रजिस्टर्ड बेरोजगारों की लिस्ट में बिहार दूसरे पायदान पर, पीएचडी वाले भी रोजगार तलाश रहे

हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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बिहार में रजिस्टर्ड बेरोजगारों की संख्या बढ़ती जा रही है। नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल पर देश भर से कई लोगों ने रोजगार के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। बिहार अब निबंधित बेरोजगारों की लिस्ट में दूसरे पायदान पर है। यहां पीएचडी करने वाले भी नौकरी तलाश रहे हैं। 

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बिहार में रोजगार हमेशा से ही एक बड़ा मुद्दा रहा है। सरकार राज्य में रोजगार सृजन के कई दावे करती है लेकिन इन दावों से अलग नेशनल करियर सर्विस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों से चौंकानी वाली बात पता चली है। दरअसल इस पोर्टल पर देश भर के बेरोजगार लोग रोजगार की आस में अपनी रजिस्ट्रेशन कराते हैं। जिसके बाद यह पता चला है कि रजिस्टर्ड बेरोजगाारों की लिस्ट में बिहार दूसरे नंबर पर है। देश में निबंधित बेरोजगारों में बिहार दूसरे पायदान पर है। नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल पर अब तक देश में छह करोड़ 26 लाख से अधिक बेरोजगारों ने अपना पंजीकरण कराया है। इसमें बिहार के 54 लाख 14 हजार से अधिक हैं जो कुल पंजीकृत बेरोजगारों का 8.65 फीसदी है। यहां के पंजीकृत बेरोजगारों में 26 लाख 67 हजार अभी सक्रिय हैं जो रोजी-रोजगार के लिए नियमित पड़ताल कर रहे हैं।

एनसीएस पोर्टल पर पंजीकरण के बाद ही रोजगार मेला या जॉब फेयर में बेरोजगारों को शामिल होने का मौका मिलता है। राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी पंजीकृत बेरोजगारों को ही रोजगार मुहैया कराती हैं। बिहार में पंजीकृत बेरोजगारों में 27.29 लाख पुरुष तो 26 लाख 60 हजार महिलाएं हैं। 523 ट्रांसजेंडर ने भी कराया है। पंजीकृत बेरोजगारों में सबसे अधिक 25 से 34 वर्ष के युवा हैं। इनकी संख्या 23 लाख 44 हजार है।

वहीं 18 से 24 वर्ष के बेरोजगारों की संख्या 18 लाख 13 हजार है। 35 से 44 वर्ष के बीच सात लाख 90 हजार, 45 से 54 के बीच दो लाख 97 हजार है। 55 से 64 वर्ष के बीच 92 हजार जबकि 16 से 18 वर्ष तक के बेरोजगारों की संख्या 73 हजार है। वहीं 64 वर्ष से अधिक के 6742 ने भी रोजी-रोजगार के लिए पंजीकरण कराया है।

650 पीएचडी डिग्रीधारियों ने भी मांगा रोजगार

रोजी-रोजगार मांगने वालों में पढ़े-लिखे होने के साथ ही निरक्षर भी शामिल हैं। नौवीं से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई करने वालों ने सबसे अधिक पंजीकरण कराया है। नौवीं तक पढ़ने वाले 15 लाख 24 हजार, 10वीं तक पढ़ने वाले 12 लाख 97 हजार, 11वीं करने वाले 6455, 12वीं तक पढ़ने वाले 12 लाख 74 हजार ने पंजीकरण कराया है।

स्नातक करने वाले पांच लाख 15 हजार, पीजी डिग्रीधारी 64 हजार, दसवीं के बाद डिप्लोमा करने वाले 25 हजार ने पंजीकरण कराया है। जबकि निरक्षर पांच लाख 62 हजार ने रोजी-रोजगार के लिए पंजीकरण कराया है। पीएचडी या विशेषज्ञ डिग्रीधारी 650 बेरोजगारों ने भी पंजीकरण कराया है। पंजीकृत में 55 हजार अपना रोजगार कर रहे हैं।

चुनावी वर्ष में सबसे अधिक हुआ पंजीकरण

बीते वर्ष बिहार में चुनाव था। चुनावी वर्ष में बेरोजगारों ने रिकॉर्ड पंजीकरण कराए। अप्रैल में 64 हजार, मई में 62 हजार, जून में 55 हजार, जुलाई में 72 हजार तो अगस्त में 86 हजार ने पंजीकरण कराया। चुनावी गहमागहमी शुरू होते ही सितम्बर में रिकॉर्ड पांच लाख, अक्तूबर में तीन लाख 71 हजार तो नवम्बर में एक लाख 41 ने पंजीकरण कराया। वहीं दिसम्बर में एक लाख छह हजार, जनवरी में 76 हजार, फरवरी में 72 हजार तो मार्च में 70 हजार से अधिक ने पंजीकरण कराया।

कहां - कितना पंजीकरण

महाराष्ट्र - 99.73 लाख

बिहार - 54.14 लाख

मध्य प्रदेश - 50.00 लाख

यूपी - 50.00 लाख

असम - 41.68 लाख

बंगाल - 38.99 लाख

कर्नाटक - 32.84 लाख

वर्षवार बिहार में निबंधन

वर्ष - निबंधन

2022-23 - 4414

2023-24 - 133667

2024-25 - 901188

2025-26 - 1682043

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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