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टीवी चैनल देखकर बेचैन नहीं होना है, आगे-पीछे वाले असली नंबर सुबह 9 बजे के बाद ही आएंगे

टीवी चैनल देखकर बेचैन नहीं होना है, आगे-पीछे वाले असली नंबर सुबह 9 बजे के बाद ही आएंगे

संक्षेप: Bihar Election Results Counting Process: बिहार के चुनाव नतीजों से पहले मतगणना नियमों और उसकी प्रक्रिया बताते हुए चुनाव आयोग ने कहा है कि ईवीएम मतों की गिनती सुबह 8.30 बजे से शुरू होगी। सुबह 8 बजे से पोस्टल बैलट गिने जाते हैं।

Fri, 14 Nov 2025 06:50 AMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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Bihar Election Results Counting Process: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों से पहले मतगणना प्रक्रिया जारी करते हुए चुनाव आयोग ने लोगों को याद दिलाया है कि ईवीएम के वोटों की गिनती सुबह 8.30 बजे से शुरू होती है। सुबह 8 बजे पोस्टल बैलट की गिनती से काउंटिंग शुरू होती है। नतीजों के दिन टीआरपी के चक्कर में कई टीवी चैनल सुबह 8.10 के बाद ही पार्टी और गठबंधन के आगे-पीछे के फर्जी नंबर दिखाने लगते हैं। 8.30 बजते-बजते यह नंबर कई बार 100 सीटों का आंकड़ा पार कार जाता है, जबकि उस समय चुनाव अधिकारी बैलट गिन रहे होते हैं या उसके नंबर फाइनल कर रहे होते हैं।

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तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने 2024 में कहा था कि ईवीएम के मतों की गिनती का पहला नंबर 9 बजे से पहले नहीं आ सकता, क्योंकि वो 8.30 बजे से शुरू होती है और कम से कम 20-25 समय एक राउंड में लगता है। राजीव कुमार ने तब बताया था कि मतगणना स्थल पर लगभग 9 बजे तक पहले राउंड की गिनती का नंबर घोषित होता है। उससे पहले किसी के आगे-पीछे होने का नंबर बताना बकवास है। उन्होंने कहा था कि आयोग की वेबसाइट पर पहले राउंड की गिनती के नंबर सुबह 9.30 बजे अपडेट किए जाते हैं।

तो यह मन में बिठा लीजिए कि टीवी चैनलों पर या किसी भी प्लेटफॉर्म पर सुबह 9 बजे से पहले के सारे नंबर मनगढ़ंत हैं। राजीव कुमार ने तो यह भी कह दिया था कि एग्जिट पोल के नंबर को सही ठहराने के लिए सुबह में एक घंटे तक इस तरह से माहौल बनाया जाता है और जब असली रिजल्ट आने लगते हैं तो कई बार लोगों को झटका लगता है कि अरे ये अचानक क्या हो रहा है।

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मतगणना में सुबह 8 बजे पोस्टल बैलट की गिनती होती है

चुनाव आयोग ने बताया है कि मतगणना की प्रक्रिया सुबह 8 बजे शुरू होगी। सबसे पहले डाक से आए मतपत्रों (पोस्टल बैलट) की गिनती होगी। सेना, सुरक्षा बल और विभिन सरकारी सेवाओं में ड्यूटी के कारण मतदान नहीं कर पाने वाले वोटरों को यह सुविधा मिलती है। पोस्टल बैलट की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हो जाती है। ईवीएम के मतों की गिनती सुबह 8.30 बजे शुरू होती है। इन मतपत्रों की गिनती रिटर्निंग अफसर (RO) या सहायक रिटर्निंग अफसर (ARO) करते हैं।

ईवीएम के वोट के आखिरी राउंड की गिनती से पहले पोस्टल बैलट की गिनती खत्म होना जरूरी है। अगर तब तक पोस्टल बैलट की गिनती चल ही रही हो तो आखिरी राउंड की ईवीएम के वोट की गिनती तब तक रोक दी जाती है, जब तक कि बैलट पूरी तरह ना गिन लिए जाएं। मतपत्रों की गणना के लिए अलग से टेबुल होता है, जहां कैंडिडेट के काउंटिंग एजेंट भी मौजूद रह सकते हैं।

कैसे होती है काउटिंग कर्मचारियों की तैनाती?

मतगणना में शामिल कर्मचारियों की तैनाती रैंडम तरीके से तीन चरणों में होती है। पहले चरण में काउंटिंग से एक सप्ताह पहले कर्मचारियों को मतगणना में उनके पद की जानकारी मात्र दी जाती है। दूसरे चरण में मतगणना से 24 घंटे पहले उनका विधानसभा क्षेत्र बताया जाता है। आखिरी और तीसरे चरण में मतगणना की सुबह 5 बजे उन्हें उनका टेबल नंबर बताया जाता है।

ईवीएम के वोट की गिनती की क्या प्रक्रिया है

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के मतों की गिनती सुबह 8.30 बजे शुरू होती है। इसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र के लिए 14 प्लस 1 कुल 15 टेबल लगाए जाते हैं। 14 टेबल पर ईवीएम के वोट गिने जाते हैं और 15वें टेबल पर सहायक रिटर्निंग अफसर बैठकर मतगणना करवाता है। गिनती के हर टेबल पर एक काउंटिंग सुपरवाइजर, एक काउंटिंग सहायक और माइक्रो ऑब्जर्वर होता है। चुनाव लड़ रहे हर कैंडिडेट को यह अधिकार है कि वो हर टेबल पर अपनी तरफ से एक-एक काउंटिंग एजेंट की नियुक्ति करे।

कैंडिडेट के काउंटिंग एजेंट की मौजूदगी में होती है पूरी मतगणना

ईवीएम के मतों की गिनती के दौरान हर राउंड के लिए मशीन टेबल पर लाए जाते हैं। कैंडिडेट के काउंटिंग एजेंट को उस समय यह देखना होता है कि सील टूटी तो नहीं है और ईवीएम मशीन का नंबर वही है जो उस मशीन वाले बूथ के फॉर्म 17 सी में भरा हुआ है। मतदान के दिन वोटिंग खत्म होने के बाद कैंडिडेट के पोलिंग एजेंट को चुनाव अधिकारी यह फॉर्म देते हैं, जिसमें मशीन नंबर, कितना वोट हुआ जैसी जानकारी दर्ज होती है। ईवीएम में दर्ज मतों की संख्या को फॉर्म 17 सी से मिलाया जाता है। अगर दोनों संख्या में अंतर हो तो उस बूथ की वीवीपैट पर्ची को हर हाल में गिना जाता है।

अंत में पांच रैंडम बूथ के ईवीएम और वीवीपैट पर्ची का मिलान भी होता है

जब एक विधानसभा के सारे बूथ के ईवीएम गिन लिए जाते हैं तो रैंडम तरीके से उस सीट के पांच बूथ चुनकर ईवीएम और वीवीपैट की पर्चा का मिलान किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कैंडिडेट या उनके एजेंट मौजूद रहते हैं या रह सकते हैं। चुनाव आयोग की साइट पर हर राउंड की गिनती के बाद चक्रवार गणना के नंबर अपडेट किए जाते हैं।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा लगभग ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। बिहार में दैनिक जागरण से करियर की शुरुआत करने के बाद दिल्ली-एनसीआर में विराट वैभव, दैनिक भास्कर, आज समाज, बीबीसी हिन्दी, स्टार न्यूज, सहारा समय और इंडिया न्यूज के लिए अलग-अलग भूमिका में काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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