बोले भागलपुर: सन्हौली पंचायत में सिंचाई की व्यवस्था हो

हिन्दुस्तान, भागलपुर
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जगदीशपुर प्रखंड के तारडीहा गांव में खेती और मजदूरी मुख्य पेशा है, लेकिन सिंचाई की समस्या है। नाडा नदी सूख गई है, जिससे पानी की कमी हो रही है। गंदगी और सड़कें जर्जर हैं, जिससे लोग परेशान हैं। पंचायत ने जलापूर्ति और साफ-सफाई की व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया है।

बोले भागलपुर: सन्हौली पंचायत में सिंचाई की व्यवस्था हो

जगदीशपुर प्रखंड अंतर्गत सन्हौली पंचायत में तारडीहा बड़ा गांव है। यहां के वार्ड 5, 6, 7 सहित कुछ अन्य वार्डों के लोगों का कहना है कि गांव के लोगों का मुख्य पेशा खेती और मजदूरी है, लेकिन खेती में प्रमुख समस्या सिंचाई की है। पूर्व में सिंचाई की जो सुविधा थी वह नदी सूख जाने के कारण धीरे-धीरे खत्म हो गई। गांव में सड़क, नाला एवं सफाई की समस्या है। कई सड़कें कच्ची है तो कुछ ऐसी सड़कें हैं जो बनने के बाद जर्जर हो चुकी है। सन्हौली पंचायत में साफ-सफाई की उचित व्यवस्था नहीं है। गंदगी की वजह से सड़ांध बदबू हो रही है। नाला जाम रहता है और गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है। लोगों ने बताया कि गांव में कई जगहों पर पक्की सड़क भी नहीं है। जहां सड़क बनी भी है, वह भी अब जर्जर हो चुकी है। बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कत होती है। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत के इन वार्डों में कुल आबादी 1200 परिवारों की है, जिनका मुख्य व्यवसाय खेती और मजदूरी है। सिंचाई के लिए पहले नाडा नदी सहारा हुआ करती थी, लेकिन अब यह नदी लगभग समाप्त हो चुकी है। कई जगहों पर अतिक्रमण के कारण नदी का अस्तित्व खत्म हो गया है। अब किसानों को पंप सेट के सहारे सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे खर्च बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नगर पंचायत क्षेत्र होने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं。

सिंचाई की समस्या

पंडित सोनू झा ने बताया कि सन्हौली पंचायत के तारडीहा गांव में सात निश्चय योजना के तहत पानी की सुविधा दी गई। नल चलता तो है लेकिन बहुत कम समय के लिए। नतीजा यह है कि पानी के लिए भी कुएं पर निर्भरता है। गांव में पेयजल की सुविधा के लिए प्याऊ का निर्माण किया जाए, जिससे लोगों को आसानी से पानी मिल सके। उन्होंने बताया कि गांव में अंग्रेजों के समय का एक पुराना कुआं है, जिससे आज भी लोग पानी लेते हैं। इसकी नियमित मरम्मत और साफ-सफाई नहीं होने से समस्या बढ़ रही है।

नदी की स्थिति

कौशल किशोर मिश्रा ने बताया कि सन्हौली पंचायत से होकर गुजरने वाली नाडा नदी अब लगभग समाप्त हो चुकी है। आज स्थिति ऐसी हो गई है कि यह पहचानना भी मुश्किल है कि कभी इस गांव से नदी बहती थी। कई जगहों पर नदी का स्वरूप नाले जैसा हो गया है और लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लेने के कारण इसका अस्तित्व लगभग खत्म होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि सन्हौली पंचायत के अधिकांश लोग खेती और मजदूरी पर निर्भर हैं। खेती के लिए सिंचाई की उचित व्यवस्था जरूरी होती है। पहले नदी के कारण सिंचाई में कोई परेशानी नहीं होती थी, लोग सिंचाई के साथ घरों का भी कामकाज किया करते थे, लेकिन अब जलस्रोत खत्म होने से किसानों और ग्रामीणों को भी काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। नदी के सूखने से क्षेत्र का जलस्तर भी नीचे चला गया है, जिससे पानी की समस्या और बढ़ गई है।

सफाई की स्थिति

सुधांशु यादव ने बताया कि गांव से होकर गुजरने वाली नाडा नदी पर कई लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है, जिसके कारण इसका अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त हो गया है। पहले यह नदी सिंचाई और जलस्रोत का मुख्य आधार थी, लेकिन अब यह नाले में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान दें और नदी को पुनर्जीवित कराया जाए, ताकि सिंचाई और जल की समस्या दूर हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि गांव में साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है। गोनू बाबा धाम की ओर से आने वाले मुख्य रास्ते से गांव में प्रवेश करते ही नाडा नदी पर बने छोटे पुल के नीचे कूड़े का अंबार लगा हुआ है। ऐसे ही गांव के कई जगहों पर गंदगी फैली रहती है। बारिश के दिनों में इस कचरे से बदबू फैलती है, जिससे लोगों का रहना मुश्किल हो जाता है।

