बिहार म्यूजियम के सोवेनियर स्टोर ने रचा इतिहास; 1.71 करोड़ कमाकर देश का नंबर 1 संग्रहालय सेल सेंटर

Jayendra Pandey लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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बिहार म्यूजियम का सोवेनियर स्टोर 1.71 करोड़ रुपये की सालाना बिक्री के साथ देश का शीर्ष म्यूजियम स्टोर बन गया है। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विजन और स्थानीय कलाकारों के कौशल की वजह से बिहार की कला को अंतरराष्ट्रीय मंच मिला है। पिछले एक साल में 5 लाख से अधिक…

बिहार म्यूजियम के सोवेनियर स्टोर ने रचा इतिहास; 1.71 करोड़ कमाकर देश का नंबर 1 संग्रहालय सेल सेंटर

Bihar Museum: बिहार की राजधानी पटना स्थित 'बिहार म्यूजियम' ने एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बिहार म्यूजियम का 'सोवेनियर स्टोर' मात्र एक साल में 1.71 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री के साथ देश का सबसे ज्यादा बिकने वाला म्यूजियम स्टोर बन गया है। यह उपलब्धि न केवल बिहार की समृद्ध कला और संस्कृति की जीत है, बल्कि यह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस दूरदर्शी विजन का परिणाम है, जहाँ विरासत को सहेजने के साथ-साथ उसे आधुनिक प्लेटफॉर्म पर प्रमोट करने का संकल्प लिया गया था। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस खबर को साझा कर बिहार के इस बढ़ते कदम की सराहना की है।

लोकल कलाकारों का 'ग्लोबल' जलवा

म्यूजियम स्टोर की इस शानदार सफलता के पीछे बिहार के स्थानीय शिल्पकारों और कलाकारों की कड़ी मेहनत है। स्टोर में मौजूद मिथिला पेंटिंग की साड़ियाँ, भागलपुर का सिल्क, बावन बूटी के वस्त्र और पारंपरिक हस्तशिल्प विदेशी पर्यटकों से लेकर स्थानीय लोगों तक की पहली पसंद बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 1.34 करोड़ था, जो वर्तमान वित्तीय वर्ष 25-26 में बढ़कर 1.71 करोड़ तक जा पहुँचा है। यह वृद्धि दर्शाती है कि बिहार की पारंपरिक और समकालीन कला के प्रति दुनिया भर में दीवानगी बढ़ रही है।

5 लाख से अधिक पर्यटकों ने किया दीदार

म्यूजियम में पर्यटकों की संख्या में भी भारी इजाफा हुआ है। जहाँ पहले यह आंकड़ा 4 से 4.5 लाख के आसपास रहता था, वहीं पिछले एक साल में 5 लाख से अधिक लोगों ने बिहार म्यूजियम का भ्रमण किया। बता दें कि बिहार म्यूजियम आज एक ऐसा प्लेटफॉर्म बन चुका है जहाँ विरासत को सिर्फ शीशे के बक्सों में बंद नहीं रखा जाता, बल्कि उसे लोगों के रोजगार और गर्व से जोड़ा जाता है। बिहार ने दिखा दिया है कि यदि सही मंच और अवसर मिले, तो संस्कृति न केवल आत्म-सम्मान बढ़ाती है, बल्कि आर्थिक उन्नति के द्वार भी खोल सकती है।

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लेखक के बारे में

Jayendra Pandey
अदम गोंडवी के शहर गोण्डा से ताल्लुक रखने वाले जयेंद्र पाण्डेय मेनस्ट्रीम मीडिया में अपनी अलग पहचान बना रहे एक ऊर्जावान युवा पत्रकार हैं। वर्तमान में ’हिन्दुस्तान’ (Hindustan Times Group) के साथ जुड़कर जनसरोकार की खबरों को कवर कर रहे जयेंद्र ने नोएडा के प्रतिष्ठित संस्थान जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की बारीकियां सीखीं और अपने करियर का आगाज ‘जी न्यूज’ की नेशनल टीम में इंटर्नशिप से किया। इसके बाद उन्होंने ’दैनिक भास्कर’ में बतौर ट्रेनी फीचर और स्पेशल स्टोरीज पर काम करते हुए कंटेंट की बारीकियों को समझा। अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग में अपना लोहा मनवाया, जिसमें नोएडा ट्विन टावर डिमोलिशन से लेकर बृजभूषण शरण सिंह बनाम पहलवानों के धरने तक कई हाई-प्रोफाइल इवेंट्स की ग्राउंड रिपोर्टिंग और अन्य कई स्पेशल स्टोरीज शामिल हैं। मीडिया के साथ-साथ जयेंद्र का रुझान पॉलिटिकल कंसल्टेंसी की ओर भी है। वे चुनावी समीकरणों और रणनीतिक प्रबंधन की अच्छी समझ रखते हैं। और पढ़ें
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