Bihar Chunav: कभी 62 पार नहीं करने वाला कोसी इस बार 67 क्रॉस, इस उफान की 3 वजह जानिए
Bihar Chunav: मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया जिला का मतदान प्रतिशत पिछले दो चुनावों में 62 प्रतिशत के पार नहीं गया था। इस बार पांच प्रतिशत के उफान के साथ 67 प्रतिशत को पार कर गया है। पांच प्रतिशत का यह फासला साधारण नहीं है।
Bihar Chunav: कोसी शांत नहीं रहती। उफनाती है। और तब बहुत कुछ कर जाती है। इस बार कोसी के मतदाता उफनाए हैं। मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया जिला का मतदान प्रतिशत पिछले दो चुनावों में 62 प्रतिशत के पार नहीं गया था। इस बार पांच प्रतिशत के उफान के साथ 67 प्रतिशत को पार कर गया है।

पांच प्रतिशत का यह फासला साधारण नहीं है। कुल 38.23 लाख वोटरों वाले तीनों जिलों में पिछले चुनावों के मुकाबले 1.90 लाख अतिरिक्त वोट पड़े हैं। 12 विधानसभा में डेढ़ लाख। औसतन, प्रति सीट 15000 वोट ज्यादा। चुनावी गणित को समझने वाले जानते हैं कि इतने वोट परिणाम इधर से उधर कर सकते हैं।
मायने क्या हैं इस उफान के
इसकी वजह तीन हो सकती हैं। पहली, ब्रेक के बाद 2017 से लगातार एनडीए बिहार में शासन में है। 2020 के चुनाव में जदयू-भाजपा के मुकाबले राजद-कांग्रेस की टक्कर हुई थी। मामूली अंतर से महागठबंधन चूकी। नीतीश सीएम बने। इस बार एनडीए का कुनबा बड़ा हुआ है। 2020 में कई सीटों पर हार दिलाने वाले चिराग पासवान 2025 में एनडीए के साथ हैं। संभव है पांच प्रतिशत के उछाल की वजहों में से एक चिराग का साथ होना रहा हो।
दूसरी वजह
चुनावी शोर के लिए समय इस बार भले ही कम मिला हो, एनडीए और महागठबंधन के बीच घमासान अच्छा मचा। आचार संहिता लागू होने के 30वें दिन पहले चरण का मतदान हो गया। बावजूद इसके, इधर से जंगलराज का भरपूर डर दिखाया गया तो उधर से भ्रष्टाचार राज के नारे लगाए गए। डबल इंजन पर तमाम तोहमतें लादी गईं। तो क्या मतदाताओं ने पूरे मन से इधर या उधर को बुलंद कर देने का इरादा कर लिया। यानी, सरकार जिसकी भी बनेगी अच्छे बहुमत से बनेगी।
तीसरी वजह
जनसुराज के नारों ने इस चुनाव में बहुत कुछ बदला। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उनके आवाज उठाने पर सरकार ने समाज कल्याण की राशि बढ़ाई है। राजद ने बढ़ी हुई राशि से भी ज्यादा राशि देने का वादा कर दिया। पढ़ाई, कमाई, दवाई, सिंचाई का नारा तेजस्वी देते आ रहे हैं। आज पीएम ने भी लगभग यही नारा दिया। जनसुराज ने पलायन को मुद्दा बनाया। एनडीए के नेता बिहार में उद्योगों की झड़ी लगाने की बातें कर रहे हैं। तो क्या, बच्चों के भविष्य के नाम पर वोटर उमड़ पड़े। वजह इन तीनों में से ही एक है।





