
कहलगांव, सुल्तानगंज, गोपालपुर में फंसा मुकाबला; टिकट की नाराजगी चुनावी मैदान में उतरी
Bihar Chunav 2025: भागलपुर जिले की कहलगांव, सुल्तानगंज और गोपालपुर जैसी सीटों पर टिकट की नाराजगी के चलते एनडीए और महागठबंधन के दलों की परेशानी बढ़ा दी है। इन सीटों पर चुनावी मुकाबला फंसा हुआ नजर आ रहा है।
Bihar Chunav 2025: पार्टी नाराज हुई तो विधायक बेटिकट हो गए। बेटिकट विधायक नाराज हुए तो पार्टी छोड़ दी या बागी हो गए। कैंडिडेट बदले तो गठबंधन के सहयोगी दल नाराज हो गए। कुछ सहयोगी दल इतने नाराज हुए कि गठबंधन धर्म भूल गए। भागलपुर प्रमंडल में दर्जन भर सीटें हैं। भागलपुर की सात एवं बांका जिले की पांच। इनमें कुल 6 विधायक बेटिकट हुए। हर तरफ नाराजगी का आलम है। कहलगांव और सुल्तानगंज में राजद और कांग्रेस की आपसी नाराजगी ऐसी कि दोनों ने अधिकृत उम्मीदवार दे दिए। गोपालपुर में बागी गोपाल मंडल जदयू की परेशानी बढ़ा रहे हैं। हर जगह दलों की चिंता यह है कि इन हालातों में कहीं मतदाता ना अपनी नाराजगी दिखा दें।

भागलपुर विधानसभा क्षेत्र में लड़ाई पिछले चुनाव वाली दोहराई जा रही है। कांग्रेस से विधायक अजीत शर्मा और भाजपा से रोहित पांडेय। पिछली बार रोहित पांडेय मामूली अंतर से हारे थे। कारण लोजपा प्रत्याशी राजेश वर्मा को बताया गया। राजेश वर्मा अभी खगड़िया से सांसद हैं। रोहित पांडेय के साथ हैं। एनडीए में नाराजगी की लहर शांत करने के लिए अमित शाह तक को हस्तक्षेप करना पड़ा। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के बेटे अर्जित चौबे और पार्टी प्रवक्ता प्रीति शेखर ने बगावत के इरादे छोड़ दिए।
वहीं, अजीत शर्मा को शत प्रतिशत मुस्लिम वोट मिलने का यकीन है। जन सुराज पार्टी से उम्मीदवार अधिवक्ता अभयकांत झा पर कांग्रेस-भाजपा दोनों की नजर है। इनको वोट देने वाले लोग, किसके खाते में सेंध लगाएंगे। दक्षिणी क्षेत्र में इस बात की चर्चा हो रही है। कहते हैं कि दक्षिणी क्षेत्र इस बार सहानुभूति के आधार पर वोट करने जा रहा है। अजीत शर्मा सतर्क हैं। वह अपनी जाति को गोलबंद करने में लगे हैं। यहां बाजार का वोट अंतिम फैसला करेगा।
कहलगांव में फंसा पेंच
भागलपुर में एनएच-80 पर गोल सराय चौक, घोघा। यहां 3 विधानसभा क्षेत्रों का संगम है। घोघा-सन्हौला सड़क के एक तरफ कहलगांव तो दूसरी तरफ पीरपैंती विधानसभा क्षेत्र। एनएच के उस पार नाथनगर। इसी चौक पर है भागलपुर सांसद अजय मंडल का घर। ये अपनी पार्टी से नाराज हैं। इतने कि मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस्तीफे की पेशकश कर दी।
यहां गृह निर्माण सामग्री के विक्रेता दिलीप सिंह कहते हैं- कहलगांव में तो सांसद के भाई अनुज मंडल भी निर्दलीय खड़े हैं। यह भी नाराजगी की ही नेमत है। नाराज विधायक पवन यादव भी निर्दलीय मैदान में हैं। राजद से झारखंड में मंत्री संजय यादव के पुत्र रजनीश भारती मैदान में हैं और कांग्रेस से प्रवीण कुशवाहा। दोनों में से एक मैदान से हट जाएं, इसकी कोशिश आखिर तक हुई। गठबंधन धर्म के विपरीत दोनों डटे रहे।
