
Bihar Election: एआई, यूट्यूब, आईटी; टिकट के दावे को दमदार बनाने में हर तरकीब अपना रहे नेताजी
टिकट के दावेदार बायोडाटा बनवाने में न सिर्फ प्रोफेशनल की सेवा ले रहे हैं बल्कि अपने कार्यों का यूट्यूब लिंक भी शामिल कर रहे हैं।
मैं पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हूं। वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहा हूं। अपने नेता की कार्यशैली से प्रभावित होकर जनप्रतिनिधि के रूप में समाज की सेवा करना चाहता हूं। जातीय समीकरण भी मेरे पक्ष में है। प्रतिद्वंद्वी से आगे रहूंगा। मुझे ... सीट से टिकट का अवसर प्रदान किया जाए।

बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों ने कुछ इसी अंदाज में पार्टी टिकट का दावा किया है। भाजपा, जदयू, कांग्रेस, जनसुराज, राजद से लेकर वामदलों तक के दावेदारों की यही कहानी है। इन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का परिचय देने और बायोडाटा को दमदार बनाने में बखूबी एआई और तकनीक का भी इस्तेमाल किया है। मैदान में उतरने की चाहत रखने वाले दावेदारों में पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ताओं के अलावा प्रोफेसर, वकील, डॉक्टर से लेकर आईटी प्रोफेशनल भी हैं। प्रोफेशनल ने एचआर विशेषज्ञों की भी मदद ली है।
भाजपा में सीमांचल क्षेत्र से दावा करने वाले एक दावेदार ने बताया कि राजनीतिक बायोडाटा बनाने में विशेषज्ञ की मदद ली है। खासकर क्षेत्र का समीकरण, राजनीतिक सक्रियता और खुद को दूसरों से कैसे आगे बताएं, इसमें मदद मिली। इसी से मिलती-जुलती कहानी कांग्रेस के पटना साहिब के एक आईटी प्रोफेशनल टिकट दावेदार की है। इन्होंने कांग्रेस के अभियान पर ज्यादा फोकस किया है। इनका कहना है कि अभियान का पर्चा, झंडा बांटकर पार्टी को फीडबैक देना था। इसके साथ इन्होंने लोकेशन बताती तस्वीर, यू ट्यूब लिंक आदि भी ऑनलाइन आवेदन के साथ दिया है।
कनाडा से नौकरी छोड़ भाग्य आजमाने आए
इसी तरह कांग्रेस में दानापुर से टिकट चाह रहे कंप्यूटर इंजीनियर कनाडा से नौकरी छोड़ भाग्य आजमाने आए हैं। इन्होंने भी बायोडाटा में तकनीक का इस्तेमाल किया है। भागलपुर से टिकट चाह रहे एक एचआर प्रोफेशनल, बगहा से टिकट चाह रहे अमेरिका से एमबीए की नौकरी छोड़कर आए दावेदार का बायोडाटा भी तकनीकी रूप से दमदार है।
मिथिला क्षेत्र की एक सीट से दावा करने वाले आईटी प्रोफेशनल ने अपने बायोडाटा और स्क्रीनिंग में समाज सेवा को अब अपना ध्येय बताया है। वहीं, पटना की एक सीट पर दावा करने वाले युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। इन्होंने क्षेत्र में अपनी सक्रियता के साथ ही समीकरण को अपने पक्ष में बताया है।
ऑफलाइन बायोडाटा जमा करने वाले भी खूब
प्रदेश की तीन बड़ी पार्टियां जदयू, भाजपा और राजद में ऑफलाइन आवेदन करने वाले दावेदारों की भी खूब भीड़ पटना में देखी जा रही है। जदयू में पार्टी दफ्तर के अलावा वरिष्ठ नेताओं संजय झा, विजय चौधरी, अशोक चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा आदि के यहां संभावित प्रत्याशियों ने अपने आवेदन जमा कराए हैं। राजद में कई दावेदार लालू प्रसाद के पास जाकर भी फरियाद लगा रहे हैं। तेजस्वी यादव और प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल के यहां भी बायोडाटा जमा करा रहे हैं। वहीं भाजपा में भी दावेदार अपना बायोडाटा लेकर प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल, दोनों उप मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्रियों के यहां जमा करा रहे हैं।
