
बदलते मौसम में सर्दी, खांसी की मार, फेफड़े हो रहे जाम
वायरल, एलर्जी व सांस के मरीजों की 35 प्रतिशत तक वृद्धि दिन और रात के
भागलपुर, वरीय संवाददाता दिन और रात के तापमान का अंतर 12 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तक पहुंच चुका है। दिन में गुनगुनी गर्मी तो रात में ठंड का एहसास हो रहा है। जिसका असर हो रहा है कि बदलते मौसम में लोग सर्दी-खांसी से बेजार हो रहे हैं तो कइयों के फेफड़े तक जाम हो जा रहे हैं। जिसका असर सरकारी अस्पतालों में वायरल, एलर्जी व सांस के मरीजों की तकरीबन 35 प्रतिशत तक बढ़ी हुई संख्या के रूप में दिख रहा है। इस दौरान बीपी व शुगर के बीमारों की संख्या भी बढ़ी है। ओपीडी में वायरल, ब्रोंकियोलाइटिस के 60 प्रतिशत तक मरीज जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (मायागंज अस्पताल) के मेडिसिन व शिशु रोग ओपीडी में रोजाना 650 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं।

इनमें से करीब 60 प्रतिशत मरीज एलर्जी, वायरल फीवर से उपजे सर्दी, खांसी-बुखार व ब्रोंकियोलाटिस के मरीज होते हैं। वहीं सदर अस्पताल के ओपीडी में रोजाना 110 से 120 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। ब्रोंकियोलाइटिस के ज्यादातर मरीजों की उम्र एक से डेढ़ साल के बीच होती है। जबकि निमोनिया के ज्यादातर शिकार मरीज बच्चे या फिर बुजुर्ग मिल रहे हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार कहते हैं कि छोटे बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होने से संक्रमण तेजी से फेफड़ों तक पहुंच रहा है। कई मामले में तो बच्चों को अस्पताल में भर्ती होने तक नौबत आ पड़ रही है। वहीं मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी ने कहा कि बुजुर्गों, एलर्जिक व बच्चों को इस उतार-चढ़ाव वाले मौसम में बच के रहना चाहिए। रात में गर्म कपड़े पहनकर ही घर से निकलें, अन्यथा उनकी तबीयत खराब हो सकती है। ऐसे फैलता है संक्रमण - वायरल ब्रोंकियोलाइटिस एक-दूसरे के संपर्क में आने होने वाली संक्रामक बीमारी है। - घर में कोई एक व्यक्ति संक्रमित है तो उसे दूसरे व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। - संक्रमित और एलर्जिक व कम रोग प्रतिरोधक वाले व्यक्ति को मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। - हाथ को बार-बार धोना चाहिए और छींके तो मुंह पर हाथ रखकर। - बच्चों, एलर्जिक वाले लोगों को संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना चाहिए। ये करेंगे तो बचे रहेंगे संक्रमण से - बच्चों को ठंडी हवा और अचानक बदलते मौसम से बचाएं। - भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें। अगर जाएं तो मास्क लगाकर। - बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन कराएं। - सर्दी, जुकाम के शुरूआत में ही डॉक्टर के पास जाकर इलाज कराएं। मौसम में आए बदलाव से दिन एवं रात के तापमान में काफी अंतर आ गया है। इससे बच्चों, बुजुर्गों व बीमारों की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ओपीडी में रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या में तकरीबन 35 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। इससे बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। वायरल का संक्रमण ठीक होने में पांच से सात दिन का वक्त लगेगा। : डॉ. राजकमल चौधरी, प्रोफेसर एंड हेड मेडिसिन विभाग, जेएलएनएमसीएच भागलपुर

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