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कभी गरजी बंदूकें, कभी बाहुबली ही ‘सरकार’, मोकामा के सियासी अखाड़े की अनंत कथा

कभी गरजी बंदूकें, कभी बाहुबली ही ‘सरकार’, मोकामा के सियासी अखाड़े की अनंत कथा

संक्षेप: पिछले छह चुनावों से लगातार छोटे सरकार यानी अनंत सिंह ही मोकामा की सियासत में छाए हैं। खुद विधायक बने। पत्नी को विधानसभा पहुंचाया। एके-47 और ग्रेनेड रखने के आरोपों में जेल में रहने के बाद कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।

Wed, 24 Sep 2025 01:09 PMNishant Nandan हिन्दुस्तान, प्रिय रंजन शर्मा, पटना
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पटना जिले में यूं तो 14 विधानसभा क्षेत्र हैं, लेकिन इनमें सबसे दिलचस्प चुनावी नजारा मोकामा में देखने को मिलता है। दाल का कटोरा कहे जाने वाले इस टाल क्षेत्र में कभी खूब बंदूकें गरजती थीं। बाहुबली ही यहां के सरकार थे और उन्हीं का हुक्म चलता था। समय के साथ सिस्टम बदला और मोकामा भी विकास की राह पर दौड़ पड़ा। पिछले छह चुनावों से छोटे सरकार यानी अनंत सिंह लगातार मोकामा की सियासत पर छाए हुए हैं। खुद विधायक बने। फिर पत्नी को पहुंचाया। एके-47 और हैंड ग्रेनेड रखने के आरोपों में जेल में रहने के बाद कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है। एक बार फिर अनंत सिंह ने चुनावी मैदान में खुद उतरने का संकेत दिया है।

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मोकामा सीट का सबसे अधिक बार प्रतिनिधित्व करने में कांग्रेस सबसे आगे है। पार्टी ने 1952, 57, 69, 72, 77, 80 और 85 में यहां से जीत दर्ज की थी। जगदीश नारायण सिंह पहले विधायक चुने गए थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री कृष्णा शाही भी दो दफे लगातार विधानसभा में मोकामा से गई थीं।श्याम सुंदर सिंह धीरज ने 1980 और 85 में कांग्रेस को जीत दिलाई थी। बिहार में 1990 में सत्ता का मिजाज बदलने के बाद दोबारा कभी कांग्रेस को यह सीट नसीब नहीं हुई। अनंत के बड़े भाई और पूर्व मंत्री दिलीप सिंह 1990 में जनता दल के टिकट पर जीते और लगातार दो बार विधायक रहे।

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2000 के चुनाव में सूरजभान सिंह ने जेल में रहते हुए दिलीप सिंह को निर्दलीय ही मात दे दी। सूरजभान 2004 में बलिया से लोकसभा जीतकर सांसद बन गए। 2005 के चुनाव में अनंत सिंह ने सीट पर फिर कब्जा जमाया। तब से मोकामा की सियासत उनके परिवार के आसपास सिमटी हुई है। बाहुबल की बदौलत अनंत सिंह जदयू, निर्दलीय और राजद के लिए यहां से जीत चुके हैं। 2022 में आर्म्स एक्ट मामले में सजा के बाद उनकी विधायकी खत्म हुई। उसी वर्ष उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी राजद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरीं और पति की सीट बचाने में कामयाब रहीं।

सूरजभान के परिवार से टक्कर की चर्चा

जदयू के टिकट पर एक बार फिर अनंत सिंह के चुनावी मैदान में उतरने की संभावना है। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बिहार में जदयू के मंत्री अशोक चौधरी के साथ अनंत सिंह की जुगलबंदी भी देखने को मिल रही है। एनडीए से अनंत सिंह की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है पर उनके सामने कौन होगा, इसे लेकर कयासों के बाजार गर्म हैं। माना जा रहा है लोजपा (पारस गुट) से सूरजभान के परिवार से कोई उतार सकता है। ऐसे हुआ तो मोकामा में दिलचस्प लड़ाई होगी।

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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