लालू की 'पाठशाला' से निकले सम्राट चौधरी अब बिहार के 'सरताज', जानिए फर्श से अर्श तक की कहानी

Jayendra Pandey लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Bihar Politics: सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। दिग्गज नेता शकुनी चौधरी के पुत्र सम्राट ने राजद से अपना करियर शुरू किया था। 19 साल की उम्र में मंत्री बनने से लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और अब मुख्यमंत्री बनने तक का उनका सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है।

लालू की 'पाठशाला' से निकले सम्राट चौधरी अब बिहार के 'सरताज', जानिए फर्श से अर्श तक की कहानी

Samrat Choudhary: बिहार की सियासत में आज एक नए सूर्य का उदय हुआ है। सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। कभी राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे और उन्हीं की राजनीतिक पाठशाला से क, ख, ग सीखने वाले सम्राट अब उसी बिहार की कमान संभालने जा रहे हैं जिसे उन्होंने अपनी आंखों के सामने बदलते देखा है। सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है; उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के उन दिग्गज समाजवादी नेताओं में गिने जाते हैं जिनका दबदबा दशकों तक रहा। आज जब सम्राट के नाम पर मुख्यमंत्री पद की मुहर लगी, तो यह न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की जीत है, बल्कि उनके परिवार की राजनीतिक विरासत का चरमोत्कर्ष भी है।

विरासत से लेकर 19 की उम्र में मंत्री बनने का सफर

16 नवंबर 1968 को मुंगेर के लखनपुर में जन्मे 57 वर्षीय सम्राट चौधरी का सफर बेहद दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर का आगाज राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से किया था। राजनीति के शुरुआती दौर में ही उन्होंने तब सुर्खियां बटोरी थीं, जब वे महज 19 साल की उम्र में राबड़ी देवी की सरकार में मंत्री बना दिए गए थे। हालांकि, उम्र के विवाद के कारण उन्हें उस वक्त पद से बर्खास्त भी होना पड़ा, लेकिन उस घटना ने उन्हें बिहार की राजनीति का एक चर्चित चेहरा बना दिया। उनके पिता शकुनी चौधरी, जो कभी लालू यादव के 'खास' थे और बाद में नीतीश कुमार के साथ हो गए, उनके मार्गदर्शन में सम्राट ने सत्ता की बारीकियों को समझा। राजद से जेडीयू और फिर भाजपा तक का उनका सफर यह बताता है कि वे बदलते वक्त के साथ राजनीति की दिशा मोड़ने का हुनर जानते हैं।

भाजपा का भरोसा और अब 'मिशन बिहार' की कमान

भाजपा में शामिल होने के बाद सम्राट चौधरी का कद बहुत तेजी से बढ़ा। पार्टी ने उन्हें पहले प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी और अब राज्य के सर्वोच्च पद पर बिठाकर उन पर सबसे बड़ा दांव खेला है। सम्राट चौधरी न केवल एक आक्रामक वक्ता हैं, बल्कि संगठन और जातीय समीकरणों को साधने में भी माहिर माने जाते हैं। निजी जीवन में वे एक संजीदा व्यक्तित्व हैं, उनकी पत्नी ममता कुमारी और उनके दो बच्चे (एक बेटा और एक बेटी) उनकी इस यात्रा में मजबूती से साथ रहे हैं। आज जब वे मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहे हैं, तो उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ है, लेकिन उनके समर्थकों का मानना है कि लालू की पाठशाला से सीखा हुआ यह 'शिष्य' अब भाजपा के सबसे बड़े 'सम्राट' के तौर पर बिहार को एक नई दिशा देगा।

अमित शाह के खास हैं सम्राट चौधरी

गौरतलब है कि सम्राट चौधरी ने राजनीतिक करियर की शुरुआत राजद (RJD) से की थी, जेडीयू के रास्ते वे भाजपा में शामिल होने के बाद वे पूरी तरह से पार्टी के रंग में रंग गए। भाजपा के अंदर और बाहर अब यह चर्चा आम हो गई है कि सम्राट चौधरी असली भाजपाई हैं। पार्टी के कार्यकर्ता स्तर से लेकर ऊंचे पदों तक उनकी तेजी से तरक्की हुई। वे बिहार भाजपा के अध्यक्ष बने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विश्वासपात्र बन गए। इसी विश्वास और करीबी के चलते बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि सम्राट चौधरी एक दिन बड़ा आदमी बनेंगे। आज अमित शाह की उस भविष्यवाणी को सही साबित करते हुए सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

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लेखक के बारे में

Jayendra Pandey
अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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