बिहार में दाखिल-खारिज के लिए शुल्क, दूसरे राज्यों के डॉक्टर कर सकेंगे प्रैक्टिस; विधानसभा में विधेयक

हिन्दुस्तान, पटना
Follow us on Google News
share

बिहार विधानसभा के मौजूदा मानसून सत्र में कई विधेयक पेश किए जाने हैं। सोमवार को जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े अहम विधेयक को भी सदन में रखा गया है। इसके तहत अब सरकार दाखिल-खारिज के लिए 200 रुपये शुल्क वसूलेगी। 

Land Mutation
Land Mutation

बिहार विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है। इस सत्र में कई अहम विधेयक सदन के अंदर रखे गए हैं। राज्य में जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े अहम विधेयक को भी सदन में रखा गया है। इसके तहत अब बिहार में सरकार दाखिल-खारिज कराने पर शुल्क वसूलेगेी। अब राज्य में जमीन का दाखिल-खारिज कराने वालों को 200 रुपये देने होंगे। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग लोगों से शुल्क वसूलने का प्रावधान करने जा रही है। सोमवार को इस प्रावधान को लेकर 'बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक 2026 की प्रति सदन में वितरित की गई। प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, दाखिल-खारिज अधिनियम 2011 की धारा 17 के तहत भूमि/भू-खंड के दाखिल-खारिज के लिए प्रत्येक याचिका, अपील के ज्ञापन या पुनरीक्षण से संबंधित आवेदन पर विहित मूल्य का न्यायालय फीस स्टांप चिपकाने का प्रावधान है। लेकिन रैयतों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। विभाग का मानना है कि बिहार एक लोककल्याणकारी राज्य है। राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए राजस्व मं वृद्धि की आवश्यकता है।

बिहार में दूसरे राज्यों के निबंधित डॉक्टर कर सकेंगे प्रैक्टिस

बिहार में अब स्व-प्रमाणन प्रमाणपत्र देकर दूसरे राज्य में निबंधित डॉक्टर एवं नर्स पैक्टिस कर सकेंगे। अब तक पूर्व निबंधन वाले राज्य से अनापति प्रमाण पत्र लेकर फिर से बिहार में निबंधन कराना पड़ता था।, तब ही प्रैक्टिस करने के पात्र हो सकते थे। इस संबंध में सोमवार को बिहार विधानसभा में चिकित्सकों के प्रैक्टिस से संबंधित बिहार चिकित्सा (सशोधन) विधेयक, 2026 एवं नर्सेज, स्वास्थ्य आगंतुक, दाई एवं प्रशिक्षित दाई से संबंधित बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 वितरित किया गया।

निजी विश्वविद्यालयों को मिलेगी अस्थायी संचालन की मंजूरी

बिहार में निजी विश्वविद्यालयों को अस्थायी संचालन की मंजूरी मिलेगी। यूजीसी मानकों के अनुरूप एक शैक्षणिक सत्र तक संचालन की व्यवस्था होगी। हालांकि, इस अवधि में शर्तें पूरी नहीं होने पर अनुमति स्वतः समाप्त हो जाएगी। विधानमंडल के मानसून सत्र के पहले दिन विधानसभा में बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 की प्रति वितरित की गयी। इस संशोधन के जरिये बिहार निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2013 में बदलाव करते हुए निजी विश्वविद्यालयों के औपबंधिक (प्रोविजनल) संचालन का स्पष्ट कानूनी प्रावधान किया गया है। संशोधन के अनुसार यदि कोई प्रायोजक निकाय भवन, आधारभूत संरचना एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में आश्वासन देता है, तो राज्य सरकार उसे एक शैक्षणिक सत्र के लिए औपबंधिक रूप से विश्वविद्यालय संचालित करने की अनुमति दे सकेगी।

सत्र के लिए अध्याशी सदस्य मनोनीत

इधर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विधानमंडल के मानसून सत्र के लिए चार अध्याशी सदस्य मनोनीत किये हैं। इनमें राम नारायण मंडल, श्याम रजक, आलोक मेहता और ज्योति देवी हैं। वहीं, विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने डॉ. संजीव कुमार सिंह, प्रो. नवल किशोर यादव, मदन मोहन झा और महेश्वर सिंह को अध्याशी सदस्य मनोनीत किया।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और बिहार के अन्य जिलों की ताज़ा खबरें और पटना का मौसम हिंदी में जानने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।