जमुई: स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को तार तार कर रहे समाज के मुट्ठीभर लोग

जमुई: स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को तार तार कर रहे समाज के मुट्ठीभर लोग

संक्षेप:

जमुई में स्वतंत्रता सेनानियों की याद में तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा को एसडीएम ने राजनीतिक षड्यंत्र के तहत रोकने का प्रयास किया। निर्भय प्रताप सिंह ने राष्ट्रपति और पीएम को शिकायत की। यात्रा के...

Sep 07, 2025 05:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, भागलपुर
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जमुई। नगर प्रतिनिधि भारत राष्ट्र के निर्माण के लिए न जाने कितने लोगों ने अपना बलिदान दिया है।तब हमारा देश एक स्वतंत्र देश के रुप मे हमलोगों को हासिल हुआ।देश को स्वतंत्रता दिलाने के पीछे उन बलिदानियों ने एक सपना देखा था।एक ऐसे भारत के निर्माण की कल्पना की थी जहां न कोई भेदभाव होगा और न ही कोई आपसी विद्वैष।उन स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के बाद अंग्रेजों ने देश को आजाद तो कर दिया लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत नही बन सका।उन्होंने कहा कि आजादी के 75 साल से अधिक बीत गए लेकिन बहुत ही दुख की बात है कि इस देश मे तिरंगे के सम्मान मे हम कोई कार्यक्रम नही कर सकते।हम

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तिरंगे के मान सम्मान के लिए कोई यात्रा नही निकाल सकते।उन्होंने कहा कि बीते 12 अगस्त को हमारे द्वारा निकाली गई यात्रा को एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत जिले के एसडीम ने जिस ढंग से रोकने का प्रयास किया।वह हमारी स्वतंत्रता को शर्मसार किया है।देश के तिरंगे का अपमान किया है। निर्भय प्रताप सिंह ने कहा कि आज भी देश के अंदर कुछ मुट्ठीभर ऐसे लोग हैं जो स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों को तार तार कर रहे हैं।निर्भय प्रताप सिंह ने कहा कि एसडीएम के विरुद्ध मे लिखित शिकायत देश के राष्ट्रपति और पीएम मोदी के अलावा सूबे के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और सीएम नीतीश कुमार से की जा रही है।उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा निकाली गई तिरंगा यात्रा जिले के कुछ प्रशासनिक अधिकारियों व उनके कुछ राजनीतिक आकाओं के गले नही उतर रही थी और उससे बढ रही हमारी लोकप्रियता से घबडाकर उनलोगों ने यात्रा को ही रोकने का निर्णय ले लिया।लेकिन हम रुकने वाले नही थे और हमने तिरंगा और राष्ट्र के सम्मान मे राषट्र गुणगान यात्रा निकालने का निर्णय लिया।25 अगस्त से शुरु हुई यात्रा के आज 13 दिन पूरे हुए हैं।इस दौरान 700 किमी का सफर तय किया गया।जमुई विधानसभा क्षेत्र के करीब 80 से अधिक राजस्व गांवों मे सभाएं और चौपाल लगाए गए और लोगों मे राष्ट्रवाद की भावना जागृत की गई।उन्होंने कहा कि जिन जिन गांवों मे यात्रा गई।वहां लोगों का अपार समर्थन मिला और लोग खासकर नई पीढी के युवा और बच्चे तिरंगे की मर्यादा और इसके मान सम्मान से अवगत हुए।उन्हें इसका बोध कराया गया कि तिरंगा हमारी पहचान है।यह हमारा गुरुर है।उन्होने कहा कि लोग बिना संघर्ष की राजनीति करना चाहते हैं।लेकिन जबतक संघर्ष नही किया जाएगा तबतक एक अच्छे राजनेता के रुप मे कोई भी व्यक्ति कार्य नही कर सकता।संघर्ष करने वाला ही गरीबों और असहायों की समस्याओ को समझ सकता है।उन्होंने कहा कि जिले के एसडीम अभी भी राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बने हैं और उसके बाहर निकलकर कुछ नही सोच पा रहे हैं।शायद यही कारण है कि हमने तोरणद्वार लगाने के लिए अनुमति मांगी तो उन्होंने इसे दूसरे विभाग पर सौंप दिया।