बिहार के एडवोकेट जनरल पीके शाही ने इस्तीफा दे दिया, नीतीश कुमार के करीबी वकील थे
Bihar Advocate General Resigns: बिहार के 22वें महाधिवक्ता पी.के. शाही ने 14 जून 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के पीछे रिशु श्री टेंडर प्रकरण और राजनीतिक बदलावों की चर्चाएं तेज हैं।

Bihar Advocate General Resigns: बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सूबे के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व मंत्री प्रशांत कुमार शाही ने बिहार के एडवोकेट जनरल के पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पी.के. शाही ने 14 जून 2026 को अपने पद से त्यागपत्र सौंपा है। वह 16 जनवरी 2023 से लगातार राज्य के 22वें महाधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हालांकि, अभी तक उनकी ओर से इस्तीफे का कोई भी आधिकारिक या स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन उनके इस अचानक उठाए गए कदम के बाद से ही पटना से लेकर दिल्ली तक सियासी हलकों में कयासों और चर्चाओं का दौर बेहद तेज हो गया है।
इस्तीफे के पीछे 'रिशु श्री टेंडर प्रकरण' की चर्चा तेज
पी.के. शाही के इस्तीफे की वजहों को लेकर इस समय प्रशासनिक महकमे में तीन मुख्य कयास लगाए जा रहे हैं। पहला और सबसे तात्कालिक कारण 'रिशु श्री टेंडर प्रकरण' को माना जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक, इस टेंडर मामले में संलिप्त अधिकारियों के बारे में महाधिवक्ता से कानूनी राय मांगी गई थी, जिसे इस बड़ी कार्रवाई की मुख्य वजह माना जा रहा है। इसके अलावा, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य में मुख्यमंत्री बदलने और नई सरकार के गठन के बाद महाधिवक्ता जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नई नियुक्तियां होना एक सामान्य प्रक्रिया है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि यह फैसला पूरी तरह से उनके व्यक्तिगत कारणों से जुड़ा हो सकता है, लेकिन इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नीतीश कुमार के रहे हैं करीबी सहयोगी
आपको बता दें कि प्रशांत कुमार शाही बिहार के सबसे सम्मानित कानूनविदों में से एक माने जाते हैं। उनका राजनीतिक और कानूनी करियर बेहद समृद्ध रहा है। उन्होंने साल 1979 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से कानून स्नातक (LLB) की डिग्री हासिल की थी और इसके ठीक बाद, 1980 से पटना हाईकोर्ट में अपनी वकालत की शुरुआत की थी। वे एक अनुभवी अधिवक्ता और कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी सहयोगी भी रहे हैं। पूर्व में वे बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री, पर्यावरण मंत्री और योजना विकास मंत्री के रूप में भी अपनी सफल सेवाएं दे चुके हैं।


