अररिया : सत्ता में रहते हुए भी सरयू बाबू ने सादगी और जनसेवा को माना सर्वोपरि
बिहार के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्व. सरयू मिश्र की 106वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और नागरिकों ने उनके स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उनके सिद्धांतनिष्ठ राजनीति और सादगी को याद किया। कार्यक्रम में बच्चों के बीच स्कूल बैग भी वितरित किए गए।

बथनाहा, एक संवाददाता। बिहार सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री, प्रखर समाजवादी चिंतक एवं सादगी की मिसाल रहे स्वर्गीय सरयू मिश्र की 106वीं जयंती गुरुवार को श्रद्धा, सम्मान और संकल्प के साथ मनाई गई। भद्रेश्वर स्थित उनके स्मारक स्थल पर सरयू मिश्र मेमोरियल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित समारोह में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में फारबिसगंज विधायक मनोज विश्वास, ट्रस्ट संचालक शंभू नाथ मिश्र, अशोक मिश्रा, पूर्व प्रधानाध्यापिका इंदिरा मिश्रा, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल सिन्हा, जिलाध्यक्ष शाद अहमद, कांग्रेस नेता शंकर प्रसाद साह, श्रीकुमार ठाकुर, दिलीप पासवान, भाजपा नेता प्रताप नारायण मंडल, फारबिसगंज नगर परिषद के उपमुख्य पार्षद प्रतिनिधि बुलबुल यादव, जदयू नेता रमेश सिंह, पवन मिश्रा, शिशिर मिश्रा, हरि मेहता, कंचन दा समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत भजन, कीर्तन से हुई। रूपेश मिश्रा व श्रीकर परासर की टीम ने भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। इसके बाद वक्ताओं ने स्व. सरयू मिश्र के जीवन, संघर्ष और सिद्धांतनिष्ठ राजनीति पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि वे ऐसे नेता थे, जिनकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। सत्ता में रहते हुए भी उन्होंने सादगी और जनसेवा को सर्वोपरि रखा। इस अवसर पर संसाधनविहीन एवं कमजोर वर्ग के बच्चों के बीच स्कूल बैग का वितरण किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में वास्तविक बदलाव संभव है और यही स्व. सरयू मिश्र के विचारों की सच्ची अभिव्यक्ति है। समारोह के दौरान उनके निकट सहयोगियों और परिजनों ने जीवन से जुड़े कई अनछुए किस्से साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा दौर में जब राजनीति पर स्वार्थ और अवसरवाद के आरोप लगते हैं, ऐसे समय में सरयू मिश्र का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। बिहार के विकास के लिए उनके विचारों को आत्मसात करना जरूरी है। कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि सरयू मिश्र को सच्ची श्रद्धांजलि उनके मूल्यों को अपने आचरण में उतारना ही है।

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