पंचायत की सड़कें जर्जर, आवागमन में हो रही परेशानी

राधाकांत झा ने बताया कि सन्हौली पंचायत के तारडीहा गांव की कई गलियों की सड़कें जर्जर हो चुकी हैं। कई गलियों में अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। वहीं गांव में जहां नाले बने हैं, वहां कई पर ढक्कन भी नहीं है। उसकी नियमित सफाई भी नहीं होती है, जिससे नाला जाम हो जाता है और गंदा पानी सड़कों पर बहने लगता है। उन्होंने बताया कि गांव की मुख्य सड़क तो अच्छी स्थिति में है, लेकिन गली-मोहल्लों की हालत बेहद खराब है। जर्जर सड़क हो जाने के कारण खासकर बारिश के दिनों में सड़कों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि इन सड़कों का जल्द मरम्मत या नए सिरे से निर्माण कराया जाए। उन्होंने बताया कि सरकार की सात निश्चय योजना के तहत गांव में काम बहुत कम हुआ है। जल आपूर्ति के लिए जलमीनार का निर्माण तो हुआ है, लेकिन उसमें पर्याप्त पानी नहीं मिलता है। कई घरों तक अब भी पाइपलाइन नहीं पहुंची है। उन्होंने बताया कि गांव से होकर गुजरने वाली नाडा नदी की उचित देखभाल नहीं होने के कारण उसका अस्तित्व समाप्त होता जा रहा है।

बोले जिम्मेदार

गांव में नाला निर्माण, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर संबंधित विभाग से जांच कराई जाएगी। पंचायत फंड प्राप्त होते ही अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। सन्हौली पंचायत से होकर गुजरने वाली नाडा नदी की साफ-सफाई और पुनर्जीवन के लिए विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि नदी अतिक्रमण पाया जाता है, तो जांच के बाद उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।

-सतीश कुमार, सीओ, जगदीशपुर

इनकी भी सुनिए

गांव के किसानों की परेशानी को देखते हुए सिंचाई की व्यवस्था करायी जानी चाहिए। नाडा नदी को पुनर्जीवित करने की पहल होनी चाहिए और स्टेट ट्यूबवेल की व्यवस्था करायी जानी चाहिए। इससे किसानों की समस्या दूर होगी।

-पंडित सोनू झा

गांव में सफाई की स्थिति ठीक नहीं है। सफाईकर्मी भी महीने में कभी-कभार आते हैं, जिससे नाला जाम हो जाता है और गंदा पानी सड़कों पर फैल जाता है। इससे लोगों को परेशानी होती है और वातावरण भी अस्वच्छ हो जाता है।

-सुनीता देवी

गांव की गलियों की सड़कें काफी जर्जर हो चुकी हैं। बारिश के समय सड़कों पर पानी जमा हो जाता है, जिससे चलना मुश्किल हो जाता है। लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। इनकी नए सिरे से निर्माण कराया जाए।

-राधाकांत झा

यह गांव मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। पहले नाडा नदी जल का प्रमुख स्रोत थी, जो अब समाप्त हो गई है। अगर नदी की पुनः खुदाई कराई जाए तो इससे सिंचाई की समस्या दूर हो सकती है।

-उज्जल कुमार झा

गांव की अधिकांश गलियों की सड़कें खराब हो चुकी हैं, केवल मुख्य सड़क ही ठीक है। गांव के पास प्रसिद्ध गोनू बाबा धाम है, जहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। सड़क जर्जर होने से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी होती है।

-रमेश कुमार राय

वार्ड आठ में पानी की सुविधा पर्याप्त नहीं है। यहां से दूर स्थित जलमीनार से पानी आता है, लेकिन कम समय के लिए सप्लाई होने से लोगों का काम प्रभावित होता है। नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति की व्यवस्था की जानी चाहिए।

-विकास झा

गांव के कई बुजुर्गों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, जिससे उनका जीवन यापन प्रभावित हो रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सहायता की जरूरत है। उनकी पहचान कर उन्हें योजनाओं का लाभ मिले।

-गनौरी राय

गांव में बिजली की सुविधा तो है, लेकिन सभी जगह पर्याप्त लाइट नहीं है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। जिससे आवागमन में परेशानी होती है। सोलर लाइट सही जगह नहीं है। गांव में रोशनी की व्यवस्था बेहतर की जानी चाहिए।

-शशि भूषण राय

गांव से होकर बहने वाली नाडा नदी अब लगभग समाप्त हो चुकी है। इसके कारण गांव का जलस्रोत और सिंचाई दोनों प्रभावित हुआ है। यदि नदी को पुनर्जीवित किया जाए तो क्षेत्र के किसानों को सिंचाई में सहायता मिलेगी।

