दूसरों का करते हैं कल्याण, खुद बैठने की जगह नहीं; बिहार के बीपीएससी पास BWO का छलका दर्द
बिहार में एससी-एसटी के कल्याण के लिए कार्य करने वाले कल्याण पदाधिकारियों की समस्या बड़ी है। राज्य के 534 प्रखंडों में से कहीं भी इनका स्थायी ठौर नहीं है।

कौशलेन्द्र मिश्रा, पटना
बिहार में प्रखंड स्तर पर तैनात ऐसे भी पदाधिकारी है, जिन्हें एक अदद दफ्तर, कुर्सी, स्टाफ और वाहन सुविधा भी नहीं मिली है। 2007 में कल्याण विभाग विभक्त हुआ। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी ) कल्याण विभाग का अलग से गठन हुआ। किंतु, एससी-एसटी के कल्याण के लिए कार्य करने वाले कल्याण पदाधिकारियों की सुधि 19 साल में नहीं ली गई। राज्य के 534 प्रखंडों में से कहीं भी इनका स्थायी ठौर नहीं है।
वर्तमान में राज्य में प्रखंड कल्याण पदाधिकारी के कुल 517 पद स्वीकृत हैं। इनमें 138 प्रखंड कल्याण पदाधिकारी दो वर्षीय प्रशिक्षण में शामिल हैं जबकि 17 प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों के पद रिक्त हैं। शेष प्रखंडों में कार्यरत 362 पदाधिकारियों को हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
दूसरों के कमरे में बैठने की मजबूरी
प्रखंड कार्यालय में बीडीओ, प्रखंड पंचायतीराज पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारियों व कर्मियों के लिए कार्यालय कक्ष है किंतु कल्याण पदाधिकारी डयूटी के दौरान दूसरों के कमरों में बैठकर किसी तरह समय व्यतीत करते हैं। किशनगंज में तैनात कल्याण पदाधिकारी नमिता कहती हैं कि महिला पदाधिकारियों के लिए सबसे अधिक परेशानी है। कई बार बीडीओ के कार्यालय कक्ष में जारी बैठक के बीच उनके वॉशरूम का उपयोग करना पड़ता है। दूसरे पदाधिकारी के कमरे में कोई कितनी देर तक बैठ सकता है। कार्य मे लापरवाही को लेकर हर पल कार्यवाही का डर रहता है। दलितों की बस्ती में अगलगी हो या विकास मित्र के कार्यों का निरीक्षण कार्य, कोई अतिरिक्त भत्ता या साधन नहीं मिलता।
मंत्री क्या कहते हैं?
एससी-एसटी कल्याण सेवा संवर्ग के पदाधिकारियों की कठिनाइयों से अवगत हूं। विकास मित्र व प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों ने मिल कर जमीनी स्तर पर योजनाओं को पहुंचाया है। इनकी समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा। -लखेंद्र कुमार रौशन, मंत्री।
इनके जिम्मे ये दायित्व
● एससी-एसटी के कल्याण के लिए कल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन
● एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुआवजा भुगतान में पीड़ितों की मदद करना
● विकास मित्रों के कार्यों का नियंत्रण एवं मूल्यांकन
● राज्य के बाहर के महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों की छात्रवृत्ति की जांच
● एससी-एसटी से जुड़े मामलों में जांच एवं रिपोर्ट देना
● एससी-एसटी आवासीय विद्यालय एवं छात्रावासों के प्रबंधक का कार्य
बीपीएससी से होती है बहाली
● बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर प्रखंड कल्याण पदाधिकारी की नियुक्ति की जाती है।
● बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण सेवा संवर्ग में स्वीकृत पद 632 है। कार्यरत 450 हैं।
● 388 कल्याण पदाधिकारियों पर विभिन्न मामलों में कार्यवाही बिना सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के संचालित हैं।
● बिना कार्रवाई पूरी किए 20 जिला कल्याण अधिकारी को पदावनत करके प्रखंड कल्याण पदाधिकारी बनाया।


