
20 मिनट चली BJP-JDU की शिखर वार्ता; नीतीश और अमित शाह ने सुलझा लिया NDA का सीट गणित?
संक्षेप: बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए के उलझे सीट बंटवारे को सुलझाने के लिए गुरुवार को पटना में नीतीश कुमार और अमित शाह की मौजूदगी में जेडीयू और बीजेपी की टॉप लीडरशिप के बीच शिखर वार्ता जैसी बैठक हुई। दोनों दलों के बड़े नेता मीटिंग में थे।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में पटना के एक होटल में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राज्य यूनिट की टॉप लीडरशिप के बीच शिखर वार्ता स्तर की बैठक हुई। गुरुवार की सुबह करीब 20 मिनट चली इस बैठक की बातचीत को लेकर दोनों दलों ने कुछ कहा नहीं है, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में विधानसभा चुनाव के सीट बंटवारे पर सस्पेंस के बीच जदयू, भाजपा और बाकी दलों की सीटों की संभावित संख्या पर चर्चा हुई। 13 सितंबर को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी कोर कमिटी की बैठक के लिए पटना आए थे लेकिन नीतीश से मिले बिना ही दिल्ली लौट गए थे।

अमित शाह डेहरी और बेगूसराय में भाजपा के 20 जिलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को जीत का गुरुमंत्र देने दो दिन के बिहार दौरे पर बुधवार की रात पटना पहुंचे थे। बुधवार रात भी शाह ने बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ बैठक की थी। गुरुवार सुबह अमित शाह के डेहरी जाने से पहले नीतीश उनसे मुलाकात करने पटना के मौर्या होटल पहुंचे थे। नीतीश के साथ जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय चौधरी भी थे। होटल में पहले से भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े, उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, पूर्व अध्यक्ष संजय जायसवाल, प्रदेश संगठन महासचिव भीखूभाई दलसानिया भी मौजूद थे।
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नीतीश और अमित शाह की बैठक के दौरान ये नेता मौजूद थे, जिससे सहज अनुमान लगाया जा रहा है कि एजेंडा सीट बंटवारा रहा होगा। अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं को अलग रखकर अमित शाह और नीतीश कुमार के बीच अकेले में चर्चा हुई है या नहीं। राजनीतिक चर्चा यही है कि जेडीयू और बीजेपी कम से कम 100 सीट खुद लड़ना चाहती है और उसमें भी जेडीयू भाजपा से कम से कम एक सीट ज्यादा चाहती है। बाकी बची सीटों की संख्या 40-42 बनती है जिसमें चिराग पासवान, जीतनराम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की सीटों की डिमांड पूरी होती नहीं दिख रही है।
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चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी- रामविलास (एलजेपीआर) खुलकर 30-40 सीट मांग रही है तो हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के जीतनराम मांझी भी 15 सीटों के लिए करो या मरो बोलने लगे हैं। उपेंद्र कुशवाहा 8-10 सीट की अपेक्षा रखते हैं और एनडीए के सहयोगी दलों को सेल्फ गोल करने से सतर्क कर रहे हैं। मुकेश सहनी 2020 की तरह किसी भी दिन महागठबंधन छोड़कर अचानक एनडीए में आ जाएं, इसकी संभावना से कोई इनकार नहीं कर सकता। सहनी की आखिरी मौके पर पलटी की सूरत के लिए भी सीट रखनी होगी। कुल मिलाकर महागठबंधन के साथ-साथ एनडीए के लिए भी सबको खुश रख पाने वाला सीट बंटवारा जटिल पहेली है।





