बिहार में हड़ताल पर गए 69 राजस्व अफसरों को नोटिस, सरकार ने 13 अप्रैल तक मांगा जवाब

Nishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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Bihar News: संबंधित अधिकारियों पर आरोप है कि 25 मार्च की शाम 5 बजे तक उन सभी ने अपने-अपने पदों पर योगदान नहीं दिया है। यह आचरण न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का भी उल्लंघन है।

बिहार में हड़ताल पर गए 69 राजस्व अफसरों को नोटिस, सरकार ने 13 अप्रैल तक मांगा जवाब

Bihar News: बिहार सरकार ने सामूहिक अवकाश और सरकारी कार्यक्रमों से अनधिकृत अनुपस्थिति पर परीक्ष्यमान (प्रोबेशन) राजस्व अधिकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के उपसचिव संजय कुमार सिंह ने 69वीं बीपीएससी बैच के 69 अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन अधिकारियों के सामूहिक अवकाश अवैध घोषित किया जा चुका है। इस अवधि को सेवा में नहीं गिना जाएगा। संबंधित अधिकारियों पर आरोप है कि 25 मार्च की शाम 5 बजे तक उन सभी ने अपने-अपने पदों पर योगदान नहीं दिया है। यह आचरण न केवल सरकारी आदेशों की अवहेलना है, बल्कि बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 3(1) का भी उल्लंघन है।

ऐसे में संबंधित अधिकारियों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।सख्त चेतावनी देते हुए विभाग ने कहा है कि यदि 13 अप्रैल तक स्पष्टीकरण नहीं मिलता है, तो यह मान लिया जाएगा कि अधिकारियों को इस विषय में कुछ नहीं कहना है और उनके विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई की जाएगी। स्पष्टीकरण मांगने की यह कार्रवाई राज्य के 24 जिलों में तैनात परीक्ष्यमान राजस्व अधिकारियों पर की गई है। इनमें गया में आठ, रोहतास में सात और मधुबनी जिले के पांच राजस्व अधिकारी शामिल हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले बिहार राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ कर दिया था कि जनहित के कार्यों में बाधा डालने वालों के लिए कोई नरमी नहीं बरती जाएगी और एक अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में सख्त प्रशासनिक व्यवस्था लागू होगी। प्रधान सचिव सी.के. अनिल की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि अब किसी भी अंचल को खाली नहीं रहने दिया जाएगा। जो अधिकारी हड़ताल में शामिल नहीं हैं, उन्हें उनके मूल पद के साथ-साथ अन्य रिक्त अंचलों का भी अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा। इनमें अंचलाधिकारी, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, राजस्व अधिकारी एवं कानूनगो होंगे। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि हर अंचल में पदाधिकारी की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित करें।

विभाग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब तक प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दिया गया अंचल का अतिरिक्त प्रभार पर्याप्त नहीं है, क्योंकि उनके पास पहले से ही कई जिम्मेदारियां हैं। इसलिए अब सीधे राजस्व सेवा के कार्यरत अधिकारियों को ही यह जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जिससे दाखिल-खारिज, परिमार्जन, मापी, अतिक्रमण और प्रमाण पत्र जैसे कार्यों में कोई रुकावट न आए।

आदेश में यह भी कहा गया है कि हड़ताल से लौटने वाले अधिकारियों को सदर अंचल एवं अनुमंडल मुख्यालय के अंचलों का प्रभार दिया जाए। जारी पत्र में कहा गया है कि अतिरिक्त प्रभार पाने वाले अधिकारियों को पूर्ण वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे, जिससे वेतन, योजनाओं और अन्य खर्चों में कोई बाधा न आए। साथ ही जिलों में कार्यभार का संतुलन बनाए रखने और नजदीकी अंचलों में ही अतिरिक्त जिम्मेदारी देने का निर्देश भी दिया गया है। इस अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था से पूर्व विभाग ने फरवरी एवं मार्च में निर्गत पत्रों को अवक्रमित करने का निर्देश दिया है। इस नई व्यवस्था से विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब प्रशासनिक कामकाज रुकने नहीं दिया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़े शब्दों में कहा कि जनता का काम रोकने की इजाजत किसी को नहीं है। हड़ताल के नाम पर राजस्व सेवाएं बाधित करना पूरी तरह अस्वीकार्य है।उन्होंने स्पष्ट किया, एक अप्रैल से हर अंचल में काम होगा। जो अधिकारी काम पर नहीं हैं, उनकी जगह कार्यरत अधिकारियों को तुरंत अतिरिक्त प्रभार दिया जाएगा। सरकार के काम रुकेंगे नहीं। जनता का जनादेश काम करने का मिला है हड़ताल का नहीं। काम करने वालों को राज्य में हमेशा सम्मान मिलता रहा है।

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लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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