जदयू ने यह सीट भाजपा से ली और स्व. सदानंद सिंह के पुत्र शुभानंद मुकेश को सिंबल दिया। पिछली बार हार गए थे। इस बार पूरा जोर मार रहे हैं। जनसुराज के मंजर आलम भी जाना-पहचाना चेहरा हैं। यहां वोटों की मार-काट मचेगी, ऐसा वोटर मानते हैं।
सुल्तानगंज: जदयू के खिलाफ राजद-कांग्रेस प्रत्याशी
बाबा नगरी सुल्तानगंज में जदयू विधायक ललित मंडल फिर मैदान में हैं। राजद ने चंदन कुमार और कांग्रेस ने ललन कुमार को उतारा है। लालटेन लेकर निकले चंदन कुमार ने सबको चेहरा दिखा दिया है। ललित मंडल कोर वोटरों के भरोसे हैं। नाथनगर में राजद विधायक सिद्दकी बेटिकट हो गए। पार्टी इनसे नाराज थी शायद। मैदान में दो नए चेहरे हैं। राजद से पूर्व अधिकारी शेख जेड हसन व लोजपा (रा) से जिप अध्यक्ष मिथुन कुमार।
मिथुन आखिरी वक्त में टिकट लेकर आ गए। लोजपा-आर से नाम तो किसी और का चल रहा था। टिकट का चिराग किसी और के हाथ लगा। आमने-सामने की लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने के लिए जनसुराज, एआईएमआईएम तत्पर है।
त्रिकोण बन गया है गोपालपुर का मुकाबला
नाराज गोपालपुर विधायक गोपाल मंडल की पटना में धरने से भी बात नहीं बनी तो निर्दलीय मैदान में आ गए। जदयू ने इस बार पूर्व सांसद बुलो मंडल को टिकट दिया है, जो लोस चुनाव से ठीक पहले राजद छोड़ आए थे। महागठबंधन से वीआईपी के प्रेम सागर उर्फ डब्लू यादव बुलो मंडल के सामने हैं। त्रिकोण बन गया है। राजनीति के धुरंधर बुलो मंडल और गोपाल मंडल के सामने नवेले डब्लू यादव को महागठबंधन के कोर वोट की आस है। साथ ही उधर के कोर वोट में बंटवारे से भी बड़ी उम्मीद है।
बिहपुर में भी उलझा है मामला
बिहपुर विधानसभा में भाजपा विधायक ई. शैलेंद्र फिर पर पार्टी ने भरोसा जताया है। इन्हें टक्कर दे रही हैं वीआईपी की अर्पणा कुमारी और जनसुराज के पवन चौधरी। अर्पणा जदयू नेत्री थीं। वहां बात न बनी तो वीआईपी से सिंबल मिल गया। इन्हें टिकट न मिलने के कारण ही जदयू सांसद नाराज हुए थे। यहां मामला उलझा हुआ है। इंजीनियर साहब सारे पैंतरे आजमा रहे हैं। गुरुवार को प्रधानमंत्री के मंच पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह इनके लिए पंचायत लगाते दिखे थे। मामला आमने-सामने का बना तो इंजीनियर साहब, वरना कोई और।
पीरपैंती: आखिरी लड़ाई आमने-सामने की
पीरपैंती (सुरक्षित) सीट के निवर्तमान विधायक ललन पासवान इतने नाराज हुए कि टिकट कटने की सूचना मिलते ही पार्टी छोड़ दी। राजद के हो गए। पार्टी ने मुरारी पासवान को मौका दिया है। इनके मुकाबले राजद के राम विलास पासवान हैं। जनसुराज के घनश्याम दास भी मैदान में हैं। ललन ने तेवर तल्ख रखे तो राजद को फायदा पहुंचाएंगे। यहां बसपा एवं आप ने भी प्रत्याशी दिए हैं। इनको चाहे जितने कम वोट मिले, राजद के हिस्से से कटेंगे। एनएच-80 के किनारे व झारखंड की सरहद से लगते पीरपैंती में आखिरी लड़ाई आमने-सामने की है।
(भागलपुर से भवेशचंद की रिपोर्ट)



