जमुई : लाल गलियारे में जमकर बरसे वोट, दशक पूर्व जहां संगीनों के साये में होता था मतदान

जमुई : लाल गलियारे में जमकर बरसे वोट, दशक पूर्व जहां संगीनों के साये में होता था मतदान

संक्षेप:

सोनो के लाल गलियारे में लोकतंत्र के महापर्व में मतदाताओं ने उत्साह से भाग लिया। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहली बार मतदान केंद्र पर 70-75 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने मतदाताओं का आत्मविश्वास बढ़ाया, और पहले के डर को पीछे छोड़ते हुए, उन्होंने निर्भीकता से अपने मत का प्रयोग किया।

Nov 11, 2025 05:21 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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सोनो, रजनीकान्त। प्रखंड के लाल गलियारे में भी जमकर बरसे वोट। लोकतंत्र के महापर्व में मतदाताओं ने उत्साह के साथ भाग लिया तथा निर्भिक होकर अपना अपना मत का प्रयोग कर अपने प्रतिनिधि का चुनाव किया।एक दशक पूर्व जहाँ संगीनों के साये में मतदान हुआ करता था नक्सलियों में मत वहिष्कार के फरमान मतदाताओं को काफी प्रभावित किया करता रहा साथ ही नक्सलियों के फरमान के बाद मतदाता मतदान के लिए घर से बाहर नहीं निकला करते थे इसका परिणाम यह होता था कि क्षेत्र के दर्जनों मतदान केंद्रों पर एक भी मत नहीं पड़ता था। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के अधिकांश मतदान केंद्रों पर मतदान तो होता था लेकिन मतदान का प्रतिशत काफी कम हुआ करता था।

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उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद आज पहली बार विधान सभा चुनाव में अपग्रेड मिडिल स्कूल पनारी में मतदान केंद्र बनाया गया है (पनारी मतदान केंद्र सँख्या 174 ) जहां दिन के 1 बजे तक 50 प्रतिशत से ज्यादा मतदाता अपने अपने मतों का प्रयोग कर चुके थे उसके बाद भी उक्त मतदान केंद्र पर महिला पुरूष मतदाताओं की लंबी कतार लगी हुई थी। अनुमान यह लगाया गया कि मतदान के समाप्ति तक 70 से 75 प्रतिशत मतदाता इस मतदान केंद्र पर मतदान में भाग लेकर अपना अपना मत का प्रयोग कर लेंगे जो कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के मतदान केंद्र के लिये एक बड़ी उपलब्धि होगी। बता दे कि मतदाताओं को मतदान के प्रति आकर्षित करने के लिये मतदान केंद्र 174 को चुनाव आयोग द्वारा आदर्श मतदान केंद्र का दर्जा देकर काफी सुसज्जित किया गया साथ मतदाता व मतदान केंद्र की सुरक्षा में चप्पा चप्पा केन्द्रीय सुरक्षा बलों को लगाया गया है। 2004 के बाद लगातार सुरक्षा कारणों से पनारी मतदान केंद्र के अन्य स्थानों पर स्थान्तरित कर दिया जाता था, मतदान केंद्र के स्थान्तरित किये जाने के बाद मतदाताओं में मतदान के प्रति उत्साह नहीं दिखता था आज वही मतदाता काफी उत्साह के साथ मतदान में भाग ले रहे थे। क्षेत्र में लगातार सुरक्षाबलों की उपस्थिति व वहाँ के लोगों को प्रशासन के प्रति जगत विश्वास वहाँ का परिदृश्य बदल कर रख दिया।आज जिस प्रकार निर्भिक होकर महिला पुरुष मतदाता कतारबद्ध होकर उत्साह के साथ मतदान में भाग ले रहें हैं इस से यह साबित हो रहा है कि उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था में उन्हें पूरा विश्वास है। नक्सल प्रभावित चरकापत्थर थाना क्षेत्र में चुनाव के दौरान कई नक्सली घटना घटित हुई है। जिसमे मतदान कर्मी के अपहरण के साथ साथ सुरक्षाबलों पर हमला तक शामिल है। लोकसभा चुनाव 2009 के दौरान चुनाव संपन्न कराकर वापस लौट रहे मतदानकर्मियों व सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए नक्सलियों द्वारा लैंडमाइंस विस्फोट किया गया था। यह तो सुखद संयोग ही रहा कि विस्फोट के टाइमिंग मिसिंग के कारण सभी मतदानकर्मियों व सुरक्षाबल बाल बाल बच गये। यह घटना चरकापत्थर सोनो मार्ग के गण्डापहाड़ी के पास घटित हुई थी। लेंड माइंस विस्फोट के बाद नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग भी शुरू कर दी लेकिन मतदानकर्मियों के साथ चल रहे आईटीबीपी के जवानों ने मोर्चा संभाला व नक्सलियों को पीछे लौटने को मजबूर कर दिया। पंचायत चुनाव 2011 में भी नक्सलियों ने मतदानकर्मियों को निशाना बनाया।मतदान करने जा रहे मतदानकर्मियों से भरा वाहन को लैंडमाइंस बिस्फोट निशाना बनाया जिसमें वाहन की चालक की मौत मौके पर हो गई जबकि वाहन पर सवार सभी मतदानकर्मियों को नक्सलियों द्वारा अगवा कर लिया गया था। अगवा मतदानकर्मियों को ढूंढने वायु सेना का हेलिकॉप्टर को भी जमुई में उतरना पडा था। पुलिस के बढ़ते दबाब को देखते हुए नक्सलियों ने प्रशसान से अपहृत मतदान मतदानकर्मियों को मुक्त करने के लिये प्रशासन से सैफ जॉन सुनिश्चित करने की मांग रखी, प्रशसन द्वारा नक्सलियों को सेफ जॉन मुहैया कराया गया तब जाकर नक्सलियों द्वारा मतदानकर्मियों को मुक्त किया गया। लेकिन इस चुनाव में परिदृश्य बिल्कुल बदला बदला से दिखा ,अब न तो मतदाताओं में ओर न ही मतदानकर्मियों में नक्सलियों का कोई खोफ देखने को मिला।