बिहार में दिसम्बर तक हो पाएगा पंचायत चुनाव? इन 3 फार्मूले से परिसीमन के बाद ही इलेक्शन
पंचायतों के परिसीमन के लिए तीन फार्मूले पर सरकार विचार कर रही है। परिसीमन में 6 हजार से 8 हजार की आबादी वाली पंचायतें जस की तस रह जायेंगी। वहीं, 6 हजार से कम और 8 हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतों पर परिसीमन का असर अधिक होगा।

Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में नये परिसीमन के आधार पर ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होंगे। पंचायतों के परिसीमन के लिए तीन फार्मूले पर सरकार विचार कर रही है। परिसीमन में 6 हजार से 8 हजार की आबादी वाली पंचायतें जस की तस रह जायेंगी। वहीं, 6 हजार से कम और 8 हजार से अधिक आबादी वाली पंचायतों पर परिसीमन का असर अधिक होगा।
सूत्रों के मताबिक 7 हजार की आबादी पर एक पंचायत परिसीमन का आधार होगा। राज्य मंत्रिमंडल ने 32 साल बाद होने वाले परिसीमन पर बुधवार को ही मुहर लगाई है। जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी होगी। 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन के बाद पंचायत चुनाव कराने के निर्णय से चुनाव में देरी तय है। 8053 पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर में पूरा हो रहा है।
फार्मूला नंबर-1
बताया गया है कि सात हजार की आबादी पर एक पंचायत होगी। ऐसी पंचायत जिसकी आबादी छह हजार से आठ हजार है उनका परिसीमन नहीं होगा। 12 हजार से 17 हजार आबादी वाली पंचायतों को दो भागों में बांटा जाएगा। 18 हजार या उससे अधिक आबादी वाले पंचायतों को तीन नए पंचायतों में बांट दिया जाएगा।
फार्मूला नंबर- 2
सात हजार की आबादी को आधार मानकर राज्य भर में नए सीरे से परिसीमन का काम कराया जाएगा। बिहार की ग्रामीण आबादी 8 करोड़ 80 लाख है। इसके आधार पर बिहार में पंचायतों की संख्या 12 हजार 500 से अधिक होगी।
फार्मूला नंबर-3
6 हजार से 8 हजार की आबादी वाली पंचायतें यथावत रहेंगी। 6 हजार से कम और 8 हजार से अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों को सात हजार को आधार मानते हुए परिसीमन कार्य को पूरा किया जाएगा।
इससे पहले कब हुआ परिसीमन?
बताते चलें कि, पिछली बार 1992 में परिसीमन का काम शुरू हुआ। इसे पूरा करने में दो साल लग गए। 1992 में परिसीमन का काम हुआ जो 1994 में पूरा हुआ था। इस बार आरक्षण और परिसीमन दोनों राज्य निर्वाचन आयोग को करना है। सबकी नजरें चुनाव आयोग की गतिविधियों पर टिकी हैं। बिहार में वर्तमान में 8053 पंचायतें हैं जिनका कार्यकाल इसी साल दिसम्बर में पूरा होने वाला है। इससे पहले पंचायत चुनाव वर्तमान परिस्थितियों में संभव नहीं दिख रहा है।
लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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