर्जर भवन का निर्माण 33 लाख रुपये की लागत से कराया जाएगा।

हालांकि, यह टेंडर की तीसरी प्रक्रिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी काम शुरू नहीं हुआ, तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का भी बहिष्कार करेंगे। 12 साल से खंडहर है स्कूल, दूसरे गांव जाते हैं बच्चे: ग्रामीण अवधेश पासवान, अरुण कुमार, मनोज पासवान, सुदामा यादव, रामरती देवी, बुलकन मांझी, अनीता देवी, मंजू देवी और अन्य ने बताया कि यह स्कूल पिछले 12-13 वर्षों से पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है। भवन ध्वस्त होने के कारण यहां पढ़ने वाले करीब 180 बच्चों का नामांकन डेढ़ किलोमीटर दूर बिनसा गांव के स्कूल में करा दिया गया है। छोटे बच्चों, खासकर बच्चियों को इतनी दूर जाने में भारी परेशानी होती है। जो बरसात के दिनों में और बढ़ जाती है। लोकसभा चुनाव में नहीं डाला एक भी वोट: सालों तक अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी जब कुछ नहीं हुआ, तो थक-हारकर ग्रामीणों ने 1 जून 2024 को हुए लोकसभा चुनाव का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया। 887 मतदाताओं वाले इस बूथ पर एक भी वोट नहीं पड़ा। इस विरोध के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी की पहल पर 5 कमरों, कार्यालय, शौचालय और चहारदीवारी के निर्माण का निर्णय तो हुआ। लेकिन, विभागीय उपेक्षा के कारण काम शुरू नहीं हो सका और वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर पैसा वापस लौट गया। फिर से जगी उम्मीद, लेकिन चेतावनी भी: प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी नितेश कुमार रंजन ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत 33 लाख रुपये की राशि पुनः स्वीकृत हो गई है और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। इसका निर्माण कनीय अभियंता की देख रेख में कराया जाना था। काम शुरू नहीं होने तथा वित्तीय वर्ष समाप्त होने के कारण विभाग को पैसा लौटा दिया गया था। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वे अब और इंतजार नहीं करेंगे। यदि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे एक बार फिर अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में भी विरोध जताएंगे।

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