जमुई : स्वस्थ शरीर सफल जीवन की पहली सीढ़ी है: सुभाष

Apr 07, 2026 06:08 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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विश्व स्वास्थ्य दिवस पर जमुई में एक परिचर्चा में प्रो.डॉ. गौरी शंकर पासवान ने स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मानवता की आधारशिला है और स्वस्थ व्यक्ति ही समाज में शांति और उन्नति ला सकता है। संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम से बेहतर स्वास्थ्य संभव है, जो जीवन की सच्ची साधना है।

जमुई : स्वस्थ शरीर सफल जीवन की पहली सीढ़ी है: सुभाष

जमुई से मनोज कुमार तिवारी की रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 'मानव जीवन, समाज और राष्ट्र के विकास में स्वास्थ्य का महत्व' विषय पर नगर परिषद जमुई में एक परिचर्चा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर बोलते हुए प्रो.डॉ.गौरी शंकर पासवान ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना (1948) की स्मृति में की गई थी. हर वर्ष 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन, समाज और राष्ट्र की उन्नति में स्वास्थ्य का विशेष महत्व है। स्वास्थ्य प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है.यह मानवता की आधारशिला, समाज का दर्पण,जीवन का मौन प्रहरी तथा पहचान है ।

स्वस्थ शरीर सफल जीवन की पहली सीढ़ी है। अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन है। एक स्वस्थ व्यक्ति ही समाज में शांति और उन्नति कर सकता है। स्वस्थ व्यक्ति से ही स्वस्थ समाज बनता है,जो राष्ट्र की शान होता है, जिससे आर्थिक उन्नति होती है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन एक विशाल यान तो शरीर उसका रथ। इस रथ का पहिया धन, ज्ञान, पद और प्रतिष्ठा हो सकते हैं, लेकिन उसका सारथी केवल। स्वास्थ्य ही है। यदि सारथी कमजोर हो जाए, तो रथ चाहे सोने का ही क्यों ना हो आगे नहीं बढ़ सकता। अतः अच्छा स्वास्थ्य ही सबका मूल है। धन-दौलत, पद- प्रतिष्ठा और उपलब्धियां तभी सार्थक है, जब मानव शरीर और मस्तिष्क दोनों स्वस्थ हो। अतएव जरूरी है की स्वास्थ्य को आदत बनाया जाए,विकल्प नहीं। स्वास्थ्य की रक्षा ही जीवन की सच्ची साधना है। क्योंकि स्वस्थ मानव ही स्वस्थ विश्व का निर्माण कर सकता है। प्रगतिशील अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव श्री सुभाष पासवान ने कहा कि संतुलित भोजन मौन चिकित्सक है, जो स्वास्थ्य ही नहीं अपना जीवन और भविष्य बचाता है। स्वस्थ शरीर में ही महान विचार जन्म लेते हैं. कहते हैं कि स्वास्थ्य ही अमूल्य धन है। स्वास्थ्य वह धन है। अच्छा स्वास्थ्य मनुष्य के हाथों में ही होता है। आवश्यकता है तो सिर्फ ज्ञान और मेरा स्वास्थ्य मेरा अधिकार है। स्वास्थ्य है तो संसार है। एक सुंदर व स्वस्थ व्यक्ति ही समाज और देश के विकास में योगदान दे सकता है। अतः मानव को चाहिए कि अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देना चाहिए। डॉ.निरंजन कुमार दुबे ने कहा कि स्वास्थ्य ही धन है। यह कहावत अक्षरश: सत्य है। सकते हैं कि जब व्यक्ति अपने शरीर को मंदिर और मन को दीपक मानता है तभी जीवन प्रकाशित होता है। संतुलित भोजन अच्छा स्वास्थ्य का कारक है। प्रो.संजीव कुमार सिंह ने कहा कि मानव शरीर एक सुंदर मंदिर की तरह है। अच्छा स्वास्थ्य ही शरीर रूपी मंदिर की रक्षा करता है। स्वास्थ्य एक वृक्ष के समान है। संतुलित आहार स्वास्थ्य रूपी वृक्ष की जड़ है। नियमित व्यायाम उसका तना। सकारात्मक सोच ही शाखाएं हैं । दीर्घायु तथा सुख ही स्वास्थ्य रूपी वृक्ष का प्रतिफल है। स्वास्थ्य दिवस हमें सिखाता है कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि लंबी आयु नहीं, बल्कि स्वस्थ आयु है। शरीर को स्वस्थ रखना हम मानव का कर्तव्य है।

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