
बिहार के बुद्धिस्ट सर्किट में एक और जिला शामिल, बौद्ध पर्यटकों के लिए यहां क्या है खास
पहली बार राज्य के बुद्धिस्ट सर्किट में भागलपुर शामिल हुआ है। बिहार टूरिज्म के ब्राउजर में विक्रमशिला भग्नावशेष को स्थान मिला है। इसके साथ ही बिहार के बुद्धिस्ट सर्किट में शामिल होने वाले जिले आठ हो गए हैं।
बिहार में बौद्ध सर्किट केवल बोधगया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के कई अन्य जिलों में फैला हुआ है। इनमें से प्रत्येक का बुद्ध के जीवन में विशेष महत्व है। अब बिहार आने वाले बौद्ध पर्यटकों का आना-जाना कहलगांव भी होगा। पहली बार राज्य के बुद्धिस्ट सर्किट में भागलपुर शामिल हुआ है। बिहार टूरिज्म के ब्राउजर में विक्रमशिला भग्नावशेष को स्थान मिला है। इसके साथ ही बिहार के बुद्धिस्ट सर्किट में शामिल होने वाले जिले आठ हो गए हैं।
कहलगांव स्थित विक्रमशिला भग्नावशेष की ब्रांडिंग के लिए बोधगया एवं अन्य जगहों में बौद्ध पर्यटकों को ब्राउजर बांटा जा रहा है। दर्शनीय स्थल विक्रमशिला विश्वविद्यालय के खंडहर, जो 13वीं शताब्दी ईस्वी में बने थे। इसकी स्थापना पाल राजा धर्मपाल ने की थी। यह एक जीवंत शिक्षा केंद्र था। जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक और छात्र थे। यहां दर्शनशास्त्र, धर्मशास्त्र, तत्व मीमांसा, व्याकरण, तर्कशास्त्र, तंत्रवाद आदि विषय पढ़ाए जाते थे।
यहां दो मंजिले स्तूप के मध्य में क्रूस नुमा संरचना है। यहां एक पुस्तकालय और कई पूजा-अर्चना स्थल हैं। इसमें एक तिब्बती और एक हिंदू मंदिर भी है। ब्राउजर में गया, बोधगया, नालंदा, राजगीर, वैशाली, पटना, जहानाबाद, पूर्वी चंपारण एवं पश्चिमी चंपारण जिला को भी लिया गया है।





