
हथियारों की मंडी में 'सफेद जहर' का तड़का, किशोर बने कुरियर; यह जिला ब्राउन शुगर का नया हब
हथियारों के साथ अब ‘सफेद जहर’ का तड़का जुड़ गया है, जिसने न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि स्थानीय युवाओं के भविष्य को भी गंभीर संकट में डाल दिया है। ऐसे में अपराध के नए चेहरे एवं ग्राफ चिंता बढ़ा दी है।
ऐतिहासिक विरासत और योग नगरी के रूप में पहचान रखने वाले बिहार के मुंगेर जिले में एक बार फिर अपराध की काली परछाईं में घिरता नजर आ रहा है। अवैध हथियार निर्माण के लिए देशभर में कुख्यात यह जिला अब नशीले पदार्थों की तस्करी का नया ठिकाना बनता जा रहा है। हथियारों की मंडी में अब नशे की घुसपैठ हो गई है।
हथियारों के साथ अब ‘सफेद जहर’ का तड़का जुड़ गया है, जिसने न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि स्थानीय युवाओं के भविष्य को भी गंभीर संकट में डाल दिया है। ऐसे में अपराध के नए चेहरे एवं ग्राफ चिंता बढ़ा दी है। वर्ष- 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि, पुलिस की सख्ती के बावजूद अपराधियों ने तस्करी के नए रास्ते और नए तरीके इजाद कर लिए हैं। अब तस्करों के द्वारा हथियार तस्करी के पुराने रूट का इस्तेमाल ड्रग पेडलिंग के लिए किया जा रहा है।
पुलिस-प्रशासन का दावा
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तारियों में बढ़ोतरी हुई है और निगरानी बढ़ाई गई है। बावजूद इसके आम जनता में पुलिस के प्रति भरोसे की कमी साफ झलकती है। लोगों का कहना है कि, सूचना देने के बाद भी कई बार पुलिस समय पर नहीं पहुंचती, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद रहते हैं। वहीं, दुर्गम दियारा इलाका आज भी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
बिक रहा सफेद जहर
शहर के कासिम बाजार और कोतवाली थाना क्षेत्र के कुछ इलाके अब ‘नशा जोन’ के रूप में पहचाने जाने लगे हैं। स्थानीय महिलाओं का आरोप है कि, शाम ढलते ही खंडहरों, सुनसान पार्कों और गंगा किनारे झोपड़ियों में स्मैक और नशे के इंजेक्शन का खुलेआम लेते है।
पिस्तौल के साथ नशीले पाउडर की डिलीवरी
पुलिस ने हाल के महीनों में ऐसे कई गिरोहों को पकड़ा है, जो अवैध पिस्तौल की डिलीवरी के साथ-साथ नशीले पाउडर की छोटी खेप भी सप्लाई कर रहे थे। सूत्र ने तो बताया कि, अब हथियार के बदले ड्रग्स का व्यापार फल फूल रहा है।
सामाजिक इलाज जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि, मुंगेर की समस्या का समाधान सिर्फ छापेमारी और गिरफ्तारियों से संभव नहीं है। जब तक युवाओं को रोजगार, कौशल और नशे से मुक्ति का रास्ता नहीं मिलेगा, तब तक अपराध की जड़ें कमजोर नहीं होंगी। हथौड़े की गूंज को फैक्ट्री के शोर में बदलना और नशीली पुड़ियों की सप्लाई चेन तोड़ना ही होगा।
प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि, हथियार तस्करी के पुराने रूट का इस्तेमाल अब ड्रग पेडलिंग के लिए भी किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्यों से जुड़ाव के कारण मुंगेर ब्राउन शुगर, स्मैक और प्रतिबंधित दवाओं की तस्करी का नया हब बनता जा रहा है।
किशोर बने कुरियर
अब हथियार तस्करी केवल बड़े अपराधियों तक सीमित नहीं रह गई है। कम उम्र के किशोर, जिन्हें ‘कूरियर’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, चंद पैसों या नशे के लालच में पिस्तौल और ड्रग्स की डिलीवरी कर रहे हैं। कई किशोर अपनी ‘मजदूरी’ पैसे में नहीं, बल्कि नशे के रूप में ले रहे हैं।
चिंता: अब दहलीज भी सुरक्षित नहीं
शहर के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी कहते हैं किपहले डर सिर्फ दूसरों की रंगदारी का था, अब डर इस बात का है कि, कहीं हमारा बच्चा नशे की गिरफ्त में न आ जाए। हर दूसरी गली के नुक्कड़ पर संदिग्ध युवक खड़े नजर आते हैं। ऐसे में लोगों का आरोप है कि, पुलिस की गश्त मुख्य सड़कों तक सीमित है।
पुलिस उप-महानिरीक्षक, मुंगेर प्रमंडल, मुंगेर, राकेश कुमार ने कहा कि हथियार तस्कर अगर इस तरह के कामों में संलिप्त हैं तो यह निश्चित रूप से चिंताजनक स्थिति है। हालांकि, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। आपके द्वारा मामला संज्ञान में आया है। पुलिस की निगाहें जिस तरह हथियार तस्करों पर है निश्चित तौर पर इस पैटर्न पर भी पुलिस काम करेगी और उम्मीद है कि, मामले का उद्वेदन भी किया जाएगा।





