
रोजगार, पलायन से त्रस्त बिहारी बूथों पर उमड़ पड़े? किसे मिलेगा बिहार में बंपर वोटिंग का फायदा
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान पक्ष और विपक्ष दोनों की ओर से रोजगार और पलायन पर खूब वादे किए गए। पहले चरण के मतदान के दौरान बूथों पर मतदाताओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे वोटिंग के सारे रिकॉर्ड टूट गए।
बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार मतदान का नया रिकॉर्ड बना है। मतदाताओं ने पूरा उत्साह दिखाया और मतदान का प्रतिशत करीब 65 प्रतिशत रहा, जो बिहार के लिए ऐतिहासिक है। भारी मतदान का सभी राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से अर्थ लगा रहे हैं। छठ-दीपावली में घर आए प्रवासी वोट करने के लिए रुके। महिलाओं ने जमकर वोट किया। हालांकि, यह बढ़ा हुआ मत किसके पक्ष में गया है, यह तो चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा। मगर निश्चित रूप से इसके आकलन और अनुमान में सभी लग गए हैं।

बिहार चुनाव में इस बार रोजगार और पलायन बड़ा मुद्दा था। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने इस पर जनता को भरोसा दिया। भारी मतदान पर इसका प्रभाव रहा या यह सहूलियतों की भरमार का असर है, इसको लेकर विमर्श का दौर जारी है। सभी राजनीतिक दलों में इसको लेकर अपने-अपने आकलन और खुशफहमी भी है। एनडीए इसे अपने वादों और काम पर जनता का विश्वास बता रहा तो राजद इसे बदलाव पर मुहर करार रहा। जनसुराज का मानना है कि पलायन का मुद्दा सबसे पहले उसने उठाया था और सत्ता में आने पर इसे रोकने की बात कही थी।
उधर, पूछे जाने पर समाज शास्त्री डॉ. डीएम दिवाकर ने बताया कि अधिक मतदान होना एक सुखद संकेत है कि राज्य के लोगों की आस्था लोकतंत्र की प्रति पहले से अधिक गहरी हुई है। पटना जैसे क्षेत्र में भी इस बार अधिक वोट पड़े हैं, जहां काफी कम मतदान हुआ करता था। यह बताता है कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बढ़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि मत प्रतिशत का अप्रत्याशित रूप से बढ़ने का तय मानक यही है कि यह बदलाव के लिए होता है।
नीतीश कुमार को फिर सीएम बनाने के लिए उत्साह : जदयू
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि माताओं और बहनों ने जाति-धर्म की भावना से ऊपर उठकर प्रदेश में शांति, सुरक्षा, समृद्धि तथा सुशासन के लिए मतदान किया है। बिहार के चुनावी इतिहास के आंकड़े बताते हैं कि 6 नवंबर, 2025 से पहले बिहार में सर्वाधिक 62.57 प्रतिशत मतदान वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में हुआ था। तब भी तत्कालीन सरकार की वापसी हुई थी। अक्टूबर 2005 के चुनाव में बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ, लेकिन मतदान सिर्फ 45.85% प्रतिशत हुआ था। अब 2025 में सबसे ज्यादा वोट पड़े हैं, क्योंकि नीतीश कुमार को फिर से मुख्यमंत्री बनाने के प्रति इस बार लोगों में सबसे ज्यादा उत्साह है।
जनता ने विकास कार्यों और सेवाओं पर वोट किया है : भाजपा
भाजपा नेता सह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि जनता तक सुविधाएं पहुंची हैं। जनता ने विकास कार्यों और उन तक पहुंच रही सेवाओं पर वोट किया है। यही कारण है कि मतदान का प्रतिशत बढ़ा है। नीतीश कुमार और एनडीए ने जो शासन किया, उस पर जनता को भरोसा है। साथ ही बिहार की समृद्धि के लिए जनता ने वोट किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नेतृत्व बिहार की जनता को कबूल है।
बिहार ने पहले चरण में बदलाव के लिए मतदान किया : राजद
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा है कि बिहार ने प्रथम चरण में बदलाव के लिए मतदान किया है। हर बिहारवासी ने 20 साल के अंधकार को मिटाने के लिए, घर से निकल कर परिवर्तन की ऐसी रोशनी जलाई है कि कि पूरे बिहार में सुख, समृद्धि, सुरक्षा, सम्मान, सौहार्द, शांति और खुशहाली की दस्तक सुनाई देने लगी है। 20 वर्षों में पहली बार इस तरह की अभूतपूर्व बदलाव की लहर महागठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रही है। महिलाएं, बुजुर्ग और युवाओं ने जिस जोश, जुनून, जज्बे, उम्मीद और उत्साह के साथ लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की, उससे साफ हो चुका है कि बिहार में महापरिवर्तन होने जा रहा है।
चुनाव में रिकार्ड मतदान सत्ता बदलने का संकेत : कांग्रेस
कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने कहा कि एनडीए सरकार को बदलने के लिए लोगों ने उत्साह और जोश से मतदान किया है। विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण में रिकार्ड मतदान को सत्ता बदलने का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनाने के लिए लोगों ने जमकर वोट किया है। रोजगार और पलायन के मुद्दे पर लोगों ने मतदान किया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में भी लोगों ने मतदान कर अपने गुस्से का इजहार किया है। वहीं, युवाओं ने रोजगार के लिए महागठबंधन को वोट किया है।
जनता नए विकल्प को लेकर उत्साह में है : जन सुराज
जनसुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने पहले चरण में हुई बंपर वोटिंग पर कहा कि 14 नवंबर को मतगणना की तारीख को इतिहास लिखा जाएगा। जनता नए विकल्प को लेकर उत्साह में है और प्रवासी मजदूरों ने बड़े पैमाने पर वोटिंग की है। उन्होंने जनसुराज की जीत का दावा किया और कहा कि बिहार में पहली बार युवाओं की वोटिंग सबसे अधिक हुई है, इतनी वोटिंग सरकार बनाए रखने के लिए नहीं होती, बदलाव निश्चित है।
(पटना से हिन्दुस्तान ब्यूरो की रिपोर्ट)





