जमीन की हकीकत से मेल नहीं खाता, बिहार चुनाव के नतीजे पर माले प्रमुख दीपांकर भट्टाचार्य
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि 20 साल से सत्ता में ऐसी सरकार बैठी थी, जो पांच साल पहले बाल-बाल बची थी। मोदी सरकार खुद एक साल पहले अपने दम पर बहुमत नहीं ला सकी। डबल इंजन कैसे 2025 में ऐसा चमत्कार कर सकता है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में लेफ्ट पार्टियों को तगड़ा झटका लगा है। लेफ्ट पार्टियों में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (ML) (L), सीपीआई(M) और सीपीआई शामिल हैं। इन सभी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। 2020 में इन्होंने कुल 16 सीटें जीती थीं, लेकिन इस बार कुल मिलाकर केवल 3 सीटें ही हासिल कीं। माले ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सीपीआई(एम) ने एक सीट अपने नाम की। वोट शेयर में भी गिरावट आई, जो महागठबंधन की कमजोरी को दर्शाता है। CPI (ML) (L) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य की चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने इसे अस्वाभाविक और समझ से परे बताया। इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, '2010 जैसा फिर से हो गया है। यह वाकई समझना मुश्किल है।'

दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि 20 साल से सत्ता में ऐसी सरकार बैठी थी, जो पांच साल पहले बाल-बाल बची थी। मोदी सरकार खुद एक साल पहले अपने दम पर बहुमत नहीं ला सकी। डबल इंजन कैसे 2025 में ऐसा चमत्कार कर सकता है। उन्होंने कहा, 'यह बिहार की जमीन की हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाता। लेकिन ऐसा हुआ तो है। इसलिए हमें सभी कोणों से जांच करनी होगी, सही जांच करनी होगी। SIR तो था ही, धन हस्तांतरण भी अभूतपूर्व स्तर पर हुआ। लगभग 30 हजार करोड़ रुपये 3 करोड़ लाभार्थियों को नकद दिए गए। वह भी अभूतपूर्व था। हमें यह देखना होगा कि इसके क्या कारण हैं।'
लोकतंत्र का संकट बताया
माले नेता ने कहा कि यह विपक्ष का संकट नहीं है। यह लोकतंत्र का संकट है। उन्होंने कहा, 'मेरा मतलब है कि विपक्ष के बिना लोकतंत्र एक ऑक्सीमोरॉन है। इसलिए मैं इसे लोकतंत्र का संकट मानता हूं। हमें देखना होगा कि यह क्यों हुआ। केवल विपक्ष के लिए क्यों? यह पूरे देश के लिए संकट है। वहीं, सीपीआई के महासचिव एमए बेबी ने कहा कि नतीजे काफी अप्रत्याशित हैं। विपक्षी गठबंधन को और अधिक एकजुट प्रयासों की जरूरत है। बेबी ने कहा, ‘नतीजे काफी अप्रत्याशित हैं। हमारा आकलन था कि निर्वाचन आयोग के दुरुपयोग, बिहार में बेरोजगारी की स्थिति और लोकतांत्रिक शासन के अभाव पर हमने जो व्यापक अभियान चलाया था। उसे देखते हुए हम महागठबंधन की जीत की उम्मीद कर रहे थे। अब महागठबंधन को एक बड़ा झटका लगा है।’



