
बिहार की इन 6 सीटों पर जो जीतता था, सरकार भी उसकी होती है, इस बार का रिजल्ट जानिए
संक्षेप: Bihar Assembly Result: बिहार में कुछ ऐसी विधानसभा सीटें हैं जो राज्य के मिजाज और सियासी बयार को सटीकता से पकड़ने में मात नहीं खाती। पिछले कुछ चुनावों से इन सीटों से जो भी पार्टी जीतती है, सरकार भी उनकी ही या उनके गठबंधन की बनती है।
Bihar Assembly Elections Result Live: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने जबरदस्त जीत हासिल की है। 243 सीटों के लिए 2 चरणों में वोट डाले गए थे। एग्जिट पोल्स में तो फिर से एनडीए सरकार की भविष्यवाणी की ही गई थी लेकिन असल नतीजों में उसकी जीत और भी प्रचंड है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन की बदलाव की बयार वाली आस पूरी नहीं हो सकी। वैसे बिहार में 6 ऐसी खास सीटें हैं जो राज्य के मिजाज और सियासी बयार को सटीकता से पकड़ने में मात नहीं खाती। पिछले कुछ चुनावों से इन सीटों से जो भी पार्टी जीतती है, सरकार भी उनकी ही या उनके गठबंधन की बनती है। आइए देखते हैं इस मामले में इन सीटों का 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट इस बार भी बरकरार रहा या नहीं।

सकरा विधानसभा सीट, मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर की सकरा विधानसभा सीट पर पिछले कई चुनाव से ऐसा होता आ रहा है कि यहां से जिस गठबंधन का उम्मीदवार जीतता है, राज्य में उसी की सरकार बनती है। ये सिलसिला 1977 से ही चला आ रहा है। पिछले 48 साल में सिर्फ एक चुनाव अपवाद रहा था। 1985 में यहां से लोकदल के शिवनंदन पासवान ने जीत हासिल की थी लेकिन सरकार बनी थी कांग्रेस की। 1985 के बाद से यहां जो भी पार्टी जीती है, राज्य में वही सत्ता में आई है। पिछले चुनाव में यहां से जेडीयू ने जीत हासिल की थी। इस बार भी वो संयोग बरकरार है। 2025 में जेडीयू के आदित्य कुमार ने कांग्रेस के उमेश कुमार राम को 15050 वोट के अंतर से शिकस्त दी है।
केवटी विधानसभा सीट, मधुबनी
मिथिलांचल में स्थित इस सीट के वोटर बिहार के जनादेश को सबसे सटीक तरीके से भांपते रहे हैं। मधुबनी की केवटी विधानसभा सीट के वोटर 1977 से अभी तक एक बार भी राज्य का मूड भांप पाने में गच्चा नहीं खाए हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ। 1977 में केवटी से जनता पार्टी जीती तो राज्य में भी उसी की सरकार बनी। 1980 और 1985 में कांग्रेस जीती तो सत्ता के सिंहासन पर भी वही बैठी। जब यहां से जनता दल का उम्मीदवार जीता तो उसकी सरकार बनी। आरजेडी जीती तो उसकी सरकार बनी। 2005 और 2010 में बीजेपी जीती तो एनडीए की सरकार बनी। 2015 में आरजेडी ने यहां परचम लहराया तो राज्य में भी महागठबंधन की सरकार बनी। पिछली बार यहां से बीजेपी जीती और एनडीए की फिर सरकार बनी। इस बार भी यहां से कमल खिला है। बीजेपी के मुरारी मोहन झा ने आरजेडी के फराज फातमी को 7305 वोट के अंतर से शिकस्त दी है।
मुंगेर विधानसभा सीट
मुंगेर विधानसभा सीट भी उन सीटों में है जहां जो पार्टी जीतती है, राज्य में उसी की सरकार बनती है। इस बार भी यह संयोग बरकरार है। सिर्फ 1985 में ऐसा नहीं हुआ था जब लोकदल का उम्मीदवार यहां से जीता था लेकिन राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी। पिछली बार यहां से बीजेपी के प्रणय कुमार यादव ने जीत हासिल की थी। इस बार भी मुंगेर से बीजेपी ने जीत दर्ज की है। यहां से उसके उम्मीदवार कुमार प्रणय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आरजेडी के अविनाश कुमार विद्यार्थी को 8750 मतों के अंतर से हराया है।
पिपरा विधानसभा सीट, पूर्वी चंपारण
पूर्वी चंपारण स्थित पिपरा विधानसभा सीट से भी पिछले कई चुनावों से जो पार्टी जीतती है, सरकार भी लगभग उसी की बनती है। इस मामले में 2015 का चुनाव अपवाद रहा था। तब बीजेपी के श्यामबाबू प्रसाद यादव ने जीत हासिल की थी लेकिन सरकार बनी थी महागठबंधन की। तब नीतीश कुमार ने पाला बदला था और जेडीयू ने आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। सूबे में पिपरा नाम से दो विधानसभा सीटें हैं लेकिन पूर्वी चंपारण जिले स्थित इस सीट का नंबर 17 है। इस बार भी पिपरा विधानसभा सीट से बीजेपी के श्यामबाबू प्रसाद यादव ने जीत हासिल की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सीपीएम के राजमंगल प्रसाद को 10745 वोट के अंतर से हराया है।
बरबीघा विधानसभा सीट, नवादा
नवादा की बरबीघा विधानसभा सीट पर भी 1977 से यह चला आ रहा है कि जिस पार्टी ने यहां से जीत हासिल की, सरकार उसी की या उसके गठबंधन की बनी। इस बार भी यही हुआ है। इस बार के विधानसभा चुनाव में बरबीघा से जेडीयू के डॉक्टर कुमार पुष्पांजय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के त्रिशूलधारी सिंह को 25493 वोट के अंतर से हराया है।
2015 में यहां से कांग्रेस के सुदर्शन कुमार ने जीत हासिल की और महागठबंधन की सरकार बनी थी। 2020 में भी सुदर्शन कुमार जीते लेकिन सरकार बनी एनडीए की। तब कुमार ने पाला बदलकर जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी।
सहरसा विधानसभा सीट पर इस बार टूट गया सिलसिला
सहरसा सीट के वोटर भी बिहार के सियासी मिजाज को पिछले कई चुनाव से पूरी तरह भांपते रहे थे लेकिन इस बार लगता है वे थोड़ा सा गच्चा खा गए। इंडियन इन्क्लुसिव पार्टी के इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने 2038 वोट से जीत हासिल की है। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार आलोक रंजन को शिकस्त दी। गुप्ता को 115036 वोट मिले जबकि आलोक रंजन को 112998 वोट मिले।





