मुंगेर: कम लागत और ज्यादा मुनाफा, गेंदा फूल की खेती से होंगे मालामाल
मुंगेर में आत्मा द्वारा फूलों की वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती पर दो दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य किसानों और ग्रामीण युवाओं को आधुनिक फूलों की खेती की तकनीकों से अवगत कराना था। कार्यक्रम में गेंदा फूल की विशेष प्रजातियों और कृषि यंत्रों के उपयोग पर चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने इसे लाभकारी बताया।

मुंगेर, निज प्रतिनिधि। संयुक्त कृषि भवन सफियाबाद में आत्मा द्वारा फूलों की वैज्ञानिक एवं उन्नत खेती विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के किसानों, प्रगतिशील उद्यान प्रेमियों एवं ग्रामीण युवाओं को फूलों की आधुनिक खेती से संबंधित वैज्ञानिक तकनीकों, प्रजातियों और यांत्रिक विधियों की जानकारी उपलब्ध कराना था, ताकि वे फूल उत्पादन के क्षेत्र में अधिक लाभ अर्जित कर सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कृषि पदाधिकारी सह पीडी आत्मा सुष्मिता ने की। डीएओ ने अपने संबोधन में बताया कि वर्तमान समय में फूलों की मांग स्थानीय बाजारों से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक तेजी से बढ़ रही है।
ऐसे में वैज्ञानिक पद्धति से फूलों की खेती करके किसान न केवल अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं बल्कि कृषि के विविधीकरण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने जलवायु, मिट्टी के चयन, उर्वरक प्रबंधन, सिंचाई पद्धति तथा रोग-कीट नियंत्रण पर विस्तृत जानकारी दी। जबकि केवीके मुंगेर के उद्यान वैज्ञानिक मुकेश कुमार ने गेंदा फूल की उन्नत प्रजातियों, रोपण तकनीक, पौध उत्पादन, पौधों की दूरी, पोषण प्रबंधन एवं फूल तुड़ाई के वैज्ञानिक समय पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि गेंदा एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक फूल है, जिसकी खेती पूरे वर्ष की जा सकती है। इसकी विविध प्रजातियां जैसे अफ्रीकन एवं फ्रेंच गेंदा व्यापारिक दृष्टि से अत्यंत लाभदायक हैं। कुमार ने विशेष रूप से ल्यूटीन पिगमेंटेशन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गेंदा फूल से प्राप्त ल्यूटीन पिगमेंटेशन का उपयोग मुर्गी पालन उद्योग में मुर्गियों के भोजन में किया जाता है। इससे अंडों में प्राकृतिक पीला रंग बढ़ता है, जो बाजार में अधिक मूल्य दिलाने में सहायक होता है। इस प्रकार गेंदा फूल न केवल सजावटी उपयोग में बल्कि औद्योगिक एवं पोषण संबंधी उपयोग में भी अत्यंत उपयोगी है। फूलों की खेती में उपयोग होने वाले आधुनिक यंत्रों तथा तकनीकों का विस्तृत जानकारी प्रदान किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में खेत की तैयारी, रोपाई, गुड़ाई, सिंचाई तथा कटाई की प्रक्रियाओं को यंत्रीकृत करके न केवल श्रम की बचत की जा सकती है, बल्कि उत्पादन क्षमता भी बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर प्रणाली, प्लास्टिक मल्चिंग, पावर वीडर तथा अन्य यंत्रों के उपयोग से होने वाले लाभों की विस्तारपूर्वक चर्चा की।कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया। किसानों ने फूलों की खेती को आय बढ़ाने के एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में अपनाने में गहरी रुचि दिखाई। कार्यक्रम का संचालन उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ और प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत लाभकारी बताया।

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