जेल गया, नौकरी छूटी, डीआईजी ने ऐसा लिख दिया कि... यह घूसखोर दारोगा कहीं का नहीं रहा

Sudhir Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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निगरानी विभाग की विशेष टीम ने दारोगा सदरे आलम को 30 सितंबर 2021 को जीरोमाइल चौक के पास एक चाय दुकान पर सिपाहपुर की महिला तबस्सुम आरा से 11 हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा था।

जेल गया, नौकरी छूटी, डीआईजी ने ऐसा लिख दिया कि... यह घूसखोर दारोगा कहीं का नहीं रहा

Bihar Daroga Dismissed: बिहार के मुजफ्फरपुर में घूस लेते पांच साल पहले धरे गए दारोगा सदरे आलम को विभागीय कार्यवाही के आधार पर तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने गुरुवार को सेवा से बर्खास्त कर दिया। मुजफ्फरपुर से स्थानांतरित होने के बाद वह अभी वैशाली जिला पुलिस बल में पदस्थ थे। बर्खास्तगी का पत्र वैशाली एसपी को भेज दिया गया है। मुजफ्फरपुर के अहियापुर में तैनाती के दौरान वह घूस लेते पकड़ा गया था।

निगरानी विभाग की विशेष टीम ने दारोगा सदरे आलम को 30 सितंबर 2021 को जीरोमाइल चौक के पास एक चाय दुकान पर सिपाहपुर की महिला तबस्सुम आरा से 11 हजार रुपये घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा था। तबस्सुम का पुत्र एक केस में फंसा था। महिला ने घूस मांगने की शिकायत निगरानी विभाग में की थी। सत्यापन के बाद निगरानी की टीम ने सदरे आलम को जीरोमाइल के पास से रंगेहाथ गिरफ्तार किया था।

वैशाली मैं तैनात था

घूसखोरी में पकड़े गए दारोगा सदरे आलम जमानत पर जेल से छूटने के बाद फिर मुजफ्फरपुर जिला बल ज्वाइन किया। उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही संचालित की गई। इस बीच, उसका स्थानांतरण वैशाली हो गया। विभागीय कार्यवाही में पांच साल की अवधि बीत गई। डीएसपी पूर्वी को उसके खिलाफ विभागीय जांच व कार्यवाही के लिए संचालन पदाधिकारी बनाया गया था।

डीआईजी चंदन कुशवाहा ने आदेश में लिखा है कि विभागीय कार्यवाही व संचालन पदाधिकारी के मंतव्य से सहमत होते हुए भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए गए एसआई सदरे आलम को दो अप्रैल 2026 की तिथि से सेवा से बर्खास्त किया जाता है।

डीआईजी ने की सख्त टिप्पणी

डीआईजी ने लिखा है कि सदरे आलम जैसे पुलिसकर्मी के विभाग में बने रहने से आमजन के साथ अन्य पुलिसकर्मियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ऐसे भ्रष्ट पदाधिकारी का विभाग में रहने का कोई औचित्य नहीं है।

सदरे आलम के खिलाफ की गई कार्रवाई बिहार पुलिस के अधिकारियों के लिए बड़ी सीख है। वर्दी पहनकर उसका अवैध तरीके से इस्तेमाल करना और लेन देन करने का नतीजा गलत ही होता है। बताया जाता है कि मुजफ्फरपुर में दारोगा सदरे आलम का आतंक कायम था। आम जनों को थाने में हरकाना, केस में फंसाने की धमकी देना, अवैध उगाही के लिए डराना उसका शगल बन गया था। एक महिला से 11 हजार घूस लेते हुए वह निगरानी की टीम के द्वारा दबोच लिया गया। जेल से निकलने के बाद उसकी नौकरी बहाल हो गई पर बच नहीं पाई। दूसरों को परेशान करने वाला दारोगा खुद सड़क पर आ गया।

Sudhir Kumar

लेखक के बारे में

Sudhir Kumar

टीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।

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