बिहार के बांका में बनेगा पहला परमाणु बिजली घर, विकास और रोजगार की नई इबारत
सम्राट सरकार की कोशिश है कि जब बिहार में एनडीए सरकार 20 नवंबर को अपना एक साल पूरा करे तो बांका जिले के इस पहले परमाणु बिजली घर का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी से करवाया जाए।

बिहार के लोगों के लिए अच्छी खबर है। राज्य के पहले परमाणु बिजली घर (Nuclear Power Plant) की राह में आ रही बड़ी अड़न अब खत्म हो चुकी है। इस अड़चन को खत्म किया है जल संसाधन विभाग ने। बांका परमाणु बिजली घर के लिए सबसे जरूरी पानी का इंतजाम जल संसाधन विभाग ने कर दिया है। इसे बदुआ जलाशय से हर साल आठ करोड़ घनमीटर (80 एमसीएम-मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी की आपूर्ति होगी। बदुआ से पानी देने का अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करते हुए बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक को जानकारी दे दी गई है। बांका के भितिया ग्राम में एनटीपीसी की ओर से 700 मेगावाट की दो इकाइयों (1400 मेगावाट) का निर्माण होना है। सिंचाई सृजन भागलपुर के मुख्य अभियंता ने बदुआ जलाशय से पानी के उपयोग को लेकर प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा। इसी के आलोक में जल संसाधन विभाग ने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया है।
बिजली घर संचालन के दौरान प्रतिवर्ष 22 एमसीएम रेडिएशन रहित जल फ्लोबैक के रूप में बदुआ जलाशय में वापस प्रवाहित करना होगा। बिजली घर के निर्माण या उपयोग के क्रम में अगर जमीन के अधिग्रहण की आवश्यकता होगी तो उस मद की राशि निर्माण एजेंसी को खर्च करनी होगी। 80 एमसीएम के अलावा अगर बिजली घर को अतिरिक्त पानी की आवश्यकता होगी तो इसके लिए अलग से एनओसी लेनी होगी। जलापूर्ति निर्माण के दौरान संभावित दुर्घटना से बचाव के लिए कार्यकारी विभाग को आवश्यक कदम उठाने होंगे। वेस्ट मैटेरियल भी हटाना होगा। अभियंता प्रमुख (मुख्यालय) ब्रजेश मोहन के अनुसार विभागीय शर्तोँ का उल्लंघन करने पर एनओसी रद्द कर दी जाएगी।
छह महीने में डीपीआर बनेगा
एनटीपीसी ने परियोजना की मंजूरी के लिए एटॉमिक इनर्जी कॉरपोरेशन को प्रस्ताव भेज दिया है। छह महीने में डीपीआर तैयार हो जाएगी। राज्य सरकार का प्रयास है कि 20 नवम्बर को जब एनडीए सरकार के एक साल पूरा हो तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इस परियोजना का भी शिलान्यास करा दिया जाए।
बदुआ जलाशय में आएगा गंगा का पानी
बदुआ जलाशय में उपलब्ध पानी से परमाणु बिजली घर को सालों भर पानी नहीं मिल सकता। इसलिए जल संसाधन विभाग पाइपलाइन के सहारे गंगा के पानी को जलाशय तक लाएगा। इसके लिए सुल्तानगंज में एक इनटेक बनेगा। तारापुर में एक कंट्रोल रूम भी बनेगा।
क्या होंगे फायदे
बांका में प्रस्तावित 700 मेगावाट का परमाणु केंद्र वहां विकास का जो ताना-बाना बुनेगा, बुलंदशहर का नरौरा परमाणु केंद्र इसका उदाहरण है। 1970 के दशक में शुरू हुए इस केंद्र की पहली इकाई ने 1 जनवरी 1991 और दूसरी ने 1 जुलाई 1992 से परिचालन शुरू किया था। इसने समूचे क्षेत्र में ढांचागत विकास और रोजगार की नई इबारत लिखी है।


