पुल टूटने से थमी रफ्तार, बिहपुर में जनजीवन अस्त-व्यस्त
बिहपुर से बड़ी मात्रा में भेजी जाती थीं दूध और सब्जियां मरीजों को कटिहार या

बिहपुर,संवाद सूत्र। विक्रमशिला सेतु का स्लैब ध्वस्त होने के बाद बिहपुर में जनजीवन प्रभावित हुआ है। खेती और पशुपालन पर निर्भर इस इलाके के लोगों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। खासकर दूध विक्रेता, सब्जी उत्पादक और मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दियारा क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध और सब्जियां भागलपुर भेजी जाती थीं, जो अब पूरी तरह बाधित हो गई हैं। सोनबर्षा निवासी चंदन कुमार बताते हैं कि वे रोजाना मोटरसाइकिल से करीब दो क्विंटल दूध लेकर भागलपुर जाते थे, लेकिन पुल टूटने के बाद उनका यह काम ठप हो गया है। यही स्थिति लालू कुमार, यादव, उमेश सिंह और सुमित कुमार जैसे अन्य दूध विक्रेताओं की भी है。
स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रभाव
पुल के टूटने का असर केवल व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ा है। बिहपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से गंभीर मरीजों को अब भागलपुर रेफर करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में मरीजों को कटिहार या पूर्णिया भेजने की तैयारी की जा रही है, जिससे इलाज में देरी होने की आशंका बढ़ गई है। समय और दूरी दोनों बढ़ने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और भी बढ़ गई है।
सरकारी कर्मचारियों पर प्रभाव
सरकारी कर्मचारियों की दिनचर्या भी प्रभावित हुई है। कई कर्मचारी प्रतिदिन भागलपुर से बिहपुर आते-जाते थे, लेकिन अब आवागमन में आई रुकावट के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं क्षेत्र के कई बच्चे भागलपुर के निजी विद्यालयों में पढ़ाई करते हैं, लेकिन पुल टूटने के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो गई है।
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