बिहार में दारोगा के हाथ से निकले 425 थाने, सिर्फ इंस्पेक्टर को ही मिलेगी थानेदार की पोस्टिंग

हिन्दुस्तान, हिंदुस्तान ब्यूरो, पटना
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Bihar Police Station Rules: बिहार के 425 थानों में अब केवल इंस्पेक्टर ही थाना प्रभारी बनेंगे। डीजीपी विनय कुमार के आदेश पर 217 थानों को अपग्रेड कर वहां दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टरों को तैनात किया जाएगा।

Bihar Police

Bihar Police Station Rules: बिहार में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराधों की जांच को ज्यादा असरदार बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य के 425 महत्वपूर्ण पुलिस थानों की कमान सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) के हाथों में नहीं होगी, बल्कि इन थानों में केवल इंस्पेक्टर रैंक के सीनियर अधिकारियों को ही थानाध्यक्ष (थाना प्रभारी) बनाया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीजीपी विनय कुमार ने सोमवार को यह नया आदेश जारी कर दिया है। इन अनुभवी इंस्पेक्टरों के पास अब अंचल निरीक्षक (सर्किल इंस्पेक्टर) जैसी शक्तियां होंगी। इनके आने से थानों के अंदर मुकदमों की जांच और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए दो अलग-अलग विशेष टीमें पूरी मुस्तैदी से काम करेंगी।

217 नए थाने किए गए अपग्रेड

इस नई प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने थानों को चुनने का एक बहुत ही साफ-सुथरा पैमाना तय किया है। पहले से तय 208 थानों के अलावा अब राज्य के 217 और थानों को अपग्रेड किया गया है। इन थानों को उनके बड़े आकार, अपराध के लिहाज से संवेदनशीलता और वहां हर साल दर्ज होने वाले कम से कम 350 या उससे अधिक मुकदमों की संख्या को देखकर चुना गया है। डीजीपी के आदेश के बाद यह नया नियम तुरंत पूरे बिहार में लागू कर दिया गया है। रेलवे और जिला पुलिस को सख्त हिदायत दी गई है कि अगर कोई इंस्पेक्टर छुट्टी पर भी जाता है, तो उसकी जगह नीचे के रैंक के किसी अधिकारी को इन थानों का परमानेंट चार्ज नहीं दिया जाएगा।

थानेदार के नीचे काम करेंगे दो सब-इंस्पेक्टर

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इन थानों में इंस्पेक्टर स्तर के थाना प्रभारी के नीचे दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टर (SI) तैनात किए जाएंगे। इनमें से एक सब-इंस्पेक्टर का काम सिर्फ केसों की जांच करना होगा, जबकि दूसरे सब-इंस्पेक्टर का काम इलाके में शांति बनाए रखना होगा। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि 425 थानों में इस नए तरीके से अफसरों की तैनाती करने से बिहार सरकार की तिजोरी पर कोई भी अतिरिक्त नया आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा और न ही इसके लिए किसी नए पद को बनाने की जरूरत होगी। इस बेहतर व्यवस्था से जहां पुलिस को काम करने में आसानी होगी, वहीं आम जनता की शिकायतों का निपटारा भी बिना किसी देरी के सीधे थानों में ही हो जाएगा।

Jayendra Pandey

लेखक के बारे में

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अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। वर्तमान में वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'हिन्दुस्तान' की बिहार टीम के लिए राजनीति, क्राइम और जनसरोकार से जुड़ी बड़ी खबरों को बेहद आक्रामकता और गहराई के साथ कवर कर रहे हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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