बिहार में सााइबर फ्रॉड का चीन से कनेक्शन, देश की आंतरिक सुरक्षा को भी खतरा

Feb 11, 2026 07:07 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान, सुमित, पटना
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जांच में पता चला है कि मंदीप का काठमांडु के जॉय नामक व्यक्ति से अक्टूबर 2025 में संपर्क हुआ था। इसके बाद उसने नेपाल नंबर की गाड़ी से उसी माह मधुबनी स्थित घर पर ट्रॉली बॉक्स में सिम बॉक्स की डिलेवरी दी।

बिहार में सााइबर फ्रॉड का चीन से कनेक्शन, देश की आंतरिक सुरक्षा को भी खतरा

बिहार के मधुबनी में बरामद सात सिम बॉक्स मामले में सुरक्षा व जांच एजेंसियों को बड़ी जानकारी हाथ लगी है। जांच में पता लगा है कि बिहार में इन सिम बॉक्स को चीन में बैठे साइबर अपराधी नियंत्रित कर रहे थे। इनको गिरफ्तार मंदीप के बरामद लैपटॉप से कंट्रोल किया जा रहा था। बिहार पुलिस ने देश की आंतरिक सुरक्षा के खतरे से जुड़े इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को कांड की जानकारी दी है।

मधुबनी साइबर थाने में दर्ज इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस के साथ ही साइबर सुरक्षा इकाई भी कर रही है। जांच में पता चला है कि मंदीप का काठमांडु के जॉय नामक व्यक्ति से अक्टूबर 2025 में संपर्क हुआ था। इसके बाद उसने नेपाल नंबर की गाड़ी से उसी माह मधुबनी स्थित घर पर ट्रॉली बॉक्स में सिम बॉक्स की डिलेवरी दी। मंदीप ने पूछताछ में बताया कि सिम बॉक्स का यह गिरोह नेपाल और चीन दोनों जगह से संचालित होता है।

पूछताछ में पता चला है कि सिम बॉक्स की देखरेख, मेंटेनेंस व सिम आदि के लिए मंदीप को हर महीने करीब सवा लाख रुपये मिलते थे। यह रकम यूएस डॉलर में बिनांस वॉलेट के माध्यम से दी जाती थी। यह रुपये नेपाली करेंसी में मिलते थे, जिसे बाद में भारतीय रुपये में बदलकर घर लाता था।

200 रुपये में पहचान पत्र लेकर निर्गत कराए सिम

जांच एजेंसियों के मुताबिक सिम बॉक्स में लगाने के लिए सिम की व्यवस्था प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) के माध्यम से की जाती थी। इसके लिए पीओएस एजेंट को 800 रुपये प्रति सिम का भुगतान किया जाता था। अधिकतर सिम गांव के गरीब लोगों को 200-200 रुपये का लालच देकर उनके पहचान पत्र पर निर्गत कराये गये थे।

ऐसे काम करता है सिम बॉक्स

सिम बॉक्स एक आयताकार इलेक्ट्रिक उपकरण है, जो समानांतर अवैध टेलीकॉम एक्सचेंज के रूप में काम करता है। आकार के हिसाब से प्रत्येक सिम बॉक्स में 11 से लेकर 72 सिम लगाये जा सकते हैं। इसके द्वारा अंतरराष्ट्रीय वीओआईपी (वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल) कॉल को लोकल वॉइस कॉल में परिवर्तित कर दिया जाता है। सिम बॉक्स के उपयोग से वीओआईपी कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान छिपी रहती है और उसे ट्रेस कर पाना काफी कठिन हो जाता है।

Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें