
बिहार में अब भूकंप का ज्यादा खतरा, सिस्मिक जोन-5 में पहुंचे 12 जिले; क्या बदलाव?
बिहार के भागलपुर, पूर्णिया समेत 12 जिलों का सिस्मिक जोन बदल गया है। इससे पूर्वी बिहार, कोसी और सीमांचल क्षेत्र में भूकंप का खतरा और बढ़ गया है। इन जिलों में अब घरों-इमारतों के निर्माण में सावधानियां बरती जाएंगी।
पहले की तुलना में भागलपुर समेत पूर्वी बिहार एवं कोसी-सीमांचल के 12 जिले अब ज्यादा भूकंप की जद में हैं। जारी नए नक्शे में न केवल पूर्वी बिहार, कोसी-सीमांचल के 12 जिलों का भूकंप जोन बदल गया है, बल्कि ये चेतावनी भी दी गई है कि अब लोगों को पहले की तुलना में निर्माण कराते वक्त ज्यादा भूकंपरोधी उपायों को अपनाना होगा।

भारत ने अपने भूकंपीय खतरे के मूल्यांकन में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए नया अर्थक्वेक डिजाइन कोड-2025 जारी किया है। इस अपडेटेड सिस्मिक जोनेशन मैप में पूरे हिमालयी आर्क को पहली बार नवनिर्मित उच्चतम जोखिम वाले जोन 6 में रखा गया है। वहीं, बिहार के 12 जिलों को जोन-5 में शामिल किया गया है।
बिहार कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार बताते हैं कि नई वर्गीकृत प्रणाली से पता चलता है कि भागलपुर, बांका, जमुई, सहरसा, अररिया, सुपौल, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, मुंगेर, मधेपुरा, किशनगंज जिले भूकंप के सिस्मिक जोन 5 में पहुंच चुके हैं। यानी ये सब जिले उच्च जोखिम वाले जिले हैं। जबकि पूर्व में जारी मैप में ये सब जिले जोन-4 में आते थे।
उन्होंने बताया कि अब इन जिलों में भवन निर्माण को लेकर कठोर नियम बनाने होंगे, तो सक्रिय फॉल्ट्स के पास बन रही इमारतों के लिए विशेष प्रावधान लागू करने होंगे। इसके अलावा बढ़ती जनसंख्या, लगातार हो रहे निर्माण कार्य आदि भी भूकंप के खतरे को बढ़ा रहे हैं।
जोन-6 में मधुबनी और दरभंगा
मधुबनी एवं दरभंगा जिले सिस्मिक जोन-6 में हैं। वहीं गयाजी, रोहतास समेत दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम बिहार के जिले सिस्मिक जोन-3 में हैं। संभावित भूकंपीय टूटन अब दक्षिण की ओर बढ़ते हुए हिमालयी फ्रंटल थ्रस्ट तक जाते हुए दिख रहे हैं।