-कौशल किशोर मिश्रा

गांव में सफाई व्यवस्था सही नहीं है। महीने में केवल दो-तीन बार ही सफाई होती है। कूड़ा उठाने की सुविधा बंद हो गई है। जिसके कारण लोग खुले में कूड़ा फेंकते हैं। नियमित सफाई और कूड़ा उठाव की व्यवस्था होनी चाहिए।

-बेबी देवी

वार्ड आठ में पानी की सुविधा के लिए प्याऊ की जरूरत है। वर्तमान में लोग कुएं पर निर्भर हैं। गांव में पहले कई कुआं था। अब एक ही कुआं बचा है, जिसकी मरम्मत भी जरूरी है, ताकि पानी की समस्या कम हो सके।

-फूल कुमार राय

गांव की कई गलियों में सड़क निर्माण अधूरा है। पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत ठीक से नहीं हुई, जिससे रास्ते खराब हो गए हैं। केवल मुख्य सड़क ठीक है, बाकी गलियों की स्थिति जर्जर हो चुकी है।

-नरेश रविदास

गांव में कूड़ेदान की व्यवस्था नहीं है, जिससे लोग कूड़ा इधर-उधर फेंकते हैं। गांव से गोनू बाबा धाम जाने वाले रास्ते पर पुलिया के नीचे कूड़े का ढेर लगा है, जिससे बदबू फैलती है। नियमित सफाई होने से स्वच्छता बनी रहेगी।

-अरविंद कुमार झा

सात निश्चय योजना के अंतर्गत गांव में पाइपलाइन तो बिछाई गई है, लेकिन जलापूर्ति नियमित नहीं है। थोड़े समय के लिए ही लोगों को पानी मिल रहा है। साथ ही गांव में बिजली के पोलों पर पर्याप्त लाइट नहीं है, जिससे अंधेरा रहता है।

-फुदन राय

गांव में नाला की स्थिति खराब होती जा रही है। कई जगह नाला टूट गया है और ढक्कन भी नहीं है, जिससे गंदा पानी जमा रहता है और उसे बदबू आती है। पानी निकासी के लिए नए नालों का निर्माण व पुराने की मरम्मत होनी चाहिए।

-बाबूलाल झा

गांव से होकर बहने वाली नाडा नदी पर अतिक्रमण के कारण उसका अस्तित्व खत्म होता जा रहा है। पहले यह नदी सिंचाई का मुख्य स्रोत हुआ करती थी। यदि नदी को पुनर्जीवित किया जाए तो खेती की स्थिति बेहतर हो सकती है।

-सुधांशु यादव

समस्याएं

1. गांव में जलापूर्ति की व्यवस्था के लिए पाइपलाइन होने के बावजूद कम समय पानी आता है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए कुएं पर निर्भर रहना पड़ता है।

2. गांव में गलियों की सड़कों की स्थिति जर्जर हो गई है, बारिश में इन गलियों में पानी भर जाता है, जिससे लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कत होती है।

3. गांव में सफाई व्यवस्था नियमित नहीं होने से नाला जाम रहता हैं। लोग कूड़ा इधर-उधर फेंक देते हैं, जिससे गंदगी व बदबू के कारण लोगों को परेशानी होती है।

4. गांव में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था है, लेकिन कई जगह लाइट नहीं लगी है या खराब हो चुकी है। शाम होते ही अंधेरा छा जाता है। आने-जाने में परेशानी होती है।

5. गांव की नाडा नदी के समाप्त होने और उस पर अतिक्रमण के कारण जल स्रोत कमजोर हो गया है, जिससे खेती की सिंचाई प्रभावित हो रही है।

सुझाव

1. गांव में जलापूर्ति सुधारने के लिए पाइपलाइन से नियमित और पर्याप्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, साथ ही जलमीनार या प्याऊ का निर्माण कराया जाए।

2. सभी गलियों की सड़कों का नए सिरे से निर्माण या मरम्मत करायी जाए, ताकि बारिश के समय जलजमाव न हो और लोगों को आवागमन में सुविधा हो।

3. गांव में नियमित सफाई व्यवस्था लागू की जाए, कूड़ेदान लगाए जाएं और नालों की समय-समय पर सफाई कर जल निकासी को बेहतर बनाया जाए।

4. सभी बिजली पोलों पर पर्याप्त लाइट लगाई जाए और खराब लाइटों की मरम्मत की जाए, ताकि पूरे गांव में रात के समय रोशनी बनी रहे।

5. नाडा नदी से अतिक्रमण हटाकर उसकी पुनः खुदाई और संरक्षण किया जाए, ताकि जल स्रोत मजबूत हो और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सके।

प्रस्तुति: संतोष कुमार, पीताम्बर शुक्ला, फोटोग्राफ: कान्तेश

सामान्य प्रश्न

गांव में जलापूर्ति की समस्या क्या है?
गांव में जलापूर्ति की व्यवस्था के लिए पाइपलाइन होने के बावजूद कम समय पानी आता है, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए कुएं पर निर्भर रहना पड़ता है।
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