सबूत के लिए यूट्यूब लिंक
कांग्रेस ने आवेदन भी ऑनलाइन मंगाए हैं। इसलिए ज्यादातर को एक फार्मेट में भरकर आवेदन करना था। तीन हजार ऑनलाइन और एक हजार ऑफलाइन आवेदन आए थे। ऑफलाइन आए आवेदनों को अब ऑनलाइन किया जा रहा है। इसमें आवेदकों ने अपनी सक्रियता का सबूत देने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया है। लोकेशन के साथ तस्वीर, लिंक, यूट्यूब लिंक दिया है। कई ने अपने पक्ष में जनता की बाइट का भी लिंक दिया है।
भाजपा : दावेदारों को प्रभावित कर रही मोदी की कार्यशैली
भाजपा के दावेदारों ने खुद को पार्टी का समर्पित सिपाही और मोदी की कार्यशैली से प्रभावित बताया है। पार्टी के जनप्रतिनिधि के रूप में समाज सेवा की इच्छा जताई है। भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाले नेताओं-कार्यकर्ताओं के बायोडाटा में उक्त बातें कॉमन रूप से देखने को मिली हैं। बायोडाटा में अपने को 20-25 सालों से पार्टी से जुड़े रहने की बात कर हैं। वहीं, पार्टी के किसी पद पर रहे हैं तो इसकी जानकारी भी वह दे रहे हैं। ग्राम पंचायत और नगर निकाय चुनाव में विभिन्न पदों पर जीत दर्ज करने वाले भी भी बड़ी संख्या में हैं, जो अब विधायक बनने के लिए पार्टी का टिकट मांग रहे हैं।
विरासत का जिक्र भी कर रहे नेतापुत्र
भाजपा, जदयू, कांग्रेस सहित सभी दलों में यूथ विंग के कार्यकर्ताओं के साथ टिकट की कतार में कई नेतापुत्र भी हैं। इन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत का जिक्र भी बायोडाटा में किया है। बायोडाटा को भारी-भरकम बनाने के लिए अपने परिवार की ओर से पार्टी को दिये गए योगदान की चर्चा भी इन्होंने की है। कांग्रेस के करीब 4000 आवेदकों में 60 फीसदी युवा हैं। यानी नई पीढ़ी पुराने को जमकर टक्कर दे रही है। इनकी उम्र 30 से 50 के बीच है।
पूर्व सांसद से लेकर प्रोफेसर तक
कांग्रेस के दावेदारों में पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री से लेकर पुलिस पदाधिकारी, प्रोफेसर, वकील, डॉक्टर, आईटी प्रोफेशनल, ठेकेदार आदि शामिल हैं। बड़ी तादाद में व्यवसायी भी हैं। राहुल गांधी की यात्रा से उत्साहित पुराने कांग्रेसी भी किस्मत आजमाने की फिराक में हैं। वोटर अधिकार यात्रा के उत्साह को वे अपने लिए अवसर भी मान रहे हैं। तिरहुत क्षेत्र के एक पूर्व सांसद, हाल ही में पार्टी ज्वाइन किए एक पूर्व पुलिस पदाधिकारी, मगध क्षेत्र से स्थानीय निकाय के पदाधिकारी आवेदकों में शामिल हैं।
कांग्रेस में मिथिला, सीमांचल और मगध क्षेत्र की सीट पर टिकट की मारामारी अधिक है। स्वाभाविक है युवा प्रोफेशनल भी इन्हीं क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतरने को अधिक इच्छुक हैं। पुराने नेताओं ने पार्टी की मजबूत मानी जाने वाली सीटों के लिए ही ज्यादा आवेदन किया है, जबकि युवाओं ने नई सीट पर भी आवेदन दिया है। सबसे ज्यादा आवेदन भी गयाजी, लखीसराय जैसी सीटों पर आए हैं।



