एकता और सेवा से ही संभव है समाज का विकास : प्रो. कुमारी सुदामा यादव
कहलगांव, निज प्रतिनिधि। शंकर साह विक्रमशिला महाविद्यालय, कहलगांव की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई 01

शंकर साह विक्रमशिला महाविद्यालय, कहलगांव की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई 01 एवं 02 के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का सोमवार को भव्य समारोह के साथ समापन हुआ। समापन अवसर पर स्वयंसेवकों में विशेष उत्साह और उमंग देखने को मिला। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान संकाय की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर कुमारी सुदामा यादव ने स्वयंसेवकों को सामाजिक सेवा की भावना जागृत करने तथा समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वे स्वयं कहलगांव की बेटी हैं और इसी महाविद्यालय की छात्रा रह चुकी हैं। उस समय कक्षाएं छात्राओं से भर नहीं पाती थीं और मुश्किल से 20 छात्राएं पढ़ती थीं, लेकिन आज छात्राओं की बढ़ती संख्या देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।
उन्होंने इसे नारी सशक्तीकरण का सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि एकता के बिना विकास की कल्पना संभव नहीं है। स्वामी विवेकानंद के विचार “रुको नहीं, चलते रहो” का उल्लेख करते हुए तथा रामधारी सिंह दिनकर की कृति ‘रश्मिरथी’ की पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में संघर्ष के महत्व को समझाया। साथ ही छात्रों को सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पुस्तकों से मित्रता करने की सलाह दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य राजेश कुमार मिश्रा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। विशिष्ट अतिथि रणधीर चौधरी एवं डॉ. संतोष कुमार ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर एनएसएस पदाधिकारी डॉ. अजय कुमार एवं उमाशंकर पासवान ने सात दिवसीय शिविर की रूपरेखा प्रस्तुत की। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में स्वयंसेवकों द्वारा स्वागत गीत, नंदनी कुमारी का एकल नृत्य तथा पूजा कुमारी द्वारा प्रस्तुत मैथिली गीत “राम जी से पूछे जनकपुर के नारी...” ने दर्शकों का मन मोह लिया।
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