
बिहार में नई सरकार के गठन की तैयारी, 1 करोड़ नौकरी और रोजगार समेत कई चुनौतियां
संक्षेप: कैबिनेट सचिवालय विभाग के नोटिफिकेशन के अनुसार, मंत्रिपरिषद की बैठक सोमवार को होगी। जदयू नेता का कहना है कि मीटिंग में निवर्तमान विधानसभा को भंग करने और नीतीश को राज्यपाल से मिलने के लिए अधिकृत करने के प्रस्ताव पारित होंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद फोकस अब नई सरकार के गठन पर है। इसी क्रम में सोमवार को निवर्तमान मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक होगी, जिसमें निश्चित रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस दिशा में जरूरी कदम उठाने के लिए समर्थन मिलेगा। बैठक में निवर्तमान विधानसभा को भंग करने और नीतीश को राज्यपाल से मिलने के लिए अधिकृत करने के प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के दौरान 84 सार्वजनिक सभाएं कीं और अगली सरकार के एजेंडे पर जोर देते रहे। उन्होंने निवेशकों से राज्य में निवेश बढ़ाने की भी अपील की। चलिए हम आपको विस्तार से बताते हैं कि नई सरकार के गठन के बाद 5 बड़ी चुनौतियां क्या होंगी...

1. रोजगार + 1 करोड़ नौकरियां
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चुनाव प्रचार के दौरान अगले पांच साल में 1 करोड़ नौकरियां पैदा करने का वादा बार-बार दोहराया। यह वादा 2020 के चुनावों से उपजा है, जहां आरजेडी नेता तेजस्वी यादव की नौकरियों की अपील ने महागठबंधन को 110 सीटें दिलाई थीं। इसे समर्थन देने के लिए सरकार ने मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना लागू की है, जो महिला उद्यमियों को 10 लाख रुपये का अनुदान देती है। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना पात्र महिला उद्यमियों को 2.1 लाख रुपये मुहैया कराती है, जिसमें पहली गैर-वापसी योग्य किस्त के रूप में 1.51 करोड़ महिलाओं को 10 हजार रुपये बांटे गए। आगे की किस्तें व्यवसाय प्रस्ताव की व्यवहार्यता पर निर्भर करती हैं, जिसमें 1 करोड़ प्रस्तावों से कुल 2 लाख करोड़ रुपये की उम्मीद है। सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में करीब 5 लाख नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखती है।
2. खेती और फूड प्रोसेसिंग में निवेश
राज्य को पिछले तीन वर्षों में सीमेंट, चमड़ा, परिधान, आतिथ्य और आईटी जैसे क्षेत्रों में 66,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। भविष्य में फोकस मखाना, केला, मक्का, आम, टमाटर, आलू और लीची उद्योगों के लिए कृषि और फूड प्रोसेसिंग में निवेश आकर्षित करने पर होगा। इससे अर्ध-शहरी और शहरी क्षेत्रों में लाखों नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है।
3. मेडिकल और एजुकेशनल एक्सीलेंस सेंटर
सरकार जिलों में मल्टी-स्पेशलिटी अस्पतालों को अपग्रेड करने या स्थापित करने की योजना बना रही है ताकि पटना के अस्पतालों पर दबाव कम हो। साथ ही, अगले पांच वर्षों में जिला स्तर पर नवोदय या सिमुलतला स्कूल मॉडल को दोहराने का इरादा है।
4. परिवहन का क्षेत्र
पटना के बाहर सड़क परिवहन में सुधार को प्राथमिकता दी जाएगी। जिला स्तर पर अधिक पिंक बसें शुरू करना और जिला मुख्यालयों व पटना के बीच सरकारी बसों को बढ़ाना शामिल है। पटना मेट्रो प्रोजेक्ट विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 3 किमी के खंड के साथ शुरू हुआ। इसके अगले दो वर्षों में विस्तारित होने की उम्मीद है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की ओर से घोषित आधा दर्जन एक्सप्रेसवे आने वाले बरसों में पूरे होने की संभावना है।
5. युवा पहलों को मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने विजय भाषण में जोर दिया कि नई पहलें महिला-युवा पर केंद्रित होंगी। यह जुलाई में घोषित राज्य युवा आयोग के साथ मेल खाता है। यह बेहतर शिक्षा व नौकरी परामर्श देने, युवाओं को खेलों से जोड़ने, स्वरोजगार के लिए स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने और व्यावसायिक प्रशिक्षण व कौशल विकास को सुगम बनाने के लिए काम करेगा।
बता दें कि बिहार में नई सरकार के गठन की कोशिशें तेज हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी विनोद सिंह गुंजियाल ने विधानसभा चुनाव में निर्वाचित हुए सदस्यों की सूची के साथ राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की थी। चुनाव के परिणाम शुक्रवार को घोषित किए गए। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 200 से अधिक सीट पर जीत हासिल की। भाजपा ने सबसे अधिक 89, जदयू ने 85, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 19, हिंदुस्ताव अवाम मोर्चा सेक्युलर ने 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्च (आरएलएम) ने 4 सीट जीतीं।





